लोग साधु-सन्तों को भीख नहीं देते, पीएम मोदी ने मुझे उप्र. सौंप दिया: योगी

लखनऊ, 29 मार्च । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुझ जैसे योगी पर लोग तमाम प्रकार की बातें करते हैं, कह रहे हैं, और मैं देखता हूं कि लोग साधु-सन्तों को भीख तक नहीं देते, लेकिन मेरी पार्टी ने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुझे उत्तर प्रदेश सौंप दिया। उन्होंने कहा कि जब पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अचानक मुझे उत्तर प्रद्रेश जाने को कहा तो मैंने जवाब दिया कि मैं वहीं से तो आ रहा हूं। तब उन्होंने हंसते हुए कहा कि आपको वहां का मुख्यमंत्री बनाया जा रहा है। योगी ने कहा कि तब मैं हैरान था क्योंकि जब मुझसे सीएम बनने के लिए कहा गया तो मेरे पास एक जोड़ी कपड़े थे। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहूं। अगर मना करता हूं तो लोग कहेंगे कि पलायन कर गए। यूपी के भ्रष्टाचार से, क्राइम से, कुशासन से, चुनौतियों से डरकर पीछे हट गए तो मैंने सोचा चलो कोई बात नहीं, हम तो वैसे भी योगी हैं, कपड़ों का क्या है। प्रधानमंत्री मोदी से सीखी सकारात्मक सोच मुख्यमंत्री यहां इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में पतंजलि योग पीठ एवं भारत स्वाभिमान (न्यास) सहित अन्य संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय प्रथम उत्तर प्रदेश योग महोत्सव में बोल रहे थे। उन्होंने इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली की जमकर तारीफ की और कहा कि मैने उनसे सकारात्मक सोच के बारे में सीखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सकारात्मक सोच नहीं होती तो आज भारत दुनिया की उभरती हुई महाशक्ति नहीं होती। उन्होंने कहा कि 2004 से लेकर 2014 तक देश की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गयी थी, आम जनता का विश्वास टूटता हुआ दिखायी दे रहा था। देश के अन्दर अराजकता की स्थिति उभर रही थी। अविश्वास का वातारण पैदा हो गया था। जब 2014 में जनता ने परिवर्तन करके नरेन्द्र मोदी के हाथांं सत्ता सौंपी, तो उन्होंने अविश्वास के वातावरण से उभारने का काम किया। सीएम योगी ने कहा कि हम सभी सांसदों के साथ अपने पहले भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा था कि हम चुनाव जीत चुके हैं, सत्ता हमारे पास हैं। अब हमारे पास नकारत्मक सोच नहीं होना चाहिए। सकारात्मक सोचे। इसी का परिणाम है कि भारत दुनिया में सशक्त ताकत के रूप में बढ़ रहा है। नोटबन्दी की घटना ने साबित किया कि लोकतंत्र में नोटबन्दी जैसा कदम भी उठाया जा सकता है। यूपी की बीमारियों का करूंगा इलाज उन्होंने कहा कि मैं यूपी की बीमारियों का इलाज करूंगा। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिस वक्त मुझे सीएम बनने के लिए कहा गया था, उस समय मेरे पास सिर्फ एक जोड़ी ही कपड़े थे। अमित शाह ने अचानक सीएम बनने के लिए कह दिया। बड़े निर्णय लेने में भी नहीं हिचकेंगे सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार इसी सकारात्मक सोच के साथ काम कर रही है। सकारात्मक ऊर्जा को आगे बढ़ाते हुए एक सप्ताह हो चुका है। कुछ छोटे छोटे निर्णय लिए गए हैं, लेकिन प्रदेश की 22 करोड़ जनता के हित में हम बड़े निर्णय लेने में भी नहीं हिचकेंगे, यह तय कर चुके है। उन्होंने कहा कि मैं यहां रहा हूं। सड़क से लेकर संसद की यात्रा की है। इसलिए मुझे यहां की सारी बीमारियों के बारे में पता है। उसके इलाज का इंतजाम कर रहा हूं। उन्होंने पूर्ववर्ती गैर भाजपा सरकारों पर सवाल उठाते हुए कहा 70 सालों में हम एक ढंग का विश्वविद्यालय नहीं बना पाए। दुनिया के टॉप विश्वविद्यालयों में भारत का एक भी नहीं है। सीएम योगी ने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि उनकी सकारात्मक सोच नहीं था, उन्होंने संकीर्ण दायरे को अपना कार्यक्षेत्र बना लिया था। हम आगे नहीं बढ़ना चाहते थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार भारत की पहचान को मान्यता दिलाने का प्रयास हुआ। 21 जून को योग दिवस मनाया गया। 21 जून को सूर्य की सबसे की सबसे तीखी रोशनी पृथ्वी पर पड़ती है। इस दिन इसे मनाने का मकसद था कि हम उस ऊर्जा को संचित कर सकें। पहली बार 172 देश और दूसरे वर्ष 192 देशों ने इसे मनाया। उन्होंने इस मौके पर योगगुरू बाबा रामदेव की भी तारीफ की और कहा कि जो योग लोग भूल चुके थे, बाबा रामदेव ने उसे घर-घर, जन-जन पहुंचाने का काम किया। सूर्य नमस्कार और नमाज एक जैसे सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2014 से पहले योग को साम्प्रदायिक माना जाता था। 2014 से पहले अगर केन्द्र सरकार के पास आज के कार्यक्रम जैसा प्रस्ताव आता तो वह इसे साम्प्रदायिक बोलते। उन्होंने कहा कि इसके तहत हम सूर्य नमस्कार करते हैं। वहीं हमारी प्राणायाम की क्रियाएं मुस्लिम भक्त जो नमाज पढ़ते हैं, उससे मिलती हैं। दोनों बिल्कुल एक जैसी हैं लेकिन उन्हें जोड़ने का प्रयास नहीं किया गया क्योंकि जो लोग सत्ता में थे उन्हें योग की नहीं, भोग की आदत थी। व्यायाम फिटनेस देता है लेकिन एक समय के बाद शारीरिक और फिर मानसिक रूप से कमजोर करेगा, लेकिन योग करने वाला व्यक्ति प्रारम्भ से अन्तिम समय तक स्वस्थ रहता है। केवल प्राणायाम को योग न मानें, यह किसी जाति, उम्र, लिंग का मोहताज नहीं होता। योग की तमाम क्रियाएं बैठे-बैठे, चलते-चलते ही की जा सकती हैं।

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