माशिमं अध्यक्ष जुलानिया को हटाकर ओएसडी बनाया

 

 

स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) इंदर सिंह परमार से अनबन और विभाग की प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी की पांच चिटि्ठयों का जवाब नहीं देने की वजह से राज्य सरकार ने शुक्रवार को माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) के अध्यक्ष व 1985 बैच के सीनियर आईएएस अधिकारी राधेश्याम जुलानिया को हटाकर मंत्रालय में ओएसडी बना दिया। साथ ही ओएसडी के पद को राजस्व मंडल अध्यक्ष के समकक्ष घोषित किया गया। बताया जा रहा है कि ये पांच पत्र परीक्षा की तारीखों व तैयारियों को लेकर लिखे गए थे।

जुलानिया की जगह रश्मि अरुण शमी (1994 बैच) को ही माशिमं अध्यक्ष पद का प्रभार दे दिया गया है। इधर, भिंड जिले में हो रहे रेत के अवैध उत्खनन के मामले में भिंड कलेक्टर वीरेंद्र सिंह रावत को हटा दिया गया है। उन्हें नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण इंदौर में आयुक्त पदस्थ किया गया है। उनकी जगह स्वास्थ्य विभाग में संचालक सतीश कुमार एस को भिंड कलेक्टर बनाया गया है। जुलानिया को ओएसडी बनाने से साफ है कि रिटायरमेंट तक उनके पास अब कोई काम नहीं रहेगा। वे सितंबर 2021 में सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

कई दिनों से जुलानियां और रश्मि में चल रही थी खींचतान, मंत्री भी थे नाराज
परीक्षा कराने और समय तय करने के लिए रश्मि अरुण शमी ने माशिमं अध्यक्ष रहे जुलानिया को पहला पत्र 30 दिसंबर 2020 को लिखा। इसका जवाब नहीं मिला तो फिर रश्मि ने 8 जनवरी 2021, 15 जनवरी, 23 जनवरी और फिर 18 फरवरी को पत्र लिखा। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि इनमें से एक का भी जवाब माशिमं से नहीं आया। इस वजह से परीक्षा के न पेपर बने और न ही कोई ब्लू प्रिंट बन पाया। ताजा स्थितियों में सीबीएसई एग्जाम के साथ माशिमं की परीक्षा के टकराने की स्थितियां बन गईं।

जुलानिया मई में परीक्षा कराने की तैयारी कर रहे थे, जबकि शासन इससे पहले। जब इस बारे में स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) इंदर सिंह परमार ने जुलानिया से पूछा तो उन्होंने यह कह दिया कि उनका (मंत्री) इससे कोई लेना-देना नहीं है। परीक्षा केंद्रों को पिछले साल की तुलना में घटा दिया गया, जबकि कोरोना के समय में इसे बढ़ाना चाहिए था। ताकि बच्चों को दूर न जाना पड़े।

परीक्षा का पैटर्न बदलना चाहते थे
सूत्रों का यह भी कहना है कि जुलानिया ऑब्जेक्टिव टाइप पैटर्न लाना चाहते थे। इससे ओएमआर शीट से परीक्षा होती। यू-ट्यूब चैनल से पढ़ाने की तैयारी थी। निजी स्कूलों के कुछ लोग ज्ञापन लेकर माशिमं अध्यक्ष से मिले थे कि पैटर्न अभी न बदला जाए। जुलानिया ने इस ज्ञापन को उनके सामने ही फाड़ दिया। उन्होंने सालों से चली आ रही प्राइवेट काउंसलिंग की व्यवस्था को भी बंद करके सरकारी काउंसलिंग का सिस्टम बना दिया था। साथ ही कहा कि बोर्ड में बैठे लोग ही काउंसलिंग करेंगे। इससे शासन नाखुश था। क्योंकि काउंसलिंग की सालों से चली आ रही व्यवस्था बंद हो गई थी। साथ ही नए पैटर्न के लिए फिलहाल इस शिक्षण सत्र में वक्त नहीं था।

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