ट्रम्प टेरिफ: आत्मनिर्भरता की परीक्षा अब!

 

 

 

मोदी सरकार की विदेश नीति का फोकस पश्चिमी देशों पर शुरू से रहा है ताकि भारत अपना वर्चस्व पड़ोसी देशों को बता सकें और चीन पाकिस्तान पर दबाव बना सकें।

 

परिणाम यह हुआ कि हमारे पड़ोसी देश हमसे दूर होते गए और चीन की गोद में बैठ गए। चीन ने पिछले दशक में एशिया में अपनी ताकत का न केवल लोहा मनवाया बल्कि अमेरिका कोई भी टेरिफ लगाने से पहले सोचने लगा। लेकिन भारत जैसे मित्र देश पर तुरंत टेरिफ का निर्णय लिया और साथ ही पाकिस्तान के साथ ट्रेड डील कर अपने हथियार सप्लाई कर इस क्षेत्र को अशांति की ओर ढकेलने का प्रयास किया जा रहा है।

 

आज स्थिति यह है कि अमेरिका और यूरोप मतलबी दोस्त साबित हुए और हमको अपने पड़ोसी देशों की तरफ फोकस करना पड़ेगा ताकि ट्रंप टेरिफ से मुकाबला किया जा सके। हमारी विदेश नीति कठघरे में खड़ी होती है क्योंकि हम अपने पड़ोसी देशों पर यकीन नहीं कर सकते और पश्चिमी देश ने अपना असली रंग दिखा दिया है। साफ है हम अलग थलग पड़ चुके हैं और हमारी आत्मनिर्भरता और कूटनीति की असली परीक्षा अब होगी।

 

आज अमेरिका के रुख के कारण तीन प्रमुख चुनौतियां हमारे समक्ष है:

 

१. एशियन महाद्वीप को मजबूत बनाना साथ ही विश्वास हीन पड़ोसियों को साधना

2. हमारा निर्यात न बढ़े लेकिन आयात पर निर्भरता कम करनी होगी चाहे वो रूस और चीन से ही क्यों न हो

3. रक्षा हितों से कोई भी समझोता न करना

 

साफ है सरकारी विदेश नीति में आमूलचूल परिवर्तन करने होंगे, नए आर्डर पर काम करना होगा –

 

१. आज जहां पश्चिमी देशों ने बता दिया कि वे सिर्फ एशियन देशों का उपयोग अपने हितों के लिए करते हैं और अपने शस्त्रों का इस्तेमाल एशिया में अंशाति फैलाने के लिए करते हैं

2. इसको समझते हुए विकासशील देशों को वैश्विक स्तर पर एक साथ आना होगा, खासकर भारत चीन रूस ईरान कोरिया इंडोनेशिया मलेशिया तुर्की। समझना होगा कि विकसित देश उन्हें लड़वा रहे हैं।

3. भारत को ऊर्जा क्षेत्र में काम करना होगा – नवीनीकरण ऊर्जा को बढ़ावा देना होगा ताकि आयात पर निर्भरता कम हो। लोकल उत्पादों को बढ़ावा देना होगा। लघु उद्योगों को बढ़ावा देना होगा।

4. यह सिर्फ संभव है सरल कराधान नीति से और अनुपालनों एवं पेनल्टी हटाकर।

5. जीएसटी की सभी उत्पादों पर एक दर १२% लागू हो एवं आयकर सभी तरह की आय पर २०% लागू हो। जिससे व्यक्ति की एक तिहाई हिस्सा टैक्स के रूप में सरकार के पास जायेगा। नीतियां सरल होगी जो व्यापार बढ़ाने में मदद करेंगी। लोकल उत्पाद सस्ता होगा।

6. नए आर्डर में आत्मनिर्भरता से ही वैश्विक स्थिति का मुकाबला किया जा सकता है। विदेशी उत्पादों को देश में आने से नहीं रोका जा सकता लेकिन निर्भरता कम की जा सकती है और लघु उद्योगों का एक नेटवर्क सरल नीति से तैयार किया जा सकता है।

7. रक्षा क्षेत्र में बिना किसी समझौते से बढ़ना होगा। कितना भी मंहगा शस्त्र हो, वह खरीदना होगा क्योंकि हम अपने पड़ोसियों के साथ तो खड़े हैं लेकिन विश्वास नहीं कर सकते।

साफ है ट्रंप टेरिफ ने एक मौका दिया है हम आत्मनिर्भर बनें और एशिया महाद्वीप को महाशक्ति के रूप में विकसित करें। इसके लिए विदेश नीति का फोकस पड़ोसी और एशिया पर करना होगा न की पश्चिमी देशों पर। एशिया फर्स्ट की नीति अपनानी होगी और आत्मनिर्भरता को सही मायनों में धरातल पर उतारना होगा नहीं तो हम न घर के रहेंगे न घाट के ।

 

सीए अनिल अग्रवाल जबलपुर

Shares