बैंक डिपाजिट कितना सुरक्षित: कैसे पाएं ज्यादा सुरक्षा:

 

 

समय के साथ सरकार ने समझा की बैंकों को चलाना सरकार का काम नहीं है। सभी बैंकों को आज के समय चाहे वे सरकारी हो या गैर सरकारी – बनाए गए नियमों के अंतर्गत काम करना होता है जिस पर आरबीआई नजर रखता है।

 

सभी बैंकों को अपने सामर्थ्य के हिसाब से व्यापारिक लेन-देन करने का अधिकार है। फर्क सिर्फ इतना है कि सरकारी बैंकों में सरकार के पास बैंकों की ५१% से ज्यादा पूंजी होती है और गैर सरकारी बैंकों की पूंजी निजी हाथों में होती है।

 

ऐसे में एक खाते धारक के लिए जरूरी हो जाता है कि ऐसे बैंक में डिपाजिट रखें जो की सुरक्षित के साथ अच्छा प्रबंधन भी हो।

 

तो सबसे बड़ा प्रश्न यही आता है एक आम खाते धारक के मन में – क्‍या वाकई बैंक में आपका डिपॉजिट पूरी तरह से सुरक्षित होता है?

 

मान लीजिए कि आपने जिस बैंक में पैसा जमा किया है, वो डूब जाए या दिवालिया हो जाए तो क्‍या बैंक आपकी रकम वापस लौटाएगा?

 

यहां समझिए बैंक डिपॉजिट को लेकर नियम क्‍या हैं और आप अपनी रकम को 100 फीसदी सुरक्षित कैसे रख सकते हैं?

 

१. बैंक डूबा तो कितनी रकम रहेगी सुरक्षित?

 

अगर कोई बैंक किसी वजह से डिफॉल्ट कर जाता है, तो जमाकर्ता की पूरी रकम सुरक्षित नहीं रहती.

 

ऐसी स्थिति में ग्राहक को अधिकतम ₹5 लाख तक की ही गारंटी मिलती है.

 

ये सुरक्षा Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (DICGC) देता है.

 

DICGC रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के स्वामित्व वाली संस्था है, जो बैंकों में जमा रकम का बीमा करती है.

 

मतलब साफ है. अगर किसी बैंक में आपकी कुल जमा रकम ₹5 लाख से ज्यादा है और वो बैंक संकट में आ जाता है, तो आपको बैंक से सिर्फ ₹5 लाख तक की रकम ही वापस मिलेगी, इससे ज्‍यादा 1 रुपया भी नहीं मिलेगा. इससे ऊपर की रकम डूब जाएगी.

 

२. पांच लाख से ज्‍यादा रकम को कैसे करें सुरक्षित?

 

अगर आप बड़ी पूंजी बैंक में रखना चाहते हैं और चाहते हैं कि जमा रकम पूरी तरह से सुरक्षित भी रहे तो इसके लिए सबसे जरूरी नियम ये है कि पूरा पैसा एक ही बैंक में न रखें.

 

अगर आपकी रकम 5 लाख से ज्‍यादा है तो आपको चाहिए कि अपनी रकम को अलग-अलग बैंकों में बांटकर रखें.

 

हर बैंक में कुल जमा ₹5 लाख या उससे कम रखें. इससे किसी एक बैंक के डूबने की स्थिति में पूरा पैसा इंश्योरेंस के दायरे में आ जाएगा. ये तरीका आपकी जमा पूंजी के जोखिम को काफी हद तक कम कर देता है.

 

३. DICGC इंश्योरेंस क्‍या है और कैसे काम करता है?

 

DICGC देश के बैंकों में जमा रकम पर बीमा कवर देता है. इस बीमा के लिए ग्राहक को अलग से कोई पैसा नहीं देना होता.

इसका प्रीमियम बैंक खुद DICGC को देता है.

 

पहले ये गारंटी सिर्फ ₹1 लाख तक थी. बाद में सरकार ने इसे बढ़ाकर ₹5 लाख कर दिया.

 

भारत में काम कर रहे विदेशी बैंकों की शाखाएं भी इस दायरे में आती हैं.

 

४. किन-किन डिपॉजिट पर मिलता है ₹5 लाख का कवर?

 

DICGC का बीमा सिर्फ सेविंग अकाउंट तक सीमित नहीं है. इसमें शामिल होते हैं:

 

– सेविंग अकाउंट

– फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)

– रिकरिंग डिपॉजिट (RD)

– करंट अकाउंट

 

ध्यान रखें, बीमा कवर मूलधन और ब्याज दोनों पर मिलता है.

 

बैंक में मौजूद आपकी सभी जमा रकम और उस पर मिलने वाला ब्याज जोड़कर अधिकतम ₹5 लाख तक की राशि ही सुरक्षित मानी जाती है.

 

५. किन बैंकों पर लागू होता है ये नियम?

 

₹5 लाख की डिपॉजिट इंश्योरेंस गारंटी इन बैंकों पर लागू होती है:

 

– सभी कमर्शियल बैंक

– विदेशी बैंकों की भारतीय शाखाएं

– रीजनल रूरल बैंक

– कोऑपरेटिव बैंक

 

हालांकि, कोऑपरेटिव सोसायटी इस बीमा के दायरे में नहीं आतीं.

 

आम खाते धारक के लिए जरूरी है कि अपने डिपाजिट की सुरक्षा संबंधित जानकारी रखें और सही बैंक का चुनाव उसके व्यापारिक लेन-देन एवं व्यवहार के अनुसार करें।

 

*सीए अनिल अग्रवाल जबलपुर