जीवन और मृत्यु को अलग मत कीजिए, वो एक ही साँस के दो नाम हैं:

हम अक्सर देखते हैं कि हमारी जिंदगी एक लगातार चलने वाले झगड़े की तरह बन गई है। सुबह से शाम तक, साल दर साल, बस एक संघर्ष चलता रहता है।…
जो खुद को अज्ञानी नहीं मानता, वही सबसे बड़ा अज्ञानी है:

जो खुद को अज्ञानी नहीं मानता, वही सबसे बड़ा अज्ञानी है:

हमने हमेशा सुना है कि साधना करो, ध्यान करो, योग करो, तप करो। और फिर हम करने भी लगते हैं। सुबह उठकर एक घंटा बैठते हैं, मंत्र दोहराते हैं, साँस…