मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने सात मामलों में संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा

 

*भोपाल, मंगलवार 20 दिसम्बर 2022*

*सात मामलों में संज्ञान*

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय कार्यवाहक अध्यक्ष श्री मनोहर ममतानी एवं माननीय सदस्य  राजीव कुमार टंडन ने *सात मामलों में संज्ञान* लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।

मप्र मानव अधिकार आयोग ने *भोपाल शहर में* बिना सरकारी फीस जमा किये तीस मदिरा अहाते अवैध रूप से संचालित किये जाने के बावजूद आबकारी अमले द्वारा कोई कार्यवाही नहीं करने संबंधी एक मीडिया रिपोर्ट पर संज्ञान लिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आबकारी विभाग के अफसर स्वयं मानते हैं कि यह अहाते अवैध रूप से संचालित किये जा रहे हैं पर कार्यवाही को लेकर वे कुछ नहीं कहते। विभागीय अमले की मेहरबानी से ये अहाते बिना फीस जमा किये करोडों रूपये कमा रहे हैं और सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं। मामले में आयोग ने *पुलिस कमिश्नर, भोपाल, कलेक्टर भोपाल एवं सहायक आबकारी आयुक्त, भोपाल से प्रकरण की जांच कराकर की गई कार्यवाही का तीन सप्ताह में प्रतिवेदन तलब किया है।*

मप्र मानव अधिकार आयोग ने *भोपाल शहर के* एक अस्पताल की बेहद कमजोर छत पर बिना मंजूरी के पानी की टंकियां रख देने से हादसे की आशंका होने के मामले में संज्ञान लिया है। दरअसल, भोपाल शहर में सदर मंजिल के पास 50 साल से ज्यादा पुरानी लेडी भोर डिस्पेंसरी नवाबी दौर के भवन में संचालित हो रही है। हाल ही में इसका मेंटेनेंस तो करवाया गया है, लेकिन छत बेहद कमजोर है। सरकारी भवन में किसी भी तरह का काम बिना मंजूरी के नहीं किया जा सकता, लेकिन अस्पताल के ही कर्मचारी ने कमजोर छत पर दो पानी की टंकियां रखवा दी हैं। यही नहीं कुछ जगह निर्माण कार्य भी किया जा रहा है। इससे हादसा हो सकता है। लोक निर्माण विभाग के एई का कहना है कि भवन पुराना है। इसमें बिना इजाजत के कोई भी कार्य करने की मनाही है। अगर ऐसा हो रहा है तो तत्काल निरीक्षण करवाया जाएगा। मामले में आयोग ने *कार्यपालन यंत्री, लोक निर्माण विभाग, भोपाल से प्रकरण की जांच कराकर 15 दिन में प्रतिवेदन तलब किया है।*

मप्र मानव अधिकार आयोग ने *भोपाल शहर के चूनाभट्टी में* एक नाला खुला होने और नगर निगम में शिकायत करने बावजूद भी कार्यवाही न करने के मामले में संज्ञान लिया है। भोपाल शहर के चूनाभट्टी इलाके में खुला नाला दिनों दिन खतरनाक होता जा रहा है। सड़क की तरफ से धसक चुके इस नाले मे किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। एक स्थानीय रहवासी ने बताया कि नगर निगम के जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। काॅलोनी के अन्य रहवासियों के बार-बार शिकायतें करने के बावजूद इस नाले को दुरूस्त नहीं किया जा रहा है। मामले में आयोग ने *नगर निगम कमिश्नर, भोपाल से प्रकरण की जांच कराकर की गई कार्यवाही का 15 दिन में प्रतिवेदन तलब किया है।*

मप्र मानव अधिकार आयोग ने *खंडवा जिले में* एक नाबालिग आदिवासी बालिका को घर से अगवा कर चार बदमाशों द्वारा जहर पिलाने और अंततः पीडिता की जहर के असर से मौत हो जाने के मामले में संज्ञान लिया है। खंडवा जिले में रातभर से गायब एक 16 वर्षीया आदिवासी बालिका कपास के खेत में बेहाशी की हालत में मिली थी। पीड़िता ने चार नकाबपोश लड़कों द्वारा उसे उठा ले जाने फिर जहर पिलाने की बात कही थी। जहर के असर से पीडिता की मौत हो चुकी है। अब पुलिस मामले की तेजी से जांच कर रही है। पीडिता के पिता ने बताया कि उन्हें लापता बेटी उनके घर के पास ही एक खेत में बेहोश पड़ी मिली थी। पीड़िता के पास उल्टी पड़ी थी और उसकी सांसें भी कम चल रही थी। परिजन उसे जावर के अस्पताल लेकर पहुंचे। डाक्टरों ने चैकअप करके अंदेशा जताया कि बालिका के साथ दुष्कर्म हुआ है। डाक्टर्स ने पीड़िता को जिला अस्पताल खंडवा रैफर कर दिया जहां पीड़िता की मौत हो गई। मामले में आयोग ने *पुलिस अधीक्षक, खंडवा से प्रकरण की जांच कराकर की गई कार्यवाही का तीन सप्ताह में प्रतिवेदन तलब किया है।*

मप्र मानव अधिकार आयोग ने *ग्वालियर शहर के एक थाने से*

रिवाॅल्वर के गायब होने के बाद पुलिस द्वारा उसके मालिक से ही रिवाॅल्वर गुम हो जाने की अर्जी मांगने के मामले में संज्ञान लिया है। घटनाक्रम के अनुसार नगर निगम चुनाव के चलते ग्वालियर शहर के एक कारोबारी द्वारा थाने में जमा कराई गई रिवाॅल्वर थाने से ही गुम हो गई। इस बात का खुलासा तब हुआ, जब रिवाॅल्वर का मालिक अपनी रिवाॅल्वर लेने थाने पहुंचा तो पुलिसवालों ने हथियार अधिक होने का बहाना कर ढ़ूंढकर देने का बहाना बनाया। दो महीने बाद पुलिस ने रिवाॅल्वर न मिलने की कहानी गढ़ दी। अब संबंधित थाटीपुर थाना पुलिस रिवाॅल्वर के मालिक से ही रिवाॅल्वर कहीं गुम हो जाने का आवेदन मांग रही है। पुलिस की इस घोर लापरवाही वाली हरकत से तंग आकर कारोबारी ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत कर दी है। मामले में आयोग ने *पुलिस अधीक्षक, ग्वालियर से जवाब-तलब किया है।*

मप्र मानव अधिकार आयोग ने *जबलपुर स्थित शासकीय मेडिकल यूनिवर्सिटी में* परीक्षाएं समय पर नहीं कराने से भड़के विद्यार्थियों द्वारा हंगामा कर तोड़फोड़ करने के मामले में संज्ञान लिया है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि मेडिकल यूनिवर्सिटी ने पिछले सत्र की परीक्षाओं से लेकर सप्लीमेंट्री एग्जाम के रिजल्ट अब तक घोषित नहीं किए हैं। एमबीबीएस, पैरामेडिकल, आयुष, बीएएमएस और बीएचएमएस से जुड़े छात्रों ने मांगों को लेकर यूनिवर्सिटी के कुलपति से चर्चा की और जल्द से जल्द मांगों का निराकरण करने का आग्रह किया। मामले में आयोग ने *कुलपति, मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर एवं कलेक्टर, जबलपुर से जवाब-तलब किया है।*

मप्र मानव अधिकार आयोग ने *सिंगरौली जिले के चितरंगी ब्लाॅक के उप स्वास्थ्य केन्द्र करौदिया के* गेट पर ही एक प्रसूता का प्रसव हो जाने के मामले में संज्ञान लिया है। दसअसल, उप स्वास्थ्य केन्द्र करौदिया में बीते सोमवार को प्रसव के लिए लाई गई गर्भवती घंटों अस्पताल के बाहर तड़पती रही। संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल के चलते स्वास्थ्य केन्द्र में ताला लगा था। ऐसे में साथ आई महिलाओं ने स्वास्थ्य केन्द्र के गेट पर ही प्रसूता का प्रसव कराया। मामले में आयोग ने *कलेक्टर तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिंगरौली से जवाब-तलब किया है।*

*हवालात में मृत बंदी के वारिसों को पांच लाख रूपये दो माह में दे दें*

*आयोग ने की अनुशंसा*

मप्र मानव अधिकार आयोग ने पुलिस अभिरक्षा में हवालाती बंदी द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या कर लेने के मामले में मृत बंदी के वैध वारिसों को पांच लाख रूपये क्षतिपूर्ति देने की अनुशंसा राज्य शासन को की है। *मामला मुरैना जिले का है।* पुलिस अभिरक्षा में लिये गये हवालाती बंदी रघुराज सिंह तोमर द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली गई थी। आयोग ने पुलिस अधीक्षक, मुरैना द्वारा बंदी के आत्महत्या कर लेने की सूचना के आधार पर मामला पंजीबद्ध कर जांच में लिया था। आयोग के *प्रकरण क्रमांक 0748/मुरैना/2019 दर्जकर* मामले की निरंतर सुनवाई की।

अंततः राज्य शासन को अनुशंसा की है कि मृत बंदी के वैध उत्तराधिकारियों को पांच लाख रूपये क्षतिपूर्ति राशि दो माह में दे दी जाये, क्योंकि पुलिसकर्मियों की लापरवाही के कारण ही हवालाती बंदी के मौलिक/मानव अधिकारों का घोर उल्लंघन हुआ। आयोग ने कहा है कि राज्य शासन चाहे, तो यह राशि दोषी पुलिस अधिकारियो/कर्मियों से वसूल कर सकती है। साथ ही यह भी कहा है कि राज्य शासन, प्रदेश के सभी पुलिस थाना परिसरों में लगाये गये सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की रिकाॅर्डिंग थाना परिसर में हुई किसी घटना के संबंध में सुरक्षित रखी जाये। पुलिस मुख्यालय द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये जायें। जिससे थाना परिसर में हुई किसी घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सदैव सुरक्षित रूप से उपलब्ध रहे। क्योंकि थाना परिसर में हुई किसी भी घटना के संबंध में इलेक्ट्राॅनिक साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।

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