मनोज_जोशी:
भगवान श्रीकृष्ण का आज जन्मोत्सव है। ज्योतिषीय गणना बताती है कि श्रीकृष्ण का जन्म आज से 5137 वर्ष पहले हुआ। वे 119 वर्ष तक इस पृथ्वी पर रहे। महाभारत युद्ध के समय उनकी उम्र 55-56 वर्ष थी।
श्रीकृष्ण की जीवन यात्रा पर हुए शोध के साथ ही हम चर्चा करेंगे कि कैसे कष्टों से पार पाते हुए श्रीकृष्ण द्वारिकाधीश बने।
भगवान श्रीकृष्ण ने विष्णु के 8वें अवतार के रूप में जन्म लिया था। 8वें मनु वैवस्वत के मन्वंतर के 28वें द्वापर में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की रात्रि के जब 7 मुहूर्त निकल गए और 8वां उपस्थित हुआ तभी आधी रात के समय सबसे शुभ लग्न में देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। रोहिणी नक्षत्र तथा अष्टमी तिथि के संयोग से जयंती नामक योग में 3112 ईसा पूर्व (अर्थात आज से 5137वर्ष पूर्व) श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। ज्योतिषियों के अनुसार रात 12 बजे उस वक्त शून्य काल था।
आर्यभट्ट के अनुसार महाभारत युद्ध 3137 ईपू में हुआ। इस युद्ध के 35 वर्ष पश्चात भगवान श्रीकृष्ण ने देह छोड़ दी थी। तब उनकी उम्र 119 वर्ष थी।
ब्रिटेन में कार्यरत न्यूक्लियर मेडिसिन के फिजिशियन डॉ. मनीष पंडित ने महाभारत में वर्णित 150 खगोलीय घटनाओं के आधार पर बताया है कि महाभारत का युद्ध 22 नवंबर 3067 ईसा पूर्व को हुआ था। उस वक्त भगवान कृष्ण 55-56 वर्ष के थे।
भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति की पूजा करना एक बात है। लेकिन दूसरी और महत्वपूर्ण बात है उनकी जीवन यात्रा पर दृष्टि डालकर प्रेरणा लेना।
श्रीकृष्ण की जीवन यात्रा का संदेश यह है कि जन्म भले कितनी ही प्रतिकूलताओं में हुआ हो , सतत प्रयास और निरंतर कुछ श्रेष्ठ करने की चाह आपको अपने लक्ष्य के उच्चतम स्तर तक पहुंचा देगी।
कारागार में जन्म लेने वाले श्रीकृष्ण को जन्म देने और पालने वाली माँ अलग-अलग। पूतना, तृणावर्त, अघासुर, बकासुर, व्योमासुर, चारूण, मुष्टिक और कंस जैसे राक्षसों से उन्होंने सीधे संघर्ष किया और विजय प्राप्त की। विचार कीजिए क्या यह इतना आसान रहा होगा।
महाभारत के पूरे युद्ध में श्रीकृष्ण की भूमिका और युद्ध के मैदान में अर्जुन को दिया गया भगवद्गीता का ज्ञान आज भी जीवन के हर तरह के संघर्ष में हमारा मार्गदर्शन करता है।
जो श्रीकृष्ण गौ पालन करते हैं, बांसुरी बजाते हैं, वही सुदर्शन चक्र भी उठाते हैं। माखन चुराकर खाने वाला नटखट बालक धर्म की संस्थापना करता है।
श्रीकृष्ण ने महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने का अद्वितीय कार्य किया।श्रीकृष्ण की जिन 16 हजार पटरानियों का जिक्र किया जाता है दरअसल वे सभी भौमासर जिसे नरकासुर भी कहते हैं के यहां बंधक बनाई गई महिलाएं थीं जिनको श्रीकृष्ण ने मुक्त कराया था। श्रीकृष्ण की छोटी बहन सुभद्रा के विवाह की भी कहानी भी एक बहन को उसकी पसंद का वर चुनने की आजादी की कहानी है। अगर तथ्य पर बात करेंगे तो पाएंगे कि रुक्मिणी और कृष्ण के विवाह की कहानी भी महिला सम्मान की ही कहानी है
यदि आपने जीवन में कुछ श्रेष्ठ पाने की ठान ली तो बड़ी से बड़ी बाधाएं भी आपसे परास्त होकर चली जायेंगी । जीवन में कुछ श्रेष्ठ पाने के लिए जीवन की तमाम प्रतिकूलताओं का लगातार डटकर सामना भी करना होता है।
आपका लक्ष्य श्रेष्ठ है तो आपके प्रयास भी अतिश्रेष्ठ होने चाहिए।
जय श्री कृष्ण 🙏🙇🙌