चार उपलब्धियों के चार प्रकार ।

 

 

आरोग्य, धन, ज्ञान और मोक्ष इन चार चीजों को पाने के लिए चार प्रकार के प्रयत्न करने पड़ते हैं। इनको देने वाले देवता अलग अलग हैं। आरोग्य अर्थात् बीमारी रहित जीवन की आकांक्षा से भगवान सूर्य की आराधना करनी चाहिए। ( सूर्य भगवान की बचपन से आराधना हो तो बीमारी ही न हो। सूर्य अस्सी प्रकार के ज्वर, कुष्ठ, हृदय, कष्ट, रक्तचाप, नेत्र कष्ट तथा पागलपन से बचाते हैं। वे प्रसन्न होने पर अक्षय स्वास्थ्य वितरित करते हैं। )

 

धन की प्रचुरता के लिए अग्नि देवता की आराधना करनी चाहिए। ज्ञान प्राप्ति के लिए भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए।शिवजी की आराधना से लौकिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की विद्या मिलती है।

मोक्ष प्राप्ति के लिए भगवान नारायण की आराधना करनी चाहिए। इस संदर्भ में मत्स्य- पुराण में महत्वपूर्ण निर्देश मिलता है—-

*आरोग्यं भास्करादिच्छेत् धनमिच्छेद् हुताशनात्।*

*ईश्वरात् ज्ञानमिच्छेच्च मोक्षमिच्छेत् जनार्दनात्।।*

( ६७/७१ )

शरीर धारण करने के लिए आत्माओं का निर्गमन विष्णु से ही होता है। अतः मोक्ष भी विष्णु की आराधना से मिलता है।

 

सूर्य देवता की नित्य आराधना से व्यक्ति कभी भी किसी बड़ी बीमारी का शिकार नहीं होता है। भगवान सूर्य धन और यश भी देते हैं–

*शरीरारोग्य-कृच्चैव धनवृद्धि-यशस्कर:।*

*जायते नात्र संदेहो यस्य तुष्येत् दिवाकरः।।*

( पद्म१-८०-५८ )

 

लोग भूल गए अग्नि देवता की आराधना। इसीलिए पवित्र कर्म वालों को दरिद्रता घेरे रहती है। यदि आप पवित्र ढंग से जीते हुए धनी भी रहना चाहते हैं तो प्रतिदिन अग्नि की पूजा कीजिये। सहदेव को अग्नि देवता की सिद्धि थी। सहदेव कृत अग्नि स्तवन महाभारत में दिया हुआ है।

 

राष्ट्र रक्षा के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ संकल्प पूर्वक करने से अपना देश विजयी होता है। इसका न्यूनतम पाठ बारह सौ होता है। भगवती बगलामुखी की आराधना से भी राष्ट्र शत्रुओं का विनाश होता है।

 

 

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