बात मप्र राजनीति के एक अनुसने पहलु की..

 

 

जब शिवराज सिंह चौहान के लिए दिग्विजय सिंह ने अपने ही कैबिनेट मंत्री से ख़ाली करवा दिया था सरकारी बांग्ला..

 

2003 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने उमा भारती को अपना नेता घोषित कर दिया था। उन्होंने दिग्विजय सरकार को घेरने के लिए एक वॉर रूम बनाया, जिसका नाम रखा गया “जावली”

 

जावली महाराष्ट्र की एक जगह का नाम है, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज ने औरंगज़ेब के सेनापति अफ़ज़ल ख़ान को धोखे से मार दिया था। इसी रणनीतिक संदर्भ के साथ उमा भारती ने अपने चुनावी अभियान के लिए यह नाम चुना

 

भोपाल के 74 बंगले इलाके में एक बंगले के दो कमरों में यह वॉर रूम बनाया गया। यह वही बंगला था, जहां 1998 में गौरीशंकर शेजवार नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद रहने लगे थे

 

उस समय यह बंगला बाबूलाल गौर के आवास के पास था। दूसरी ओर दिग्विजय सिंह के करीबी और तत्कालीन आबकारी एवं जनसंपर्क मंत्री सत्यनारायण शर्मा रहते थे

 

2000 में जब छत्तीसगढ़ राज्य बना, तो सत्यनारायण शर्मा रायपुर चले गए और उनका आवंटित बंगला खाली हो गया। इसके बाद भोपाल के कई नेता इसे पाने के लिए सक्रिय हो गए।

 

उस समय शिवराज सिंह चौहान विदिशा से सांसद थे। जब भी वे गौरीशंकर शेजवार के घर आते, तो इस बंगले को अपने नाम अलॉट करवाने की चर्चा करते..

 

जैसे ही सत्यनारायण शर्मा ने बंगला खाली किया, शिवराज सिंह चौहान सीधे गौरीशंकर शेजवार के पास पहुंचे और कहा कि “आप तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से बात कर यह बंगला मुझे अलॉट करवा दीजिए।”

 

गौरीशंकर शेजवार ने दिग्विजय सिंह से शिवराज सिंह चौहान के लिए बात की, तो दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे पहले ही यह बंगला मध्य प्रदेश सरकार में नगरीय प्रशासन और विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री सज्जन सिंह वर्मा को देने का वादा कर चुके हैं

 

शेजवार के अनुरोध पर दिग्विजय सिंह ने सुझाव दिया कि शिवराज सिंह और सज्जन वर्मा आपस में बात कर तय कर लें कि बंगला किसे चाहिए। इस पर शेजवार ने कहा, राजा साहब आप ही अपने मंत्री सज्जन वर्मा से बात कर लीजिए और कोई दूसरा बांग्ला आवंटित कर दीजिए..

 

शाम होते ही सज्जन वर्मा का फोन गौरीशंकर शेजवार के पास आया। उन्होंने कहा, “मैं यह बंगला छोड़ रहा हूं, आप शिवराज सिंह को बता दीजिए।”

 

2000 से शिवराज सिंह चौहान इस बंगले में रह रहे हैं। उनकी पत्नी साधना सिंह इसे बेहद शुभ मानती हैं, इसलिए उन्होंने इसे कभी नहीं छोड़ा। मुख्यमंत्री बनने के बाद जब वे श्यामला हिल्स स्थित मुख्यमंत्री निवास में शिफ्ट हुए, तब भी इस बंगले को मुख्यमंत्री निवास के एनेक्सी के रूप में रखा

 

2018 में जब साधना सिंह “किरार महासभा” की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं, तो उन्होंने इसी बंगले में महासभा का कार्यालय खोल दिया

 

जब शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय मंत्री बन के दिल्ली चले गए तब भी यह घर उनकी के नाम पर अलॉट है और अब इसे उन्होंने मामा का घर बना दिया है, जहां प्रदेश का कोई भी व्यक्ति कभी भी मामा से मिलने जा सकता है

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