माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविवद्यालय में ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ का आयोजन,

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविवद्यालय में ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ का आयोजन,

 

स्वदेशी का पालन करके देश के विकास में दें योगदान : श्री दुबोलिया

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविवद्यालय में ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ का आयोजन, स्वामी विवेकानंद के विचारों और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के साथ दौड़े युवा

भोपाल। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की पहल और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देशों के अनुपालन में, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में 21 जनवरी, 2026 को ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ का आयोजन किया गया। स्वामी विवेकानंद जयंती (राष्ट्रीय युवा दिवस) के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र-निर्माण और स्वदेशी मूल्यों से जोड़ना है। इस अवसर पर मुख्य वक्ता स्वदेशी जागरण मंच के मध्यक्षेत्र के संगठक  केशव दुबोलिया ने कहा कि स्वामी विवेकानंद कहते थे, अपने देश के लोगों को जगाओ, उनकी देशभक्ति को जगाओ और उन्हें संगठित करो। देश के विकास में हमारा क्या योगदान हो, यह हमें विचार करना चाहिए। स्वदेशी का पालन करके हम देश के विकास में बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं।

दुबोलिया ने कहा कि स्वदेशी का आंदोलन पूरे देश में चल रहा है। कहना होगा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ वॉर के बाद से दुनिया में स्वदेशी का आग्रह तेजी से बढ़ा है। आने वाले वर्षों में हमें अपने देश को आत्मनिर्भर बनाना है और आगे लेकर जाना है तो स्वदेशी को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वदेशी को अपने व्यवहार में लाने के लिए हम छोटे-छोटे प्रयोग कर सकते हैं। भाषा, भूषा, भ्रमण, भोजन, भजन और भवन, ये स्वदेशी होने चाहिए। इसी के साथ उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद कहते थे, भारत का विश्वगुरु बनना, भारत की नियति है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलगुरु  विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने जीवन में एक बार बेलूर मठ, दक्षिणेश्वरी और कन्याकुमारी में स्वामी विवेकानंद से जुड़े स्थलों को दर्शन अवश्य करना चाहिए। स्वामी रामकृष्ण परमहंस पर केंद्रित पुस्तक ‘कल्पतरु की उत्सव लीला’, छत्रपति शिवाजी महाराज पर केंद्रित बाबा साहेब पुरंदरे की पुस्तक ‘राजा शिवछत्रपति’ और स्वामी विवेकानंद पर केंद्रित दस खंडों का साहित्य भी हमें अवश्य पढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का शिकागो व्याख्यान एक प्रकार से दुनिया के सामने ‘भारत का बायोडाटा’ है। स्वामी विवेकानंद ने भारत के ऋषियों के धर्म को दुनिया के सामने रखने का महान कार्य किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हमें विचारपूर्वक उत्पाद खरीदने चाहिए। अपने परिश्रम की कमाई को खर्च करते समय सोचें और उत्पाद खरीदते समय स्वदेशी को प्राथमिकता दें। हमारे पसीने की कमाई भारत को मजबूत करने में लगनी चाहिए।

विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ के लिए सभी विभागों के विद्यार्थी स्वामी विवेकानंद के 45 फीट ऊंचे विशाल चित्र के समक्ष एकत्र हुए। वहाँ से दादा माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा तक पहुँचे और दौड़ प्रारंभ की। इस दौरान एनएसीसी एवं एनएसएस से जुड़े विद्यार्थी भी शामिल रहे। शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने भी स्वदेशी संकल्प दौड़ में हिस्सा लिया। ‘रन फॉर स्वदेशी’ (स्वदेशी संकल्प दौड़) केवल एक शारीरिक गतिविधि नहीं, बल्कि युवाओं के लिए एक प्रेरक अभियान है। इस आयोजन के मुख्य उद्देश्य युवाओं को भारतीय उत्पादों को अपनाने और स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित करना। कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. लोकेन्द्र सिंह राजपूत ने किया। कार्यक्रम का आयोजन मे प्रजातंत्र गङ्गेले, महेंद्र चौहान, वैभव पांडे आदि स्वदेशी कार्यकर्त्ता और एनसीसी के एएनओ डॉ. मुकेश चौरासे, एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. गजेन्द्र सिंह अवास्या और खेल समन्वयक डॉ. सूर्यप्रकाश के संयोजन में किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने स्वदेशी को अपनाने का संकल्प भी लिया।