सत्य, प्रेम व करुणा का होना जरूरी, -मोरारी बापू

 

 

 

 

 

भोपाल। लाल परेड स्थित मोतीलाल नेहरु स्टेडियम में बुधवार को भास्कर परिवार द्व‌ारा आयोजित राम कथा के अंतिम दिन संत मोरारी बापू की मुखर वाणी का जादू भक्तों के सिर चढ़ कर बोला। हालांकि जब बापू विदा होने लगे, तो जनमानस भावुक हो उठा। यह देखकर बापू की आंखें भी नम हो गईँ।
बापू ने दोपहर ठीक 12 बजे जैसे ही राम लला के जन्म की उद्घोषणा करते हुए भये प्रकट कृपाला दीन दयाल स्तुति का गान शुरू किया, पंडाल में खुशियां छा गईं। करतल ध्वनि और संगीतमय स्तुति की मधुर स्वर लहरियों ने वातावरण को सरस और भक्तिमय बना दिया। भगवान के जन्म की खुशी में कोई जयघोष कर रहा था, तो किसी के पांव थिरक रहे थे।इस दौरान बापू ने भाव विभोर राम रसिक श्रोताओं से कहा कि राम कथा मनुष्य बनने का फार्मूला है, इसे आत्मसात कर लो, जीवन सफल और सार्थक हो जाएगा। कथा के अंतिम दिन उन्होंने सभी से कहा कि सभी खुश रहना, अलविदा,राम कृपा से हम फिर मिलेंगे..l
यज्ञ, दान व तप जरूर करो
संत बापू ने कहा कि मनुष्य को चाहिए कि वह यज्ञ, दान व तप जरूर करे। उन्होंने इन तीनों की महिमा बताई। उन्होंने इसके आध्यातिमक व सांकेतिक पहलू पर प्रकाश डाला। यज्ञ से बुद्धि शुद्ध होती है। यज्ञ का अर्थ है कि आपके विचार सकारात्मक हों, आप भूखे को खाना खिलाएं, गरीब बालक की स्कूल फीस जमा करा दें, सदैव सत्य बोलें। यह भी एक प्रकार का यज्ञ है। दान भी करें। दान परोपकार के रूप में भी होता है। लोगों से मीठा बोलें, हर संभव मदद के लिए तत्पर रहें। अपने ही नहीं दूसरों के सत्य को भी कबूल करें। सत्य को सत्य रहने दें, उसे पंगु न बनाएं। आप सच्चे हैं, पर कोई आपकी बात नहीं मानता को क्रोध न करें। सहनशीलता बनाए रखें। यह भी तप है।
सत्य, प्रेम व करुणा का होना जरूरी
उन्होंने कहा कि परमात्मा की निकटता पाने के लिए हमारे भीतर सत्य, प्रेम व करूणा का भाव होना जरूरी है। राम नाम का सहारा लो। इन तीनों का आपके जीवन में जरूर प्रवेश होगा। राम परम तत्व हैं। राम से ही कई विष्णु प्रकट होते हैं। उन्होंने कहा कि छूआछूत व भेदभाव कभी मत करना। सभी मनुष्य समान हैं। राम भीलनी शबरी के घर गए और अहिल्या को भी तारा।

बापू ने युवाओं को सीख दी कि वे बुजुर्गों का सम्मान करें। उनसे उनके अनुभवों का लाभ लें। पढ़ें पर भारतीय संस्कृति व संस्कारों को भी अपनाएं। सत्य को अपना स्वभाव बना लें। दूसरों को सुधारने की अपेक्षा स्वयं सुधरने का प्रयास करें।

प्रिय बापू से बिछुड़ने का दु:ख, आंखों से झलका
नौ दिवसीय राम कथा के समापन दिवस पर रामनवमीं की खुशियां मना रहे लोगों के चेहरों पर प्रसन्नता झलक रही थी। वह पल भी आया जब नौ दिनों तक रोज कथा सुनने आ रहे बहुत से लोगों की आंखें नम हो गईं, जब बापू ने कथा समापन की घोषणा की। इन लोगों को अपने प्रिय संत बापू से बिछुड़ने का दु:ख हो रहा था। कई लोग चर्चा कर रहे थे कि बापू 12 साल बाद कथा करने आए, अब पता नहीं कब भोपाल आएंगे..!
,
Shares