पूर्व जन्म के ऋण अनुबंध और वर्तमान जीवन का रहस्य

 

 

भृगु संहिता मनुष्य के वर्तमान जन्म के ऊपर पिछले जन्म अथवा जन्मों के प्रभाव का दस्तावेज है जो ‘महर्षि भृगु’ और उनके पुत्र ‘शुक्र’ के संवाद के रूप में आगे बढ़ता है।’भृगु’ और ‘शुक्र’ के संवाद से मुझे जो समझ में आया उसके अनुसार हमारा वर्तमान जीवन हमारे पूर्व जन्म के कर्मों का प्रतिफल है और किसी के साथ हमारा संबंध ऋण अनुबंध के नतीजे में है। जिसके साथ ये अनुबंध ज्यादा है वो आपके माता, पिता, भाई, बहन अथवा पति या पत्नी के रूप आते हैं, मित्र के रूप में आते हैं और जिनके साथ ये अनुबंध कम है वो जीवन में आते- जाते रहते हैं।इस जीवन में जिन लोगों के कारण आपको यश मिलता है और जिन लोगों के कारण अपयश मिलता है; वो सब आपके जन्म-जन्मांतर के साथी होते हैं। इस जन्म में जिसके साथ जिसका जैसा भी संबंध है वो किसी न किसी पूर्व जन्म के ऋण अनुबंध के कारण ही है। कृष्ण और भीष्म दोनों शिखंडी के रूप में पूर्व जन्म की अंबा का रहस्य जानते थे; हम नहीं जानते इसलिए परेशान होते रहते हैं। भृगु जी कहते हैं कि आपके पिछले जन्मों में शुभ कर्म जितने अधिक होंगे उसी परिमाण में इस जन्म में आपको शुभ आत्माओं का साथ मिलता चला जायेगा और पिछले जन्मों में अशुभ कर्म जितने होंगे, उतने ही बुरी आत्माएं आपके सानिध्य में आएंगे और पीड़ा देंगें।जब पूर्व जन्मों के शुभ कर्म उदित होगें तो मान, यश, गौरव सब मिलेगा और जब पूर्व जन्मों के पाप कर्म उदित होगें तो यही मान अपमान में, यही यश अपयश में और यही गौरव ग्लानि में बदलने लगता है।