क्या डेढ़ करोड़ खर्च करके जिंदा हो जाएगा मरा हुआ इंसान?

 

 

मौत को टालना असंभव है, लेकिन विदेशों में लोग इस उम्मीद से मरे हुए लोगों की बॉडी फ्रीज करवा रहे हैं, जिससे कि उनको भविष्य में जिंदा किया जा सकेगा. इसका नाम क्रायोनिक्स है।

 

*क्रायोनिक्स के जरिए 600 बॉडीज हैं फ्रीज*

 

वैज्ञानिकों का ऐसा मानना है कि मर चुके लोग दरअसल सिर्फ बेहोश हुए हैं और आने वाले वक्त में ऐसी तकनीक आ सकती है, जिससे इन लोगों को दोबारा से जिंदा किया जा सकेगा. ऐसे में क्रायोनिक्स तकनीक के जरिए इंसान के मृत शरीर को लंबे वक्त तक फ्रीज करना पड़ेगा. इसका चलन अब दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहा है. रिपोर्ट की मानें तो दुनियाभर में अभी तक करीब 600 लोगों ने क्रायोनिक्स के जरिए अपने प्रियजनों के शवों को फ्रीज करवाया है. इसका चलन रूस और अमेरिका में सबसे ज्यादा है. यहां करीब 300 लोगों ने शरीर को फ्रीज करवाया है।

 

*भविष्य में फिर जिंदा हो सकेंगे मरे हुए इंसान?*

 

ऑस्ट्रेलियाई कंपनी सदर्न क्रायोनिक्स ने कुछ वक्त पहले ऐसा दावा किया था कि वो इंसानों के मृत शरीर को -200 डिग्री सेल्सियस पर सुरक्षित रखेगी. अगर भविष्य में ऐसी तकनीक आई कि मृत इंसान को दोबारा जिंदा किया जा सके तो इन इंसानों को जिंदा किया जाएगा. हालांकि अमेरिका के साइंटिस्ट डॉ. आर. गिब्सन ने ऐसा स्पष्ट रूप से कहा है कि फिलहाल तो कोई ऐसी तकनीक नहीं बनी है, लेकिन इंसान इस उम्मीद में लोगों को फ्रीज करा रहे हैं कि भविष्य में शायद कोई ऐसी टेक्नोलॉजी आ जाए।

 

*कितना खर्च आता है?*

 

कुछ वक्त पहले सदर्न क्रायोनिक्स के फिलिप रोडेस ने इस बात की घोषणा की थी उन्होंने एक शख्स के शरीर को सुरक्षित क्रायोजेनिक विधि के जरिए रख दिया है. एल्कोर क्रायोनिक्स नाम की कंपनी की मानें तो पूरी डेड बॉडी को सुरक्षित रखने की लागत 200,000 डॉलर यानि करीब 1.60 करोड़ रुपये बताई जाती है. कंपनी का कहना है कि हर साल इसे सुरक्षित रखने के लिए खर्च 705 डॉलर यानि 52,874 रुपये है।

 

*कैसे रखा जाता है सुरक्षित*

 

रिपोर्ट्स की मानें तो इस विधि के लिए शव को पहले हॉस्पिटल के कोल्ड रूम में ले जाता जाता है और फिर उसे बर्फ में पैक किया जाता है. इसके बाद विशेषज्ञ उसकी कोशिकाओं को संरक्षित करने के लिए शरीर के जरिए उसमें एक तरल पदार्थ पंप करते हैं. फिर शव को ड्राई आइस में पैक किया जाता है, जिससे तापमान शून्य से घटकर 80 डिग्री सेल्सियस नीचे आ जाता है. अगले दिन जब उसकी बॉडी को क्रायोनिक्स सेंटर में पहुंचाया जाता है तो उसका तापमान घटकर 200 डिग्री सेल्सियस नीचे आ जाता है. इसके बाद डेड बॉडी को स्पेशल टैंक में सुरक्षित उल्टा लटकाकर रखा जाता है.

 

 

इस टैंक में नाइट्रोजन भरी होती है और ये वैक्यूम स्टोरेज पॉड के रूप में काम करता है. इसके लिए करीब 10-11 घंटे का वक्त लगता है. ऐसा दावा किया जा रहा है कि अगले 250 सालों में इस तरह की टेक्नोलॉजी आ जाएगी, जिससे इंसान को दोबारा जिंदा किया जा सकेगा।

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