*प्रदेश अध्यक्ष की उलटी गिनती के बीच अमित शाह से मिले मुख्यमंत्री

_घर बैठे नरोत्तम मिश्रा से बड़े नेताओं की मेल मुलाकातों से प्रदेश भाजपा में हलचल तेज l

_सिंधिया के बाद पार्टी के प्रदेश प्रभारी की मिश्रा से मुलाक़ात से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की सरगर्मी हुई तेज़_

 

_ग्लोबल समिट के बहाने मुख्यमंत्री की भी दिल्ली में अमित शाह से हुई मुलाकात_

*_स्थापित व लोकप्रिय नामों की बजाय किसी लो-प्रोफाईल नेता भी प्रदेश की कमान दे चौका सकता हैं केंद्रीय नेतृत्व l

_ग्वालियर-चंबल बेल्ट व निमाड़ अंचल की चर्चा ज़्यादा, सीएम की पसंद पर ‘ दिल्ली ‘ अब तक मौनl

 

_*सूबे की ‘सरदारी ‘ की पगड़ी किसके माथे बंधेगी, ये जिज्ञासा भाजपाई कुनबे में तेज़ हो गई हैं। जिज्ञासा को ‘ ग्वालियर घराने ‘ ने और बढ़ा दिया हैं। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व मन बनाकर बैठ गया हैं कि वह ‘कमलदल’ के अनेकानेक योग्य ‘ नरों ‘ में किसी एक को ‘ उत्तम ‘ मान ‘सरदारी ‘ का साफा बांध दें। संगठन की इस ‘सरदारी ‘ पर ‘सरकार ‘ की भी गहरी नज़र हैं। वह चाहती हैं कि संगठन में ऐसा ‘सरदार ‘ न आये, जो ‘सरकार ‘ पर भारी हो। इसलिए एक अनजाना सा नाम आगे किया हुआ है। अब ये नाम ‘ परिवारवाद ‘ की चपेट में आना बताया जा रहा हैं। ऐसे में अब मामला अंचलवार भी होता जा रहा हैं कि कौन सा अंचल छुटा हुआ हैं, जो न भोपाल की सरकार में ढंग का मुकाम पाया हुआ है और न दिल्ली के निज़ाम में असरकारी ठौर-ठिकाना पा पाया हैं। पार्टी के एक घर बेठे बड़े व कद्दावर नेता के घर जाकर चल रही मुलाकातों ने भी चर्चा का बाज़ार गर्म कर रखा है। अब ये मुलाकात सिर्फ सौजन्य भेंट ही है या दिल्ली के इशारे को भांप कर की गई हैं? इसका खुलासा बस जल्द ही होने वाला हैं। तब तक हर वो भाजपाई ‘ नर ‘ स्वयम को ‘ उत्तम ‘ मान सकता है, जब तक अध्यक्ष के नाम की घोषणा न हो जाती। ‘ मोटाभाई ‘ के पास पत्र तैयार हैं, जिस पर नाम अंकित होते ही पत्र भोपाल रवाना कर दिया जायेगा।

 

भाजपाई कुनबे के ‘ नरों ‘ में ‘उत्तम’ कौन?, जो सूबे में पार्टी की ‘सरदारी’ संभाल ले? इस बात का फैसला बिलकुल निकट आ गया हैं। ‘दिल्ली दरबार ‘ ने मन बना लिया है कि मध्यप्रदेश में नया अध्यक्ष अब दे दिया जाए। सबकी टकटकी दिल्ली की तरफ़ ही लगी है कि वो ‘ नर ‘ कौन होगा, जो पार्टी के लिए भी और मुख्यमंत्री के लिए भी ‘ उत्तम ‘ होगा? जी हां, बात सिर्फ दल की ही नही, सरकार के मुखिया की भी हैं। वे ‘ दिल्ली दरबार ‘मे लगातार दस्तक दे ही इसलिए रहें हैं कि जिस तरह ‘ मामा ‘ को बतौर प्रदेश अध्यक्ष ‘ भांजे ‘ मिलते रहें, वैसे ही इस बार भी हो। ताकि सत्ता व संगठन का तालमेल बेहतर बना रहें और दोनों की गति व प्रगति बरकरार रहें।

 

*प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पर नए चहेरे को लेकर राज्य में सरगर्मी तेज हो गई हैं। इसका अहम कारण केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया व प्रदेश भाजपा के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा की मुलाकात रहा। एक ही अंचल व इलाक़े के दोनों नेताओ के इस मिलन ने प्रदेश अध्यक्ष की चल रही कयासों को नया रंग दे दिया हैं। सिंधिया का ‘ घर बैठे ‘ मिश्रा के आगे रहक़र घर जाने को राजनीति के गलियारों में अहम माना जा रहा हैं। मिश्रा की इस अहमियत को पार्टी के प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह ने भी बढ़ा दिया हैं। वे भी मिश्रा से मिलने उनके ही निवास पर पहुँचे। ऐसे में ये संकेत मिलने लगे कि केंद्रीय नेतृत्व ने ‘सूबे की सरदारी’ मिश्रा को देने का मन बना लिया हैं। हालांकि भाजपाई राजनीति के बीते एक नही अनेक अनुभव बताते हैं कि जिसका नाम चल गया, वह परिदृश्य से चला ही जाता हैं। हालांकि नरोत्तम मिश्रा इस स्तर के नेता नही। अपनी कार्यशैली व ज़मीनी जमावट के दम पर वे प्रदेश भाजपा की राजनीति में हाशिये पर धकेलने के बाद भी दिल्ली दरबार मे मजबूती से डटे हुए हैं। ऐसे में बड़े नेताओं का उनसे मिलना कई तरह के संकेत कर रहा हैं।*

 

मिश्रा के सर पर पगड़ी बंधने को संशय की दृष्टि से देखने वालों का भी अपना तर्क हैं। उनका कहना है कि पार्टी मिश्रा जैसे नाम को आगे कर प्रदेश में दल के दो ध्रुव स्थापित नही करना चाहेगी। लिहाज़ा कोई लो-प्रोफाईल नेता को कमान दी जा सकती हैं। शायद इसलिए हेमंत खंडेलवाल का नाम अकस्मात चर्चा में आया। सूत्र बताते है कि सरकार के मुखिया की मंशा है कि हेमंत या उन जैसे ही किसी नेता के हाथ संगठन की कमान आ जाए। ताकि सरकार व संगठन में कभी कोई अहम की लड़ाई न छिड़े। इस लिहाज़ा से निमाड़ के भी एक नेता का नाम गुपचुप दिल्ली तक रवाना हुआ हैं। आदिवासी वर्ग के इस नेता के साथ दिक्कत बस ये ही है कि उनका नाता पूर्व मुख्यमंत्री से गहरा व घनिष्ठ रहा। मजे की बात ये है कि ये नाम डॉ सुमेर सिंह नही हैं। अगर दिल्ली दरबार प्रदेश में आदिवासी नेतृत्व को आगे करने का मन बनाता है तो ये नाम चौका सकता हैं।

 

*प्रदेश अध्यक्ष की उलटी गिनती के बीच अमित शाह से मिले मुख्यमंत्री

 

*सरकार के मुखिया की दिल्ली दौड़ बरकरार हैं। हालांकि इस दौड़भाग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में राजधानी में होने जा रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से जोड़ा जा रहा हैं। लेक़िन सरकार के मुखिया हर बार इस बहाने केंद्रीय नेतृत्व से मिल ही रहें हैं। ताज़ा मुलाकात उन्होंने कल गृहमंत्री अमित शाह से की। हालांकि उनका दौरा ग्लोबल समिट के मद्देनजर अन्य देशों के राजदूतों से मिलने-मिलाने का था लेक़िन सीएम ने शाह से मिलना नही भुला। वह भी प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चल रही कसरत के बीच। अब इस मुलाकात में हुआ क्या? यह तो वे ही जाने लेक़िन चर्चा में सूबे में संगठन की जवाबदेही पर भी बात हुए बिन नही रही। सीएम की मंशा तो ये ही है कि जैसे पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री को प्रदेश अध्यक्ष के मामले में ‘ दिल्ली ‘ ने ‘ उपकृत ‘ किया, वह परिपाटी कायम रहे। लेक़िन सीएम शायद भूल रहे कि दिल्ली दरबार ने ही ‘मामा ‘ के एकछत्र राज के दौरान ‘ वीडी भैय्या’ भेज दिए थे। ये तो जगजाहिर ही हैं कि फ़िर सरकार व सँगठन के बीच रिश्ते कैसे बने रहें। लिहाज़ा मुख्यमंत्री पूरे मामले में फूंक फूंक कर कदम बढ़ा रहे हैं।*

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