हवन कुंड कितने प्रकार के होते हैं? कारण? वैज्ञानिक व तांत्रिक विश्लेषण

हवन कुंड कितने प्रकार के होते हैं? कारण? वैज्ञानिक व तांत्रिक विश्लेषण लेखिका: Sshivani Durga Occultist and Researcher   हवन कुंड के प्रकार:   हवन कुंड (अग्निकुंड) विभिन्न आकृतियों में…

देवी प्रत्यंगिरा: अथर्वण काली व अघोर लक्ष्मी का तांत्रिक और वैज्ञानिक स्वरूप

देवी प्रत्यंगिरा: अथर्वण काली व अघोर लक्ष्मी का तांत्रिक और वैज्ञानिक स्वरूप   लेखिका: डॉ. शिवानी दुर्गा (Occultist & Researcher)   देवी प्रत्यंगिरा एक रहस्यमयी, उग्र और अपराजिता देवी हैं,…

देवी की पूजा में ज्योति क्यों जगायी जाती है?

    बह् वृचोपनिषद् में कहा गया है *सृष्टि के आदि में एक देवी ही थी, उसने ही ब्रह्माण्ड उत्पन्न किया; उससे ही ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र उत्पन्न हुए ।…

हिंदू धर्म में गणगौर व्रत का विशेष महत्व

गणगौर पूजन आज ****** हिंदू धर्म में गणगौर व्रत को विशेष महत्व दिया जाता है। यह व्रत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है और…

नवरात्र का दूसरा दिवस माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है

_*।। माँ ब्रह्मचारिणी ।।*_   नवरात्र का दूसरा दिवस माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। शक्ति ही जीवन और जगत का आधार है। शक्ति के बिना जीवन अधूरा और निष्प्राण…

दश महाविद्याओं का वैज्ञानिक और तांत्रिक विवेचन

दश महाविद्याओं का वैज्ञानिक और तांत्रिक विवेचन लेखिका: डॉ. शिवानी दुर्गा (Occultist and Researcher)   परिचय: दश महाविद्याएँ, हिन्दू तंत्र परंपरा की दस महाशक्तियाँ हैं, जो आदि शक्ति माँ पार्वती…

शुक्रवार, २८ मार्च २०२5:आज का राशिफल

*मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)* आज का दिन आपके लिए प्रभाव व प्रताप में वृद्धि लेकर आने वाला है। सामाजिक क्षेत्रों में आपकी काफी रुचि…

भारत के प्रसिद्ध –  16 हनुमान मंदिर.

    भारत देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित प्रसिद्ध 16 हनुमान मंदिरों की बारे में जानकारी, इनमें से हर मंदिर की अपनी एक विशेषता है, कोई मंदीर अपनी प्राचीनता…

मनुष्य जीवन का ध्येय विश्व का कल्याण ही होना चाहिए। यही सनातन विचारधारा भी है।

_   जब तक दूसरे सुखी नहीं होंगे हम सुखी नहीं हो सकते। इसलिए सब सुखी हों, सब स्वस्थ हों, सबका कल्याण हो। हमारे धर्म ग्रन्थों में कहां भी गया…

भगवान की सच्ची पूजा ।

  इस संसार में अनेक प्रकार के पुण्य और परमार्थ हैं। दूसरों की सेवा-सहायता करना पुण्य कार्य है, इससे कीर्ति, आत्मसंतोष तथा सद्गति की प्राप्ति होती है। इन सबसे भी…