अनुभवों में छिपा सुख

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सुख वस्तुओं के एकत्रीकरण में नहीं बल्कि अनुभूति में है। यदि आप अनुभव कर सकते हैं तभी सुख के मायने हैं। अनुभति जितनी अधिक गहरी होती है सुख का आह्लाद उतना अधिक मिलता है।

 

बरसात में भीगते हुए किसी टपरी पर चाय पीना, बादल को घिरते देखना, बूंदों को अपनी त्वचा पर गिरते हुए महसूस करना सुख है।

 

किसी नदी को तेज बहते देखना, उसकी धार से टकरा कर उठे स्वर संगीत को सुनना सुख है।

 

चिड़ियों को चहचहाते और फूलों को खिले हुए देखने सुनने का आनंद सुख है।

 

गर्मी की रातों में नीम के पेड़ से छन कर आती चांदनी को देखना, खेतों के पास जुगुनुओं की कतार को उड़ते देखना, पुरवा हवाओं को केश सहला जाते महसूस करना सुख है।

 

एक अच्छी कविता पढ़ने का आनंद, एक अच्छा उपन्यास पढ़ने का सुख, एक ढलती शाम को निर्विकार देखना, सर्द रात में एक कप गर्म कॉफी के साथ अपने फेवरेट सिंगर को सुनना, गुनगुनी धूप से देह को सिंकते महसूस करना, कोट में हाथ डाल बिना मतलब घूमना, बातों बातों में ही पूरे दिन को गुम होते देखना सुख है।

 

ऐसे सुख पैसे से नहीं मिलते, जो ऐसे सुखों को पा सका वही जीवन जी सका।