इंद्र की पत्नी पर किसने डाली बुरी नजर?

 

जब इंद्र पर ब्रह्मह्त्या का दोष लगा तो उसे स्वर्ग के सिंघासन का त्याग करना पडा. देवराज इंद्र के बाद नहुष राजा बना. नहुष देवी अशोक सुंदरी का पति और देवी पार्वती एवं शिव का दामाद था. नहुष धर्मात्मा थे, पर राजसीवृत्ति और स्वर्ग के सुखा का उपभोग करते हुए वे इंद्र की पत्नी इन्द्राणी के प्रति विषयासक्त हो गये।

 

इन्द्राणी इन अनुपस्थिति से वैसे ही दुखी थी, इस नयी विपत्ति के आ जाने पर उन्होंने देवगुरु बृहस्पतिकी के यहाँ शरण ली। बृहस्पतिके परामर्श से शचीने भगवती जगदम्बाकी आराधना की, जिससे प्रसन्न होकर भगवती ने इन्द्राणी को दर्शन दिया और अपनी एक इलाके साथ शचीको मानसरोवर भेजकर इन्द्रके दर्शन करा दिये। शची ने इन्द्रको अपनी विपत्ति से अवगत कराया।

 

इसपर इन्द्रने अपनी पत्नी इन्द्राणी को यह परामर्श दिया कि तुम नहुष से जाकर एकान्त में कहना कि आप ऋषियों द्वारा वहन किये जानेवाले दिव्य वाहन से मेरे पास आयें, ऐसा होनेपर मैं प्रेमपूर्वक आपके वश में हो जाऊँगी। शचीने ऐसा ही किया। उधर भगवती ने नहुष की बुद्धिको मोहित कर दिया, जिससे उसकी पाप बुद्धि ने इन्द्राणी की प्राप्तिकी इच्छा से दिव्य मुनियोंको अपनी पालकी का वहन करनेमें लगा दिया।

 

इतना ही नहीं उस मूढ़ राजाने तपस्विश्रेष्ठ महर्षि अगस्तिके सिर का पैर से स्पर्श करते हुए ‘सर्प-सर्प’ कहा, जिससे क्रुद्ध होकर उन महामुनि ने उसे सर्प होनेका शाप दे दिया। इस प्रकार नहुषके पतनके बाद भगवतीकी कृपा से इन्द्रको पुनः स्वर्गका राज्य प्राप्त हो गया।

Shares