मप्र से दिल्ली तक घोड़ो की खरीद फरोख्त

 

 

 

मप्र से दिल्ली तक घोड़ो को खरीद फरोख्त, एक बात तो साफ हो गयी कि कांग्रेस के जहाज में छेद बहुत, गुटबाजी भी जमकर हावी है। नही तो भाजपा मप्र सरकार की दीवार में सेंध नही लगा पाती।
मप्र में कांग्रेस की सरकार बने सवा साल ही गुजरा है। लेकिन इस सवा साल के कार्यकाल में इस सरकार को गिराने के लिए 1 साल से जोड़तोड़ जारी है। हालांकि इसके पूर्व भी यह धुंआ कई बार उठा कभी नेताप्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने उसे दबा दिया तो। कभी तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने। इसके पूर्व भी मप्र नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव इंदौर में ही कांग्रेस सरकार गिरने और भाजपा सरकार बनने की बाते कह चुके है। उन्होंने सरकार गिरने का आधार भाजपा द्वारा पंडितो से ली गयी राय पंडितो की ही भविष्यवाणी को बताया था। लेकिन भाजपा के वो प्रकांड पण्डित आखिरकार कौन है अब यह जगजाहिर हो गया की आखिरकार कौन घोड़ो की खरीदी प्रक्रिया को लीड कर रहा है। इधर इस हॉर्स ट्रेडिंग के बीच एक बात तो पूरी तरह साफ हो गयी कि कांग्रेस पार्टी की गुटबाजी, और आपस मे असन्तोष रहना भाजपा का मुख्य हथियार हो गया है। जिसकी वजह से भाजपा के यह कद्दावर नेता कांग्रेस की दीवार में सेंध लगा पाए। और अब खुलासा होने पर वह खुद कांग्रेस पर ही इसका ठीकरा फोड़ रहे है कि अलग अलग गुट में बंटी कांग्रेस के ही अंदरूनी हालात काफी जर्जर है। लिहाजा घोड़ो की खरीद फरोख्त की यह कहानी लिखी गयी। बहरहाल कांग्रेस सरकार और कांग्रेस पार्टी की युगों युगों से एक ही समस्या रही है। वह है आपसी गुटबाजी, एकदूसरे के प्रति मनमुटाव। हॉर्स ट्रेडिंग के इस खुलासे के दौरान भी यह मुख्य रूप से देखा जा रहा है कि सिंधिया गुट और उनके मंत्री विधायको ने इससे दूरिया बना ली है। वही राज्यसभा की जमावट कर रहे दिग्गी गुट ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार की और से कमान संभाल रखी है। बहरहाल कांग्रेस सरकार को कुछ होने जाने वाला नही है। यह तो अटल सत्य है। लेकिन एक बार फिर कांग्रेस की गुटबाजी एक बार फिर कांग्रेस को ले डूबने में कारगर साबित होते होते रह गयी।

 

अमित त्रिवेदी
इंदौर

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