मोदी मैजिक ने ध्वस्त कर दिए सारे रिकार्ड

लखनऊ, 11 मार्च । उत्तर प्रदेश में मोदी मैजिक ने विधानसभा के चुनावी इतिहास में अब तक के सारे रिकार्ड को ध्वस्त कर दिया। आजादी के बाद शायद यह पहला चुनाव है जिसमें तीन चैथाई बहुमत के साथ भाजपा ने विजय श्री हासिल की है। वर्ष 1991 में राम लहर के दौरान भी भाजपा यहां तीन शतक नहीं लगा पाई थी। सत्रहवीं विधानसभा के लिए आये चुनावी नतीजों में भाजपा ने 403 में से 325 सीटों पर कब्जा कर लिया है। यह आंकड़ा तीन चैथाई बहुमत (302) से भी अधिक है। इस चुनाव में भाजपा ने सपा-कांग्रेस गठबंधन (54 सीटें) से छह गुना और बसपा (19 सीटें) से 17 गुना अधिक सीटें हथियाई है। पार्टी के इस प्रचण्ड बहुमत पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि आजादी के बाद यह सबसे बड़ी जीत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस जीत का पूरा श्रेय देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि मोदी आजादी के बाद सबसे बड़े नेता हैं। दरअसल आजादी के बाद शायद यह पहली बार हुआ है जब किसी दल को विघटित उत्तर प्रदेश में 324 सीटें मिली हों। हालांकि वर्ष 1951-52 में राज्य में हुए प्रथम विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस को 388 सीटें मिली थीं लेकिन उस समय उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड एक संयुक्त राज्य था और विधानसभा की कुल 430 सीटें थीं। इसी तरह 1977 में जेपी आंदोलन के दौरान जनता पार्टी ने 352 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद वर्ष 1980 के चुनाव में कांग्रेस ने 300 का आकड़ा पार किया था। उस समय जनता पार्टी की सरकार के खिलाफ जनविरोध के चलते कांग्रेस को 309 सीटें मिली थीं। लेकिन इन दोनों चुनावों के समय भी उत्तर प्रदेश का बंटवारा नहीं हुआ था। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश का बंटवारा वर्ष 2000 में हुआ। इसके बाद यहां विधानसभा की कुल 403 सीटें बचीं और नये राज्य उत्तराखण्ड में 70 सीटों के लिए अलग से चुनाव होने लगा। इस तरह तीन चुनावों को छोड़कर उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनावी इतिहास में अब तक कोई भी दल तीन सौ का आकड़ा नहीं पार कर सका है। वर्ष 1991 में राम लहर के दौरान भी भाजपा केवल 221 सीट ही जीत पाई थी। इस लिहाज से देखा जाय तो इस बार के चुनाव में मोदी मैजिक के चलते भाजपा ने सारे रिकार्ड ध्वस्त कर दिये। मोदी के जादू का आलम यह रहा कि सपा से गठबंधन के बावजूद कांग्रेस अपने गढ़ रायबरेली और अमेठी को भी बचाने में नाकामयाब रही। भाजपा ने पहली बार कांग्रेस के इस किले की 10 में से छह सीटों पर कब्जा कर लिया। अयोध्या, काशी और मथुरा से तो पूरा विपक्ष ही साफ सा हो गया। भाजपा ने इस चुनाव में जीत का पहला खाता देवबंद से खोला जो इस्लामिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। इस चुनाव में भाजपा को करीब 42 प्रतिशत मत मिले हैं। वर्ष 2014 के लोक सभा चुनाव में भी भाजपा ने 42 प्रतिशत वोट बटोरा था। उस समय मोदी की सुनामी में बड़े-बड़े सुरमा बह गये थे। कई दलों के खाते तक नहीं खुल पाये थे। पार्टी की इस जीत को लेकर भाजपाईयों में गजब का उत्साह है। वे भी इस प्रचण्ड बहुमत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जादू का परिणाम मान रहे हैं। दरअसल भाजपा ने इस चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं घोषित किया था। पार्टी ने नरेंद्र मोदी के नाम पर ही यह चुनाव लड़ा और मोदी ने भी ताबड़तोड़ रैलियां कर पूरे प्रदेश को मथ डाला था। अंतिम दौर के चुनाव में तो उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में तीन दिन का लगातार कार्यक्रम रखा था। आजादी के बाद अब तक हुए विधानसभा के चुनाव एक नजर में वर्ष कुल सीटें सर्वाधिक सीट प्राप्त दल 1951-52 430 कांग्रेस – 388 सीटें 1957 430 कांग्रेस – 286 सीटें 1962 430 कांग्रेस – 249 सीटें 1967 425 कांग्रेस – 199 सीटें 1969 425 कांग्रेस – 211 सीटें 1974 425 कांग्रेस – 215 सीटें 1977 425 जनता पार्टी- 352 सीटें 1980 425 कांग्रेस – 309 सीटें 1985 425 कांग्रेस – 269 सीटें 1989 425 जनता दल – 208 सीटें 1991 425 भाजपा – 221 सीटें 1993 425 भाजपा – 177 सीटें 1996 425 भाजपा -174 सीटें 2002 403 सपा – 143 सीटें 2007 403 बसपा – 206 सीटें 2012 403 सपा – 224 सीटें 2017 403 भाजपा – 325 सीटें l

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