
राष्ट्रीय युवा दिवस
–रमेश शर्मा:
स्वामी विवेकानंद की जयंति 12 जनवरी को भारत में “राष्ट्रीय युवा दिवस” के रुप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य युवाओं को सक्षम, संकल्पवान और सकारात्मक चिंतन की दिशा में आगे बढ़ने केलिये सक्षम बनाना है। प्रत्येक वर्ष इस दिवस की प्रतिवर्ष थीम अलग होती है। उसके अनुसार पूरे वर्ष युवा गतिविधियाँ संचालित होतीं हैं।इस वर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस की थीम “उठो, जागो और अपनी शक्ति को पहचानो” है। इसका उद्देश्य देश के विकास में युवाओं की सक्रिय भूमिका की ओर प्रेरित करना है। स्वामी विवेकानंद के आव्हान के अनुरूप युवाओं को सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने केलिये भारत सरकार के साथ मध्यप्रदेश सरकार भी विशेष प्रयास कर रही हैं। विशेषकर उद्यमिता विकास और खेल योजनाओं में मध्यप्रदेश की गणना अब देश के अग्रणी प्राँतों में होने लगी है।
युवाओं की जाग्रति और उनके महत्व को स्थापित करने केलिये संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 1984 में ‘अन्तरराष्ट्रीय युवा वर्ष’ घोषित किया गया था। संयुक्त राष्ट्र ने पूरे विश्व में दो प्रकार की समस्याएँ अनुभव कीं थीं। कुछ देशों में युवाओं की जनसंख्या घट रही थी तो कुछ देशों के युवाओं में भटकाव और व्यसनों की प्रवृत्तियाँ बढ़ रहीं थीं। इसी को ध्यान में रखकर संयुक्त राष्ट्रसंघ ने युवाओं पर फोकस किया था। इसी बात को ध्यान में रखकर इसी वर्ष भारत सरकार ने प्रतिवर्ष 12 जनवरी को “राष्ट्रीय युवा दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की। इस घोषणा के अनुसार पहली बार वर्ष 1985 में 12 जनवरी को “राष्ट्रीय युवा दिवस” मनाया गया। इस आयोजन की प्रतिवर्ष एक अलग थीम होती है। इस वर्ष यह युवा दिवस “उठो, जागो और अपनी शक्ति को पहचानो”थीम के आधार पर मनाया जा रहा है। जबकि 2025 की थीम “राष्ट्र निर्माण के लिए युवा सशक्तिकरण” थी। इस वर्ष की थीम का यह वाक्य स्वामी विवेकानंद के आव्हान से ही लिया गया है। इसका उद्देश्य युवाओं के सामने वर्तमान समय की चुनौतियों को समझकर आगे बढ़ने की है। युवाओं में जाग्रति और आव्हान केलिये स्वामी विवेकानंद की ख्याति पूरे संसार में है। उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता यही थी कि उन्होंने युवा अवस्था में ही शिकागो सम्मेलन में न केवल संसार के सभी धर्मगुरुओं को प्रभावित किया था अपितु संसार के अनेक देशों में भारत की बौद्धिक और साँस्कृतिक महत्ता को प्रतिष्ठित किया था। स्वामी विवेकानंद का मानना था कि भारत की प्रतिष्ठा और प्रतिभा दासत्व के अंधकार में डूबी हुई है। यदि युवा संकल्प लेकर आगे बढ़ें, अपनी प्रतिभा को पहचाने तो भारत स्वत्व और स्वाभिमान से प्रकाशमान हो सकता है। स्वामी विवेकानंद द्वारा युवा जाग्रति केलिये किया गया यह आव्हान केवल भारत को दासता से मुक्ति का मंत्र ही नहीं था बल्कि युवाओं की शक्ति और क्षमता से भारत राष्ट्र को विश्व में पुनर्प्रतिठित करना था। स्वामी विवेकानंद के शब्द कालजयी हैं। वे हर कालखंड में युवाओं को जाग्रति और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। इसीलिये भारत सरकार ने उनके जन्म दिवस 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। ताकि युवा पीढ़ी स्वामी विवेकानंद के जाग्रति आव्हान के मर्म को समझकर आगे बढ़े।
स्वामी विवेकानंद का युवाओं को आव्हान
स्वामी विवेकानंद ने युवाओं में आत्मविश्वास, निडरता, शारीरिक और मानसिक शक्ति, सेवाभाव तथा राष्ट्रभक्ति जाग्रत करने का संदेश दिया था। उनके आव्हान में युवाओं केलिये दो संदेश प्रमुख थे। एक बिना किसी संकोच के आगे बढ़ना और दूसरा भारत को स्वाभिमान संपन्न राष्ट्र निर्माण केलिये जुटना। उन्होंने युवाओं से किसी भी भय से मुक्त होकर आगे बढ़ने का आव्हान किया था और कहा था कि “उठो, जागो, आगे बढ़ो, तुम अमृत पुत्र हो, लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत”। वस्तुतः कयी बार युवा अपने अवचेतन में किसी अज्ञात भय के कारण आगे बढ़ने में संकोच कर जाते हैं। भय का अंतिम विन्दु मृत्यु का भय होता है। उन्होंने इससे मुक्ति केलिये ही कहा था कि “तुम अमृत पुत्र हो”। उन्होंने युवाओं से शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आंतरिक शक्ति के समन्वय से काम करने का आव्हान भी किया था और कहा था कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन’ हो सकता है। यदि स्वस्थ्य शरीर और स्वस्थ्य मन है तो व्यक्तित्व भी स्वस्थ्य होगा। उन्होंने युवाओं बाहरी किसी भी आकर्षण से सावधान रहकर ”अपने भीतर की शक्ति” पर विश्वास करने की प्रेरणा दी। अधिकांश युवा बाहरी आकर्षण में उलझकर अपने ध्येय यात्रा से विचलित हो जाते हैं। अपने इस आव्हान में उन्होंने युवाओं से इस भटकाव से दूर रहकर केवल लक्ष्य की ओर ही दृष्टि रखने की अपील की थी। इसके लिये संकल्पवान होना आवश्यक है। आत्म-विश्वास और शक्ति बढ़ाने केलिये अपने सोच को संकल्पशीलता के लिये स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि “आप जो सोचेंगे, वही बनोगे”। उन्होंने भय को दुखों का कारण बताया, और युवाओं से निर्भय बनने का आग्रह किया। उन्होंने शारीरिक शक्ति केलिये फुटवाल खेलने और मानसिक शक्ति केलिये गीता पढ़ने का आव्हान किया था। वस्तुतः फुटवाल एक ऐसा खेल है जिसमें शरीर की प्रत्येक कोशिका सक्रिय रहती है। पैर से लेकर आँख तक सक्रिय और जागरुक रहती है वह भी प्रतिपक्ष के खिलाड़ी की गतिविधि पर दृष्टि रखकर बचाव करते हुये। शरीर के संपूर्ण विकास केलिये शरीर की सभी कोशिकाओं का सक्रिय रहना आवश्यक है। इसीलिए स्वामी विवेकानंद ने युवाओं से फुटवाल खेलने का आव्हान किया था। वहीं मानसिक बौद्धिक और आत्मिक सशक्तिकरण केलिये गीता पढ़ने पर जोर दिया था। महाभारत युद्ध के दौरान गीता सुनकर ही अर्जुन सभी प्रकार की शंका कुशंका और संकोच से मुक्त होकर युद्ध में एकाग्र हुआ था। स्वामी विवेकानंद चाहते थे कि उसी प्रकार भारत का प्रत्येक युवा एकाग्र होकर अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़े तभी भारत पुनः यशस्वी राष्ट्र बन सकता है।
युवाओं के सर्वांगीण विकास केलिये केन्द्र और मध्यप्रदेश सरकार के प्रयास
युवाओं की असीम क्षमता से भारत राष्ट्र को उन्नत बनाने केलिये भारत सरकार और देश की सभी राज्य सरकारों ने अपनी अपनी विशेष योजनाएँ बनाईं है। लेकिन जिस प्रकार युवा प्रोत्साहन केलिये भारत सरकार की योजनाएँ विश्व के अन्य देशों से बहुत अलग हैं उसी प्रकार मध्यप्रदेश सरकार की योजनाएं और उनका क्रियान्वयन भारत के अन्य प्रांतों में अग्रणी रहीं हैं।
वर्ष 2025 केलिये “राष्ट्र निर्माण केलिये युवा शक्तिकरण” थीम घोषात हुई थी। इसका उद्देश्य देश के विकास में युवाओं को उनकी क्षमताओं के अनुरूप विकास के अवसर देना था। ताकि वे अपने संकल्प और क्षमता से अपने सकारात्मक विकास में जुट सकें। इसके लिये
युवाओं के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहन, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी का आभास कराना, खेल, शिक्षा, कौशल विकास के नये आयाम तथा स्वास्थ्य रहने के प्रति जागरुकता जैसे अभियान वर्ष भर चले।
प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी की नीतियों के अनुरूप मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2025 के पूरे वर्ष ‘‘युवा शक्ति मिशन’’ के रूप में चलाया। इस मिशन का उद्देश्य़ मध्यप्रदेश के विकास में युवाओं की व्यापक क्षमताओं का उपयोग करना था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि सशक्त युवा शक्ति से ही देश और प्रदेश के विकास का वह स्वर्णिम स्वरूप सामने आयेगा जिसकी संकल्पना प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 केलिये की है।
मध्यप्रदेश सरकार के इस युवा शक्ति मिशन के अंतर्गत ‘युवाओं’ में शिक्षा, कौशल विकास, खेल, साँस्कृतिक समागम और सामुदायिक सेवा जैसी विधाओं में कयी नवाचार किये। युवा जनसंख्या की दृष्टि से जिस प्रकार भारत पूरे संसार में विशिष्ट है उसी प्रकार मध्यप्रदेश की गणना देश के उन प्राँतों में होती है जहाँ युवा जनसंख्या सर्वाधिक है। युवा शक्ति के विकास और प्रदेश के विकास को गति देने केलिये मध्यप्रदेश सरकार और के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कयी नवाचार किये। रोजगार और स्वरोजगार की योजनाओं को गति देने के साथ खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में युवाओं की सहभागिता के लिये कयी नवाचार भी किये। प्रदेश के युवाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए 7 लाख युवाओं को 5 हजार करोड़ के दिए ऋण दिये गये। सरकारी भर्ती केलिये कैलेण्डर जारी किया जिससे एक लाख युवाओं को शासकीय नौकरी में आने का द्वार तो खुल गया है। इसके साथ मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरी केलिये ढाई लाख का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। वहीं निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने केलिये औद्योगिक निवेश में भी नये प्रयोग किये गये। अपने ‘युवा शक्ति मिशन’ के माध्यम से मध्यप्रदेश सरकार ने युवाओः को अपना स्वयं का उद्योग और व्यावसाय संस्थान स्थापित करने में नीति नियम सरल किये। प्रशिक्षण की विधाओं में वृद्धि की। स्वरोजगार केलिये अनुदान राशि बढ़ाई तथा ऋण की ब्याज दर में भी कमी की। साथ ही युवाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए तकनीकि आधार पर कौशल प्रशिक्षण एवं तकनीकि मार्गदर्शन भी दिया गया ताकि युवा स्वरोजगार द्वारा आत्मनिर्भर बने की दिशा में आगे बढ़ें।
स्वामी विवेकानंद ने युवाओं के समग्र विकास केलिये खेल पर बहुत जोर दिया था। ऐसे खेलों पर जो शरीर के समस्त अंगों में समन्वय बनाकर सक्रिय कर ते हैं। शरीर के स्वास्थ्य केलिये सभी अंगों का सक्रिय और सचेत रहना आवश्यक है। स्वामी विवेकानंद के इस सिद्धांत पर काम करते हुये मध्यप्रदेश सरकार ने इस दिशा में अतिरिक्त प्रयास किये और अपनी खेल नीति में कयी प्रकार के नवाचार भी किये। इससे मध्य प्रदेश की खेल और युवा कल्याण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर रैंकिंग में सुधार हुआ। पहले खेल और युवा कल्याण के कार्यों में मध्यप्रदेश की रेकिंग में पहले 16वें स्थान पर थी। लेकिन डाॅ मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे नवाचारों से मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान पर आ गया है। मध्यप्रदेश की पहचान विश्व स्तरीय शूटिंग, घुड़सवारी जैसे विश्व स्तरीय अकादमियाँ स्थापित करने के लिये भी देश भर में बनी है। युवा खेल विधा में मध्यप्रदेश के कार्यों की प्रशंसा भारत सरकार ने भी की है। मध्यप्रदेश अब खेल और युवा कल्याण में अग्रणी बन रहा है। युवा कल्याण की जिन योजनाओं से मध्यप्रदेश की पहचान देश में विशिष्ट बनी उनमें पार्थ योजना, युवा शक्ति मिशन और कौशल विकास योजनाएँ हैं।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रतिवर्ष बारह जनवरी को मनाया जाने वाले युवा उत्सव में विविधता होती है। इसमें एक ओर यदि साँस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति होती है तो दूसरी ओर युवाओं में भविष्य दर्शन की क्षमता विकसित करने और आने वाली चुनौतियों का आभास कराने के कार्यक्रम भी होते हैं। मध्यप्रदेश में यह युवा आयोजन त्रिस्तरीय होते हैं। स्थानीय स्तर पर विभिन्न जिलों में, राज्य स्तर पर और राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली में आयोजित समागम में भी मध्यप्रदेश की टोलियाँ भाग लेने दिल्ली जातीं हैं।
युवाओं के विकास और कल्याण केलिये भारत एवं मध्यप्रदेश सरकार ने बहुआयामी कदम उठाये हैं। उनका परिणाम भी आने लगा है। उद्यमिता विकास से लेकर साँस्कृतिक समागम तक यह विविधता स्वामी विवेकानंद के चिंतन के अनुरूप है। जिस दिशा में सरकारें प्रयास कर रहीं हैं और युवाओं में चेतना जाग्रत हो रही है यह उसी का परिणाम है कि भारत आज विश्व शक्ति बनने की ओर अग्रसर हो रहा है। लेकिन इसमें स्वयं युवाओं को भी सावधान रहना होगा। भारत की प्रगति देखकर विश्व की अनेक शक्तियाँ भारतीय युवाओं को भटकाने का के कुचक्र कर सकतीं हैं। इस दिशा में स्वामी विवेकानंद ने भी युवाओं को सचेत किया था और सीधे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का आव्हान किया था। अपने लक्ष्य के प्रति एकनिष्ठ होने केलिये स्वामी विवेकानंद जी का संदेश महत्वपूर्ण है। यदि भारतीय युवा संकल्प वान होकर केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाते हुये अपने लक्ष्य की यात्रा पर आगे बढ़ेगें तो भारत को विश्व शक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता।
