जब न्यायपालिका और प्रशासन के शीर्ष अधिकारी भ्रष्ट हो जाते हैं, तो व्यवस्था का मूल उद्देश्य—न्याय और सुशासन—ध्वस्त हो जाता है। ऐसे हालात में, आम जनता का सिस्टम पर से विश्वास उठने लगता है, और लोकतंत्र कमजोर पड़ जाता है ! निर्दोष लोगों को सजा मिलती है और दोषी बचाए जाते हैं !
प्रशासनिक पक्षपात सरकारी नीतियां और योजनाएं जनता के भले के बजाय व्यक्तिगत लाभ के लिए चलाई जा रही हैं जो लोगों का असंतोष बढ़ा रहा है, जिससे समाज में अशांति और आंदोलन होते हैं !
*जब कानून लागू करने वाले ही भ्रष्ट होंगे, तो अपराधी प्रवृति के लोगों का बोलबाला होगा*
कठोर सजा और पारदर्शिता बहुत जरूरी है!भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून और उनका ईमानदारी से पालन होना चाहिए ! जागरूक नागरिक भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएं और ईमानदार नेताओं का समर्थन किया जाना चाहिए !
*भ्रष्टाचार की जांच करने वाली संस्थाओं को स्वतंत्र और शक्तिशाली बनाया जाए*
निष्पक्ष मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रष्टाचार को उजागर किया जाना चाहिए तब इनकी नींद खुलेगी!
*हर विभाग में घूसखोरी और भ्रष्टाचार फैला है*
भ्रष्टाचार और विशेष रूप से घूसखोरी किसी भी देश के प्रशासनिक और सामाजिक ताने-बाने के लिए एक गंभीर समस्या है ! जब हर विभाग में घूसखोरी व्याप्त हो जाती है, तो जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि न्याय व्यवस्था की क्या आवश्यकता है, जब न्याय भी पैसे से खरीदा जा सकता है ? हालांकि, इस सोच के पीछे निराशा तो है, लेकिन यह निष्कर्ष गलत होगा कि न्याय व्यवस्था की कोई जरूरत नहीं !
*न्यायपालिका और अन्य सरकारी विभागों की स्वतंत्र रूप से निगरानी होनी चाहिए*
न्याय व्यवस्था का मुख्य कार्य कानून का पालन सुनिश्चित करना, नागरिकों को उनके अधिकार दिलाना और समाज में संतुलन बनाए रखना है ! यदि न्याय प्रणाली न हो, तो समाज अराजकता की ओर बढ़ जाएगा, जहां केवल ताकतवर लोगों का राज होगा और कमजोर पूरी तरह शोषित होंगे !
यह सच है कि कई देशों में न्यायपालिका में भी भ्रष्टाचार की शिकायतें आती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पूरी व्यवस्था ही व्यर्थ है ! हर व्यवस्था में कुछ खामियां हो सकती हैं, लेकिन इसका समाधान यह नहीं कि हम पूरी प्रणाली को ही बेकार समझ लें। बल्कि, सुधार की दिशा में प्रयास करने चाहिए !
समाज का कोई भी व्यक्ति सुरक्षित महसूस नहीं करेगा ! इसलिए, घूसखोरी जैसी समस्याओं को समाप्त करने का उपाय यह नहीं है कि हम न्याय व्यवस्था को ही खत्म कर दें, बल्कि इसे और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना होगा!
यदि घूस लेने और देने वाले दोनों को कड़ी सजा मिले, तो घूसखोरी पर लगाम लग सकती है! सरकारी सेवाओं और न्याय प्रणाली में अधिक से अधिक डिजिटलीकरण किया जाए, जिससे घूसखोरी की गुंजाइश कम हो !
आम नागरिकों को उनके अधिकारों और कानूनों के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा सकें ! जरूरत इस बात की है कि हम अपनी न्याय प्रणाली को मजबूत करें, उसमें सुधार करें और घूसखोरी जैसी बुराइयों को जड़ से खत्म करें। यदि आम जनता, सरकार और प्रशासन मिलकर काम करें, तो एक निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जा सकती है, जहां न्याय पैसे से नहीं, बल्कि सच्चाई और कानून के आधार पर मिलेगा !!