श्रीरामचरितमानस में तीन जगह मोह, विषाद को दूर करने के लिए गीता कही गई है

 

 

 

पहला संवाद लक्ष्मण और निषादराज गुह के मध्य होता है। दूसरा भगवान राम और विभीषण के बीच ( इन दोनों संवाद पे पहले लिखा जा चुका हैं )। तीसरा काकभुशुंडि और गरुड़ के बीच।

*आज तीसरा यानी अंतिम संवाद काकभुशुंडि और गरुड़ के बीच पे लिखा जा रहा हैं।*

 

राम-रावण युद्ध के दौरान जब राम जी नागपाश में बंध गए, तब गरुड़ ने नागों को खाकर राम को मुक्त किया। लेकिन गरुड़ के मन में संदेह उत्पन्न हो गया कि क्या राम वास्तव में परमात्मा हैं? ( क्योंकि ईश्वर को नागपाश बाँध सकता है? ) इस संदेह को दूर करने के लिए नारद → ब्रह्मा → शिव के मार्गदर्शन से गरुड़ काकभुशुण्डि के पास पहुँचे, जो नीले पर्वत पर कौवे के रूप में तपस्या कर रहे थे और राम के परम भक्त थे। काकभुशुण्डि ने गरुड़ का स्वागत किया और उनके संदेह को दूर करने के लिए रामकथा सुनाई। गरुड़ ने सात प्रमुख प्रश्न पूछे, जिनके उत्तर में काकभुशुण्डि ने राम-भक्ति, मानस रोग ( मन के विकार ), माया, भक्ति का मार्ग आदि गहन ज्ञान दिया।

गरुड़ को आते ही काकभुशुण्डि के आश्रम में मोह-भ्रम दूर हो जाता है। गरुड़ प्रेम से कहते हैं :-

*सुनहु तात जेहि कारन आयउँ।*

*सो सब भयउ दरस तव पायउँ॥*

*देखि परम पावन तव आश्रम।*

*गयउ मोह संसय नाना भ्रम॥*

*अब श्रीराम कथा अति पावनि।*

*सदा सुखद दुख पुंज नसावनि॥*

*सादर तात सुनावहु मोही॥*

 

हे तात! जिस कारण आया था, वह सब आपके दर्शन से पूरा हो गया। आपके पवित्र आश्रम को देखकर मेरा मोह, संशय और भ्रम दूर हो गया। अब मुझे श्री राम की अति पवित्र कथा सुनाइए, जो सदा सुख देने वाली और दुखों का नाश करने वाली है।)गरुड़ फिर प्रेम से कहते हैं कि मुझे अपना सेवक मानकर सप्त प्रश्नों ( सात प्रश्नों ) के उत्तर दीजिए।

 

_प्रथम प्रश्न :-_

*प्रथमहिं कहहु नाथ मतिधीरा।*

*सब ते दुर्लभ कवन सरीरा॥*

*बड़ दुख कवन कवन सुख भारी।*

*सोउ संछेपहिं कहहु बिचारी॥*

हे धीर बुद्धिवाले नाथ! पहले यह बताइए कि सभी शरीरों में सबसे दुर्लभ (दुर्लभतम) कौन सा शरीर है? सबसे बड़ा दुख कौन सा है और सबसे बड़ा सुख कौन सा है? यह भी विचार करके संक्षेप में कहिए॥

_दूसरा प्रश्न ( मानस रोगों का वर्णन ) :-_

*मानस रोग कहहु सब भाई।*

*जिन्ह ते दुख पावहिं सब लोगा॥*

( और आगे विस्तार में मानस रोगों का नाम लेते हुए पूछते हैं। )

हे भाई! मन के रोग बताइए, जिनसे सब लोग दुख पाते हैं॥

( गरुड़जी कहते हैं कि एक रोग से तो मर जाते हैं, फिर ये असाध्य बहु रोग कैसे हैं? )

_*तीसरा प्रश्न ( इन रोगों का निवारण )*_

( यह पिछले से जुड़ा है—कैसे इन रोगों से छुटकारा मिले? )

_चौथा प्रश्न ( सबसे बड़ा पुण्य और सबसे बड़ा पाप ) :-_

*कवन पुन्य श्रुति बिदित बिसाला।*

*कहहु कवन अघ परम कराला।।*

सबसे बड़ा पुण्य कौन सा है जो वेदों में प्रसिद्ध है? और सबसे बड़ा पाप (अघ) कौन सा है जो अत्यंत भयानक है? बताइए॥