बीयू में एनपीएस घोटाले पर यूजीसी सख्त

 

 

रजिस्ट्रार को जाँच के आदेश ,लीपापोती में जुटे जिम्मेदार

महेन्द्र सिंह :

भोपाल , | बरकतउल्ला विश्वविधालय (बीयू ) में करोड़ों के नेशनल पेंशन स्कीम  (एनपीएस) घोटाले में यूजीसी के एक पत्र से जिम्मेदारों की साँसे फूली हुईं हैं| मामला इतना बड़ा है कि बीयू के अधिकारियों को न निगलते बन रहा है और न उगलते | अधिकारी पर्दा डालने में लगे हैं ,लेकिन जैसे –जैसे परतें खुलेंगी ,वैसे –वैसे उनके “सही जगह “ पर पहुँचने का रास्ता खुलता जाएगा |

उल्लेखनीय है कि कि वर्ष 1 /1 /2005  के बाद विश्वविधालय की सेवा में आए शैक्षणिक और अशैक्षणिक अधिकारी/ कर्मचारियों के लिए नेशनल पेंशन स्कीम है | इस योजना में वेतनभोगी की सैलरी से 10 प्रतिशत अंशदान की कटौती कर  नियोक्ता द्वारा समतुल्य अंशदान का नियम है और कर्मचारी तथा  नियोक्ता के अंशदान को हर माह NSDL को भेजा जाना चाहिए ,लेकिन बरकतउल्ला विश्वविधालय ने 2018 तक इस योजना में राशि जमा नहीं कराई ,तेरह साल तक एनपीएस की तेरहवीं करते रहे   विश्वविधालय की घोर आर्थिक अनियमितता के चलते  शिक्षकों और कर्मचारियों को न सिर्फ आर्थिक नुक्सान हो रहा है बल्कि सेवानिवृति के बाद भविष्य पर भी संकट मंडरा रहा है |

यह घोटाला इतना बड़ा है कि वर्ष 2005 में भर्ती कर्मचारियों के एनपीएस खाते में राशि अगस्त 2018 में भेजी गई. ,क्योंकि बैंक में खाते ही नहीं खोले गए थे | देश भर में और प्रदेश में नई पेंशन स्कीम में लाखों कर्मचारियों के खाते राष्ट्रीयकृत बैंकों में हैं ,लेकिन बरकतउल्ला विश्वविधालय ने 2018 में एक्सिस बैंक,होशंगाबाद रोड ,भोपाल में खाते खुलवाए,जबकि भारतीय स्टेट बैंक बरकतउल्ला विश्वविधालय के परिसर में स्थित है | स्टेट बैंक परिसर में होने के बाद भी प्राइवेट बैंक में खाते खुलवाना गंभीर आर्थिक अनियमितताओं की ओर संकेत करता है |

जुलाई 2018 तक ही सवा दो करोड़ की राशि

विश्वविधालय के लेखा शाखा ने आरटीआई की जानकारी मे माना है कि वर्ष 2005 से जुलाई 2018 तक दो करोंड़ सत्ताईस लाख सात सौ छियानवे रूपए एनपीएस के तहत राशि बनतीं है ,लेकिन यह राशि विश्वविधालय ने एनपीएस खातों में न भेजकर अन्य खाते में रखी गई है ? जबकि एनपीएस के नियमों के अनुसार प्रथम वेतन आहरण के साथ ही एनपीएस राशि खाते में जमा हो जाना चाहिए | इस आर्थिक अपराध में डीडीओ/लेखा अधिकारी के साथ ही विश्वविधालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शक के दायरे में हैं | विश्वविधालय में हर साल ऑडिट होता है ,बजट में लेखा जोखा होता है ,फिर भी ऐसी आर्थिक अनियमितता किसी बड़े आर्थिक अपराध के षड़यंत्र की और इशारा करता है | नए शिक्षक और कर्मचारियों पर विश्वविधालय के लेखा शाखा की अनियमितताओं की मार तो पड़ ही रही है ,सबसे ज्यादा इस घोटाले की मार पुराने लोगों पर पड़ेगी | उदाहरण के लिए फिजिकल एजुकेशन के सीनियर लेक्चरर आलोक मिश्रा मार्च 2007 में सेवा में आए | जुलाई 2018 तक उनके एनपीएस खाते में 1413368 रुपए जमा होने थे | एनपीएस खाते में ग्यारह फीसदी भी रिटर्न मिला है | हिसाब जोड़ लो तेरह साल बाद आज यह राशि कितनी होती | फिजिक्स की विभाग अध्यक्ष प्रो .साधना सिंह सितंबर 2007 में सेवा में आईं | उनके खाते में जुलाई 2018 तक 2173770 रुपए पर आज कितना रिटर्न मिलता ,आप खुद ही अंदाज लगा लो | लोगों को चिंता खाए जा रही है कि इस नुक्सान की भरपाई कैसे होगी ,क्योंकि विश्वविधालय के अधिकारी तो यह कह रहे हैं कि गलती किसी की भी हो ,हम ब्याज नहीं देंगे |

 

2005 के बाद सेवा में आए 106, खाते सिर्फ 66 के   

इस मामले में दाल में काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है | विश्वविधालय का स्थापना विभाग मान रहा है कि 2005 के बाद 99 शिक्षक ,कर्मचारियों की नियुक्ति हुई है ,लेकिन लेखा विभाग ने एनपीएस में सिर्फ 66 खाते खोले हैं | 33 शिक्षक और कर्मचारी किस योजना में हैं ,इसे लेकर लेखा विभाग की बोलती बंद है | इनमें सात शिक्षक भी हैं |

   यूजीसी गंभीर ,जांच के आदेश

व्हिसल ओवर महेंद्र सिंह की शिकायत को यूजीसी ने संज्ञान में लेकर बीयू के रजिस्ट्रार को 16 दिसंबर 2019 को एक कड़ा पत्र भेजा है | अंडर सेकेट्री शशि बाला तंवर के हस्ताक्षर से जारी पत्र क्रमांक F N0.52-3/2013(SU-I) में रजिस्ट्रार को अति शीघ्र जांच कर कार्रवाई के लिए कहा गया है | यूजीसी के पत्र के बाद अब अधिकारी इस जुगत में हैं कि इस लटकती तलवार से कैसे बचा जाए | वैसे इस एनपीएस की गाज कई अधिकारियों पर गिरना तय है |

 बूटा और कर्मचारी यूनियन भी चुप

वैसे तो बूटा के बारे में शिक्षकों की राय बहुत अच्छी नहीं है | बूटा के कर्ता-धर्ता करते कुछ नहीं | न तो शिक्षकों की समस्याएं ठीक से उठाते हैं और न ही इनका कोई रोल है | इतने बड़े मामले में बूटा के अलावा कर्मचारी यूनियन की चुप्पी भी लोगों को खल रही है | छोटी –छोटी राशि के लिए मरने –मारने पर उतारू कर्मचारी यूनियन इस मामले में चुप क्यों हैं ,यह भी लोगों को समझ में आ रहा है | सब चुप हैं ,लेकिन हम चुप नहीं हैं | लड़ाई आपकी है ,लेकिन बीड़ा उठाया है , madhyauday.com   ने | इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचा कर ही दम लेंगें | बहुत दस्तावेज आपके सहयोग से मिल गए हैं ,आपके पास भी अगर कुछ दस्तावेज या जानकारी है तो हम तक ([email protected])  पहुंचाइए | छोड़ना नहीं है किसी को |

कुलपति ,रजिस्ट्रार जवाब देने से कतराए

इस मामले में चर्चा के लिए जब कुलपति प्रो आर .जे .राव के मोबाइल पर बात की ,तो उन्होंने पूरी बात सुनने के बाद कहा कि अभी मीटिंग में हूँ ,आपसे बाद में बात करता हूँ ,जबकि रजिस्ट्रार बी .भारती ने फ़ोन नहीं उठाया | दोनों को whatapps और ईमेल से मामले की जानकारी भेजी ,लेकिन कोई जवाब नहीं मिला |

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