शरीर में ही कोरोना के इलाज की संभावना, आ सकती है वैक्सीन: शोध

 

जानलेवा और बेहद खतरनाक कोरोना वायरस पूरी दुनिया में अब तक 7 हजार से भी ज्यादा लोगों की जान ले चुका है. सैकड़ों देश इसकी काट यानी वैक्सीन ढूंढने में लगे हुए हैं और इसके लिए कई प्रयोग और शोध भी चल रहे हैं. इसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में एक अध्ययन में सामने आया कि 47 वर्षीय महिला जो कि हल्के तौर पर कोरोनो वायरस से पीड़ित थी उसके शरीर में एंटीबॉडी पैदा हुआ जो कोरोना संक्रमण से लड़ा और लगभग 10 दिनों में बिना किसी दवा के महिला ठीक हो गई.

इससे शोध करने वाले डॉक्टरों को पता चला है कि एक मरीज के शरीर में मौजूद प्रतिरक्षा प्रणाली एंटीबॉडी का उत्पादन कर सकती है जो कोरोनो वायरस संक्रमण के हल्के असर से लड़ती है. विशेषज्ञों के मुताबिक इस अध्ययन से कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन (टीका) के विकास में अहम हो सकता है. पीटर डोहर्टी इंस्टीट्यूट फॉर इंफेक्शन एंड इम्यूनिटी के शोधकर्ताओं द्वारा मंगलवार को नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित किए गए इस शोध लेख में चार अलग-अलग समय बिंदुओं पर परीक्षण किए गए रक्त के नमूनों पर आधारित था, जो यह बता रहा था कि किसी मरीज की प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस के प्रति कैसे प्रतिक्रिया देती है.

इस शोध के दौरान जिस मरीज को चुना गया था वो संक्रमण से बहुत कम प्रभावित था और वो कोई भी नहीं करती थी. उसके शरीर से पानी की कमी को दूर करने के लिए उसे नियमित अंतराल पर तरल पदार्थ दिए गए लेकिन संक्रमण का इलाज करने के लिए उसे एंटीबायोटिक्स, स्टेरॉयड या एंटीवायरल कोई दवा नहीं दी गई. वायरस मुख्य रूप से उसके फेफड़ों को प्रभावित कर रहे थे. जिस महिला पर यह शोध किया गया उसने चीन में वुहान से यात्रा की थी, जो वैश्विक महामारी का केंद्र था. शोध को लेकर प्रोफेसर कैथरीन केडज़ियर्स ने कहा, “हमने देखा कि भले ही COVID-19 एक नए वायरस के कारण होता है. स्वस्थ व्यक्ति में, विभिन्न सेल प्रकारों में एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया क्लिनिकल रिकवरी से जुड़ी हुई थी, जैसा कि हम इन्फ्लूएंजा में देखते हैं,”.

उन्होंने कहा कि “ COVID-19 (कोरोना वायरस) के मामले में यह एक अविश्वसनीय कदम है कि आखिर वो शरीर पर किस तरह से प्रभाव डालती है और किस पर सबसे पहला हमला होता है. लोग हमारे तरीकों का उपयोग बड़े COVID-19 समूहों में प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं को समझने के लिए कर सकते हैं, और यह भी समझ सकते हैं कि इससे बुरी तरह पीड़ित लोगों में किस चीज की कमी की वजह से ऐसा हुआ है.

अध्ययन में चार प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिकाओं की उपस्थिति पाई गई जब रोगी बीमार था तो दो प्रकार के एंटीबॉडी के उत्पादन को प्रेरित करता था. संक्रमित होने के बाद उसे 10 दिनों के लिए घर से अलग कर दिया गया, और उसके लक्षण 13 फरवरी को पूरी तरह से गायब हो गए. एंटीबॉडीज उसके खून में 7 वें दिन से 20 दिन तक रहे. भारत में कोरोना के मामले में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 153 हो गई है. इनमें 25 विदेशी हैं. कोरोना की वजह से देश में अब तक तीन लोगों की मौत हो गई है.

महाराष्ट्र में कोरोना के सबसे ज्यादा 42 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं. इस बीच कोलकाता में पहला संक्रमित मरीज मिला है. यह शख्स लंदन से भारत आया था. कोरोना से निपटने के लिए सरकारें तीन स्तर पर काम कर रही है. पहला कोरोना से पीड़ित लोगों की पहचान करना. दूसरा संक्रमित शख्स और उनके संपर्क में आए लोगों को आईसोलेशन वार्ड में डालना और तीसरा लोगों को एक जगह इकट्ठा नहीं होने देना.

 

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