शहरी साख सहकारी संस्थाओं में राशि जमा करने के संबंध में सदस्यों को किया गया सचेत

 

इंदौर 18 जनवरी, 2023,
मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 के अंतर्गत प्रदेश / संभाग / जिला / नगर स्तर पर लगभग 3300 शहरी साख सहकारी संस्थाएं सहकारिता एवं पंजीयत विभाग द्वारा पंजीकृत हैं, जो अपने सदस्यों से अमानत राशि प्राप्त कर अपने सदस्यों की आवश्यकता के पंजीकृत उपविधियों के उददेश्यों के अनुसार ऋण प्रदान करती है। प्राय: यह देखा जा रहा है कि शहरी साख सहकारी संस्थाओं के नाम पर ठगी करने वाले कई गिरोह सक्रिय हो गए हैं, जो शहरी साख सहकारी संस्थाओं के पंजीयन हेतु लगातार विभिन्न कार्यालयों से संपर्क करने के लिए प्रयासरत है। पूर्व से पंजीकृत शहरी साख संस्थाओं में सदस्य को लोक लुभावन योजनाओं का प्रलोभन देकर सीधे अथवा कलेक्शन एजेन्ट के माध्यम से सदस्यों से जमा राशियां प्राप्त कर उन राशियों के परिपक्व होने पर उन जमाकर्ता सदस्यों को वापस नहीं की जा रही है, यह स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।
शहरी साख सहकारी संस्थाओं द्वारा गैर सदस्यों से आर्थिक समव्यवहार करना बैंकिंग श्रेणी में आता हैं जिस हेतु इनके पास भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी बैंकिंग लायसेंस नहीं होता है अर्थात शहरी साख संस्थाओं द्वारा बैंकिंग कार्य करना भी बैंकिंग रेग्यूलेशन एक्ट का उल्लंघन होकर वर्जित होने के साथ साथ आपराधिक एवं धोखाधडी पूर्ण कृत्य हैं। ऐसी संस्थाओं पर सतत कार्यवाही किया जाना आवश्यक है।
उपरोक्तानुसार नियम विरुद्ध कार्य करने वाली शहरी साख संस्थाओं के संबंध में यह धारणा है कि यह संस्थाएं पंजीयक के प्रशासकीय नियंत्रण में कार्य करती है, जबकि यह शहरी साख संस्थाएँ अपने सदस्यों के प्रति अर्थात आमसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। इन संस्थाओं के दिन-प्रतिदिन के व्यवसाय यथा जमा प्राप्त करना, ऋण प्रदान करना इत्यादि में पंजीयक का कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होता है, अपितु संस्था संचालक मंडल द्वारा सदस्यों के हित में संस्थाओं की पंजीकृत उपविधियों एवं संस्थाओं के संचालन हेतु बनायी गयी नीतियों के अनुरूप कार्य किया जाना प्रावधानित है। शहरी साख संस्थाओं के समस्त सदस्यों/जमाकर्ताओं / आम जनता को शहरी साख सहकारी संस्थाओं (शहरी नागरिक बैंकों एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों को छोड़कर) के संबंध में यह स्पष्ट किया गया है कि यह शहरी साख सहकारी सस्थाऐं अपने सदस्यों के प्रति जिम्मेदार होती है एवं दैनिक रूप से पंजीयक के प्रशासकीय नियंत्रण में नहीं होती है। इन संस्थाओं में राशि जमा करने की रिस्क सदस्यों की रहेगी।

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