आपातकाल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

आपातकाल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

    आपातकाल में सबसे अधिक दबाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर था। संघ पर प्रतिबंध लगा। सभी प्रमुख प्रचारक और दायित्ववान अधिकारी या तो गिरफ्तार हुये अथवा भूमिगत रहकर समाज…
सौ साल बाद: क्यों एक विचार सिकुड़ गया और दूसरा फैलता चला गया?

सौ साल बाद: क्यों एक विचार सिकुड़ गया और दूसरा फैलता चला गया?

  *मनोज जोशी*   *आज* ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक और आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की पुण्यतिथि है। उन्हें सादर नमन करते हुए मन…
कर्नाटक विवाद के बहाने: क्या आरएसएस का पंजीयन अनिवार्य है? कानून क्या कहता है

कर्नाटक विवाद के बहाने: क्या आरएसएस का पंजीयन अनिवार्य है? कानून क्या कहता है

    - *मनोज जोशी*   *कर्नाटक* में हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लेकर एक बार फिर यह सवाल उठाया गया कि संघ किसी कानून के तहत…

स्मृतिभ्रंश का शिकार उदयनिधि

:- जो मिलाता है उसे बाँटने वाला बता रहे हैं।*_ तमिलनाडु असेंबली में कल उदयनिधि स्टालिन ने कहा है कि "सनातन, जिसने लोगों को बाँटा, उसे मिटा देना चाहिये।  …

हिन्दू ईवीएम बनाम मुस्लिम ईवीएम…..

    प्रकाश भटनागर।   पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता शुभेन्दु अधिकारी ने चुनाव नतीजों के बीच एक बड़ी सचाई को बेबाकी से बयान किया। पश्चिम…
इस तरह से ध्यान लगाओ, पूरा शरीर ऊर्जा से भर जाएगा

इस तरह से ध्यान लगाओ, पूरा शरीर ऊर्जा से भर जाएगा

इस तरह से ध्यान लगाओ, पूरा शरीर ऊर्जा से भर जाएगा   बस तीन से पाँच मिनट। बिना किसी खर्च के। बिना किसी विशेष साधन के। सिर्फ अपनी नाक के…
अक्षय तृतीया: बाजार की चमक-दमक के बीच कहीं खो न जाए वास्तविक अर्थ

अक्षय तृतीया: बाजार की चमक-दमक के बीच कहीं खो न जाए वास्तविक अर्थ

-#मनोज_जोशी   आज जब हम अक्षय तृतीया की बात करते हैं, तो अक्सर चर्चा सोना खरीदने और बाजार की चमक-दमक तक सीमित रह जाती है। लेकिन इस दिन का वास्तविक…
धर्मस्थलों के नियम: परंपरा, अनुशासन और मर्यादा का प्रश्न

धर्मस्थलों के नियम: परंपरा, अनुशासन और मर्यादा का प्रश्न

  मनोज_जोशी :-- धर्मस्थलों में प्रवेश को लेकर नियम और व्यवस्थाएँ समय-समय पर चर्चा का विषय बनती रही हैं, लेकिन यदि इन्हें व्यापक दृष्टि से देखा जाए तो स्पष्ट होता…
ऋतुचर्या :- मौसम अनुसार आहार-विहार , क्या खाएं, क्या न खाएं

ऋतुचर्या :- मौसम अनुसार आहार-विहार , क्या खाएं, क्या न खाएं

    वसन्त ऋतु ( चैत्र-वैशाख )   *खाएं:- पुराने जौ, गेहूं, मूंग, मसूर, चने की दालें, मूली, घीय, गाजर, बथुआ, चौलाई, परवल, सरसों, मेथी, पालक, धनिया, अदरक, शहद, फलों…

देश के सर्वोच्‍च सदन में उठती समान शिक्षा की पुकार

  डॉ. मयंक चतुर्वेदी: भारत का संविधान अपने मूल में एक ऐसे समाज की परिकल्पना करता है जहाँ प्रत्येक नागरिक को समान अवसर प्राप्त हों और वह अपने सामर्थ्य के…