
चातुर्मास : व्यवहारिक पक्ष
-रमेश रंजन त्रिपाठी : सनातन संस्कृति में मानव भावनाओं एवं जीवन की घटनाओं को देवत्व से जोड़कर पवित्र तथा अलौकिक स्वरूप प्रदान कर दिया जाता है। इससे जनमानस के मन में उत्पन्न होनेवाली श्रद्धा एवं विश्वास उनके जीवन को सार्थकता प्रदान करने में विशेष सहायक होते है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक…