नामांतरण घोटाला: यह सिर्फ अपराध नहीं, पूरी व्यवस्था का एक्स-रे है.

 

 

(अभिषेक मिश्रा)

 

_हर बड़ा घोटाला केवल दोषियों को नहीं, व्यवस्था की कमजोरियों को भी बेनकाब करता है। इंदौर नगर निगम का नामांतरण घोटाला भी अब उसी मोड़ पर खड़ा है। नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के ताज़ा बयान ने इस पूरे प्रकरण को एक नया आयाम दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि ई-नगरपालिका पोर्टल पर ओटीपी जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी, अधिकारियों की लॉगिन आईडी का उपयोग हुआ, इसलिए जांच के दौरान आईटी विशेषज्ञों की आवश्यकता महसूस हुई और अब दो विशेषज्ञों को जांच से जोड़ा गया है। यह स्वीकारोक्ति केवल एक तकनीकी कमी का विवरण नहीं है, बल्कि इस बात का प्रमाण भी है कि जिस व्यवस्था पर लाखों नागरिक अपनी संपत्ति का भरोसा छोड़ते हैं, उसमें गंभीर सुरक्षा खामियां मौजूद थीं। अच्छी बात यह है कि अब उन खामियों को दूर किया जा रहा है। लेकिन इससे भी बड़ी बात यह होगी कि क्या इस घोटाले को नगर निगम एक प्रशासनिक सुधार की शुरुआत बना पाएगा?_

_यहीं से आयुक्त क्षितिज सिंघल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। हर अधिकारी को अपना कार्यकाल बिना विवाद के नहीं मिलता, लेकिन हर अधिकारी को इतिहास लिखने का अवसर भी नहीं मिलता। यह वही अवसर है। यदि जांच केवल कुछ कर्मचारियों तक सिमट गई, तो यह घोटाला एक और फाइल बनकर रह जाएगा। लेकिन यदि जांच उस पूरी श्रृंखला तक पहुंची जिसने नियमों को तोड़ा, सुरक्षा को कमजोर छोड़ा, सरकारी आईडी का दुरुपयोग होने दिया और नागरिकों की संपत्तियों को असुरक्षित बनाया, तो यह मामला नगर निगम में जवाबदेही की नई परंपरा स्थापित कर सकता है। आयुक्त ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि कोई भी बिंदु नहीं छोड़ा जाएगा और जिसने भी गड़बड़ी की है, उसके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज होगा। यही इस पूरे प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण वाक्य है। अब शहर की निगाह इस पर नहीं कि बयान कितना प्रभावशाली था, बल्कि इस पर है कि कार्रवाई कितनी निष्पक्ष और कितनी गहरी होती है। क्योंकि इतिहास घोटलों को नहीं, उनसे निकले सुधारों को याद रखता है। यदि इस घोटाले के बाद नगर निगम ऐसा सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह तंत्र खड़ा कर देता है कि भविष्य में किसी नागरिक को अपनी ही संपत्ति का मालिक साबित न करना पड़े, तो यह संकट एक मिसाल बन जाएगा। और यदि ऐसा नहीं हुआ, तो यह घोटाला केवल कुछ नामांतरणों का नहीं, बल्कि व्यवस्था पर जनता के भरोसे के टूटने का प्रतीक बनकर रह जाएगा।_