*मर्यादा की कसौटी विचारधारा देखकर क्यों बदलें?

    हम आखिर कैसा समाज बनाना चाहते हैं? ऐसा समाज, जो किसी मंत्री की अश्लील, अपमानजनक और अहंकारपूर्ण भाषा पर आक्रोश व्यक्त करे, लेकिन वही भाषा जब किसी आंदोलनकारी…

लोकमानस के सखा ।

  भारत की आत्मा में बसे सनातन धर्म के महान ग्रन्थ — रामायण, महाभारत, श्रीमद् भागवत, वेद, उपनिषद्, पुराण और गीता — केवल पुस्तकें नहीं हैं। ये लोकमानस के सखा…

नामांतरण घोटाला: यह सिर्फ अपराध नहीं, पूरी व्यवस्था का एक्स-रे है.

    (अभिषेक मिश्रा)   _हर बड़ा घोटाला केवल दोषियों को नहीं, व्यवस्था की कमजोरियों को भी बेनकाब करता है। इंदौर नगर निगम का नामांतरण घोटाला भी अब उसी मोड़…

हमारा चाहना और प्रकृति का चाहना

  व्यक्ति का चाहना उसकी अभिलाषा का अंग होता है और व्यक्ति के लिए प्रकृति का चाहना उसके कर्मों का फल होता हैl दो प्रतिशत लोग ऐसे भाग्यशाली होते हैं…

Manual Of Mind -भगवान् से अपनापन

_*।। श्रीमद्भगवद्गीता ।। वास्तव में समता ही तत्त्व है। गीता में कहा है—   इहैव तैर्जितः सर्गो येषां साम्ये स्थितं मनः। ( गीता १४/२५ ) अर्थात् जिनका मन समता में…

जगन्नाथ रथ यात्रा : सामाजिक समरसता और भारत के राष्ट्रीय एकत्व का प्रतीक

    उतार चढ़ाव, विध्वंस और पुनर्निर्माण से भरा इतिहास       उड़ीसा प्राँत के पुरी में विश्व प्रसिद्ध रथोत्सव और जगन्नाथ रथयात्रा इस वर्ष 16 जुलाई से आरंभ…

।। संवेदनशीलता का संतुलन ।।

_   समय के साथ व्यक्ति बदलता है, परन्तु जीवन मूल्य नहीं। दायरे और दिशाएं बदलती हैं, मगर आदर्श एवं उद्देश्य नहीं। संवेदनशीलता में करुणा, संतुलन, धैर्य और विवेक का…

विवेक द्वारा स्वयं को जानना

    मनुष्यों को जानने, मानने और करने की तीन शक्तियाँ मिली हुई है। मानने की शक्ति भगवान् को मानने में, जानने की शक्ति स्वयं को और संसार को जानने…

पूर्व जन्म के ऋण अनुबंध और वर्तमान जीवन का रहस्य

    भृगु संहिता मनुष्य के वर्तमान जन्म के ऊपर पिछले जन्म अथवा जन्मों के प्रभाव का दस्तावेज है जो 'महर्षि भृगु' और उनके पुत्र 'शुक्र' के संवाद के रूप…