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साइंटिफिक-एनालिसिस: विकसित भारत संकल्प यात्रा को समर्थन के लोकतांत्रिक तरिके

साइंटिफिक-एनालिसिस

विकसित भारत संकल्प यात्रा को समर्थन के लोकतांत्रिक तरिके

भारत यानि इंडिया और इंडिया यानि भारत की सरकार, संविधान के अनुसार जो देश की जनता की सरकार हैं, जो लोकतंत्र के सिद्धांत जनता के लिए, जनता के द्वारा, जनता की चुनी के आधार पर जनता से टैक्स के रूप में हर एक आदमी से दूध पीते बच्चे तक से वसूले धन से करोडों-अरबों रूपये खर्च करके “विकसित भारत संकल्प यात्रा” निकालने जा रही हैं | जो 20 नवम्बर से 25 जनवरी तक 2.70 लाख ग्राम पंचायतों में सभी 765 जिलों के सीनियर अधिकारियों के रथ प्रभारी के रूप में चलेगी |

सताधीशों ने पहली बार अमृतकाल में जाइंट सेकेटरी, डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर स्तर के अधिकारियों को आलीशान, राजशी ठाठ बाठ वाले दफ्तरों से बाहर निकाल सड़कों पर भेजने का प्लान बनाया हैं ताकि वो अपना रिपोर्ट कार्ड स्वयं देख सके व समझ सके की उनकी बनाई योजनाओं, कानूनों, काम करने के रवैये से जनता उन्हें चुनते समय कितना आदर, सत्कार, स्नेह के साथ तिरस्कार, अपमान, क्षेत्र-विशेष में घुसने न देकर भगाती हैं व कभी-कभी तो मारपीट गाली-गलौच के साथ कपडे फाड़ कर ईज्जत व पगडी को उछाल देती हैं | जमीनी धरातल की सच्चाई को अधिकारी स्वयं अनुभव करेंगे तभी विकसित भारत का संकल्प ले पायेंगे और उसकी सही, समयबद्ध योजना बना पायेंगे |

जनप्रतिनिधियों का एक हिस्सा जो सत्ता में संवैधानिक पदों पर आसीन होकर सत्तापक्ष कहलाता हैं वो प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मीशन, पीएम किसान फसल बीमा योजना, पोषण अभियान, उज्जवला योजना और पीएम गरीब कल्याण अन्य योजना का लाभ देने के रूप में सहयोग करेगा | आपको यहा अवगत करा दे कि पीएम का तात्पर्य प्रधानमंत्री हैं न कि पोस्टमार्टम, पार्लियामेंट जैसे अनगिनत शाब्दार्थ हैं | आजकल अंग्रेजी शब्दों का अलग-अलग अर्थ अपनी मर्जी से गढ़, स्वार्थ, लालच, सत्ता लौलूपता, व्यक्तिवाद, चाटुकारिता वश अज्ञानता एवं संकुचित मानसिकता का भौंडा प्रदर्शन कर जनता को बांट लोकतंत्र को बर्बाद करा जा रहा हैं व हेट-स्पीच को प्रेरित कर न्यायपालिका के ऊपर जबरदस्ती का बोझ लाद लेटलटीफी के नाम पर जनता को अंधेरे में धकेला जा रहा हैं |

जनप्रतिनिधियों का दूसरा समूह जो सत्ता की कुर्सी पर नहीं बैठ पाता वो विपक्ष कहलाता हैं | इन्हें सिविल सर्वेंट से पालिटिकल प्रोपेगंडा कराने का आरोप सर्व सुविधा युक्त सरकारी व निजी वातानुकुलित, नौकरों-चाकरों वाले घरों में बैठ लगाने से बचना चाहिए व सड़कों पर उतर अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन कर इस योजना का सहयोग करना चाहिए | इन्हें हर चौराये, नुक्कड़ों पर पहुंचकर बडे़-बडें स्वागत द्वार या धन की ज्यादा बर्बादी न करते हुए छोटे-छोट बैनरों व हाथ में तख्ती लेकर इन सरकारी कर्मचारियों पर फूलों की बारिश कर मालार्यापण करना चाहिए व पानी, नाश्ता, शरबत अपने जनप्रतिनिधि कोष के पैसे से कराना चाहिए व निजी पैसे से दूरी बना रिश्वत के कलंक से बचना चाहिए |

यदि अधिकारी और कर्मचारी लोग भूखे, प्यासे रहेंगे तो घूसखोरी, भ्रष्टाचार, घोटाले, भाई-भतीजावाद करेंगे व प्राइवेट देशी और विदेशी कम्पनीयों के पक्ष में नियम कायदे, कानून व पालिसी बनायेंगे | आपके साइंटिफिक-एनालिसिस ने स्वतंत्रता दिवस पर बधाई के संदेश में भारत की दुनिया में पुरी वस्तुस्थिति एक पेज में दर्शाही थी | इसे स्वागत द्वार व बैनर पर लगाने के साथ-साथ पर्चों के रूप में भी बांटना चाहिए ताकि हर छोटे से छोटे कर्मचारी को संकल्प लेते समय समझ आये कि हम दुनिया में कहां खड़े है और भारत को विकसित बनाने के लिए उन्हें कौन-कौन से क्षेत्र में क्या-कुछ करना होगा |

भारत के प्रधानमंत्री ने छ महिने में सभी लोगों तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाने का जो लक्ष्य तय किया हैं और जनता का समय, पैसा व सरकारी विभागों के धक्के खाने से बचाते हुए अधिकारीयों को हर सड़क-सड़क, कस्बें, ढाणी तक पहुंचानें का जो अनोखा काम करा उसका लाभ लेते हुए हर नागरिक को अपनी समस्याओं व सरकारी विभागों में अटके पड़े, अदालतों में लटके पड़े मामलों के कागज लेकर सडक पर लाईन में खड़े होकर इन अधिकारियों को देना चाहिए ताकि इन समस्याओं के शीघ्र खत्म होते ही भारत या इंडिया विकसित बन सके | जिन सरकारी कर्मचारियों की विभागीय समस्याएं हैं, उन्हें तनख्वाह समय पर नहीं मील रही, विभागों में सुविधाएं नही है वो काले कपड़े, रिबन, टोपी कुछ भी सामर्थ्य योग्य पहनकर यात्रा में शामिल होना चाहिए | यदि कुछ न कर सके तो सिर मुंडवाकर आये ताकि प्रधानमंत्री ड्रोन से सच्चाई को देख सके | लाखों ड्रोन गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति के सामने बीटिंग रिट्रीट में मनमौहक कर्तब दिखाने से पहले खाली होंगे | देश के समर्थ नागरिकों को पहले किसानों के पैदल मार्च में करे समर्थन की तरह दिल बडा रखना पड़ेगा क्योंकि इतनी बड़ी यात्रा में कई कर्मचारीयों के जुते-चप्पल टुट सकते हैं, एडियां पैरों में छाले पड़ सकते हैं, मौसमी बीमारियों से ग्रसित हो सकते हैं और कही कर्मचारीयों के पास रहने, खाने-पीने व पहने के कपडो का अभाव हो |

मैन मीडिया और सोशियल मीडिया का कोई संवैधानिक चेहरा व जवाबदेही न होने के बाद भी अपने राष्ट्रधर्म को निभाते हुए अटके/लटके/फंसे/दबे मामलों को अधिकता में दिखाकर कर्मचारीयों के संज्ञान में लाना चाहिए ताकि वो तुरन्त उन्हें निपटाकर भारत को विकसित करने के संकल्प को समय पर पूरा कर सके | इस संकल्प यात्रा की अच्छी से वीडियो रिकोर्डिंग करके एक-एक कर्मचारी पर खोजी पत्रकारिता की रिपोर्ट बतानी चाहिए कि इनमे से कौन आस्तीन का सांप, राष्ट्रद्रोही, कामचोर स्वार्थी हैं जो सरकारी योजनाओं से जुड़ी फाइलों पर कुंडली मार कर वर्षों से बैठा हैं या घूस खाने के चक्कर में जनता को परेशान कर रहा हैं और भारत को विकसित बनने से रोकने का कानूनी जुर्म, राष्ट्रद्रोह एवं अधर्म कर रहा हैं | पैदल चलने भर व यात्राए निकालकर शौरगुल से भारत नहीं जुडेगा | लोगों की समस्याओं, तकलीफ, परेशानी, मजबूरी को एक कान से सून दूसरे कान से निकालने की बजाए उन्हें अधिकारियों की संकल्प यात्रा तक पहुंचाना चाहिए ताकि भारत सरकार ने जो अवसर दिया उसका फायदा देश की जनता को मिले व विकसित होने का सपना उनको जीवन में मूर्तरूप में दिखने के गौरव के साथ अच्छे खुशहाल दिन लाये |

शैलेन्द्र कुमार बिराणी
युवा वैज्ञानिक

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