सुनीता विलियम्स हाल ही में अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन से वापस धरती पर लौटी हैं. इसके बाद से ही ISS चर्चा में बना हुआ है. यह 17,500 मील प्रति घंटे से यात्रा करता है. इसका मतलब है कि यह औसतन हर दिन 16 बार धरती के चक्कर काटता है. यानि हर 90 मिनट में धरती के चारों ओर घूमता है. इतना बड़ा ढांचा कभी भी अचानक अनियंत्रिक होकर धरती के वायुमंडल में जा सकता है. ऐसे में इसको लेकर खबर आ रही है कि NASA इस स्पेस स्टेशन को बंद करने जा रहा है। वास्तव में ISS काफी पुराना होता जा रहा है. इसे 1998 में बनाया गया था और तब से यह स्पेस इंडस्ट्री की तरक्की का प्रतीक रहा है. पृथ्वी की निचली ऑर्बिट में स्पेस रिसर्च के लिए यह स्पेस स्टेशन बहुत मायने रखता है, लेकिन इसको खत्म करने के लिए NASA कई हजार करोड़ रुपये खर्च करने के लिए तैयार है. पर ऐसा क्यों है?
ISS धरती से लगभग 400-415 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद एक 109 मीटर लंबे फुटबॉल के आकार का है. इसका वजन चार लाख किलोग्राम यानि करीब 80 अफ्रीकी हाथियों के बराबर है. ऐसे में अगर ये भारी भरकम स्पेस स्टेशन अचानक नाकाम हो जाए तो क्या होगा.
यही वजह है कि ऐसी खतरनाक स्थिति को रोकने के लिए NASA ने छह साल के बाद यानि 2031 में इस स्पेस स्टेशन को बंद करने का फैसला लिया है. वजह साफ है कि यह पुराना होता जा रहा है और अमेरिका, रूस, जापान और कनाडा जैसे कई यूरोपीय देशों ने संयुक्त रूप से इसका निर्माण किया था. 2021 में रूस ने इसके लिए एक चेतावनी जारी की थी और कहा था कि इस उपकरण के हार्डवेयर में ऐसी दिक्कतें आ सकती हैं, जिनको ठीक नहीं किया जा सकता है. इसके लिए इसको धरती की ऑर्बिट में धकेल दिया जाएगा, जिससे वायुमंडल में दोबारा घुसने पर इसमें बहुत ज्यादा गर्मी से इसके ज्यादातर हिस्से खुद जलकर खत्म हो जाएंगे और बचा हुआ हिस्सा प्रशांत महासागर के प्वाइंट नीमो में गिरेगा, जिससे यहां कोई नुकसान नहीं होगा▪️