विभिन्न रोगो के लिए विभिन्न जूस

 

 

भूख लगाने के हेतुः👉 प्रातःकाल खाली पेट नींबू का पानी पियें। खाने से पहले अदरक का कचूमर सैंधव नमक के साथ लें।

 

रक्तशुद्धिः👉 नींबू, गाजर, गोभी, चुकन्दर, पालक, सेव, तुलसी, नीम और बेल के पत्तों का रस।

 

दमाः👉 लहसुन, अदरक, तुलसी, चुकन्दर, गोभी, गाजर, मीठी द्राक्ष का रस, भाजी का सूप अथवा मूँग का सूप और बकरी का शुद्ध दूध लाभदायक है। घी, तेल, मक्खन वर्जित है।

 

उच्च रक्तचापः👉 गाजर, अंगूर, मोसम्मी और ज्वारों का रस। मानसिक तथा शारीरिक आराम आवश्यक है।

 

निम्न रक्तचापः👉 मीठे फलों का रस लें, किन्तु खट्टे फलों का उपयोग न करें। अंगूर और मोसम्मी का रस अथवा दूध भी लाभदायक है।

 

पीलियाः👉 अंगूर, सेव, रसभरी, मोसम्मी। अंगूर की अनुपलब्धि पर लाल मुनक्के तथा किसमिस का पानी। गन्ने को चूसकर उसका रस पियें। केले में 1.5 ग्राम चूना लगाकर कुछ समय रखकर फिर खायें।

 

मुहाँसों के दागः👉 गाजर, तरबूज, प्याज, तुलसी और पालक का रस।

 

संधिवातः👉 लहसुन, अदरक, गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी, हरा धनिया, नारियल का पानी तथा सेव और गेहूँ के ज्वारे।

 

एसीडिटीः👉 गाजर, पालक, ककड़ी, तुलसी का रस, फलों का रस अधिक लें। अंगूर मोसम्मी तथा दूध भी लाभदायक है।

 

कैंसरः👉 गेहूँ के ज्वारे, गाजर और अंगूर का रस।

 

सुन्दर बनने के लिएः👉 सुबह-दोपहर नारियल का पानी या बबूल का रस लें। नारियल के पानी से चेहरा साफ करें।

 

फोड़े-फुन्सियाँ👉 गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी और नारियल का रस।

 

कोलाइटिसः👉 गाजर, पालक, पत्ता गोभी और पाइनेपल का रस। 70 प्रतिशत गाजर के रस के साथ अन्य रस समप्राण। चुकन्दर, नारियल, ककड़ी, पत्ता गोभी के रस का मिश्रण भी उपयोगी है।

 

अल्सरः👉 अंगूर, गाजर, पत्ता गोभी का रस। केवल दुग्धाहार पर रहना आवश्यक है।

 

सर्दी-कफः👉 मूली, अदरक, लहसुन, तुलसी, गाजर का रस, मूँग अथवा भाजी का सूप।

 

ब्रोन्काइटिसः👉  पपीता, गाजर, अदरक, तुलसी, पाइनेपल का रस, मूँग का पानी लेवे।

साभार~ पं देव शर्मा

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