इस तरह से ध्यान लगाओ, पूरा शरीर ऊर्जा से भर जाएगा

इस तरह से ध्यान लगाओ, पूरा शरीर ऊर्जा से भर जाएगा

इस तरह से ध्यान लगाओ, पूरा शरीर ऊर्जा से भर जाएगा   बस तीन से पाँच मिनट। बिना किसी खर्च के। बिना किसी विशेष साधन के। सिर्फ अपनी नाक के…
जगद्गुरु आदि शंकराचार्य:अद्वैत वेदांत के प्रणेता, सनातन संस्कृति के पुनरुत्थानकर्ता,

जगद्गुरु आदि शंकराचार्य:अद्वैत वेदांत के प्रणेता, सनातन संस्कृति के पुनरुत्थानकर्ता,

अद्वैत वेदांत के प्रणेता, सनातन संस्कृति के पुनरुत्थानकर्ता, देश के चार कोनों पर चार पीठों की स्थापना करने वाले जगद्गुरु आदि शंकराचार्य। भारतीय दार्शनिक परम्परा में अद्वैत वेदान्त वह सर्वोच्च…
अक्षय तृतीया: बाजार की चमक-दमक के बीच कहीं खो न जाए वास्तविक अर्थ

अक्षय तृतीया: बाजार की चमक-दमक के बीच कहीं खो न जाए वास्तविक अर्थ

-#मनोज_जोशी   आज जब हम अक्षय तृतीया की बात करते हैं, तो अक्सर चर्चा सोना खरीदने और बाजार की चमक-दमक तक सीमित रह जाती है। लेकिन इस दिन का वास्तविक…
Geeta

अभिमन्यु:- चक्रव्यूह की mystical यात्रा और अपूर्णता की पूर्णता ( भाग – 02)

    प्रत्येक मनुष्य इस संसार में एक चक्रव्यूह में प्रवेश करता है जिसका नाम है — जीवन। उसे प्रवेश की विधि पता होती है — जन्म। किन्तु निकास का…
धर्मस्थलों के नियम: परंपरा, अनुशासन और मर्यादा का प्रश्न

धर्मस्थलों के नियम: परंपरा, अनुशासन और मर्यादा का प्रश्न

  मनोज_जोशी :-- धर्मस्थलों में प्रवेश को लेकर नियम और व्यवस्थाएँ समय-समय पर चर्चा का विषय बनती रही हैं, लेकिन यदि इन्हें व्यापक दृष्टि से देखा जाए तो स्पष्ट होता…
तांत्रिक” शब्द तंत्र से बना है, जिसका अर्थ है “एक प्रणाली” या “मार्ग।”

तांत्रिक” शब्द तंत्र से बना है, जिसका अर्थ है “एक प्रणाली” या “मार्ग।”

"तांत्रिक" शब्द तंत्र से बना है, जिसका अर्थ है "एक प्रणाली" या "मार्ग।" तांत्रिक वह व्यक्ति है जो इस प्रणाली के माध्यम से ऊर्जा, चेतना और ब्रह्मांडीय शक्तियों को समझने…
त्रिपुरसुन्दरिअष्टकम्:देवी त्रिपुर सुंदरी को समर्पित एक स्तोत्र

त्रिपुरसुन्दरिअष्टकम्:देवी त्रिपुर सुंदरी को समर्पित एक स्तोत्र

    देवी त्रिपुर सुंदरी को समर्पित एक स्तोत्र (स्तोत्र) है, जिसमें देवी के आठ श्लोक (श्लोक) हैं। यह अष्टकम देवी की सुंदरता, शक्ति और कृपा का वर्णन करता है…
वेदाङ्गों का स्वरूप एवं महत्त्व ॥

वेदाङ्गों का स्वरूप एवं महत्त्व ॥

॥ वेदाङ्गों का स्वरूप एवं महत्त्व ॥   वेद सनातन ज्ञान के मूल स्रोत हैं, परन्तु उनके सही अध्ययन, संरक्षण और व्यवहार के लिए जिन सहायक शास्त्रों की व्यवस्था की…
ऋतुचर्या :- मौसम अनुसार आहार-विहार , क्या खाएं, क्या न खाएं

ऋतुचर्या :- मौसम अनुसार आहार-विहार , क्या खाएं, क्या न खाएं

    वसन्त ऋतु ( चैत्र-वैशाख )   *खाएं:- पुराने जौ, गेहूं, मूंग, मसूर, चने की दालें, मूली, घीय, गाजर, बथुआ, चौलाई, परवल, सरसों, मेथी, पालक, धनिया, अदरक, शहद, फलों…
अभिमन्यु:- चक्रव्यूह की mystical यात्रा और अपूर्णता की पूर्णता

अभिमन्यु:- चक्रव्यूह की mystical यात्रा और अपूर्णता की पूर्णता

  अभिमन्यु को चक्रव्यूह के सात द्वार खोलने थे। अभिमन्यु के भी सात आयाम हैं जो अभिमन्यु के जीवन को एक mystical यात्रा के रूप में परिभाषित करते हैं —…