मेरे कहने पर गिराया गया अयोध्या में विवादित ढांचा: रामविलास वेदांती

लखनऊ। अयोध्या में बाबरी विध्वंस को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद डॉ. राम विलास दास वेदांती के ताजा बयान ने हलचल तेज कर दी है। वेदांती ने दावा किया कि अयोध्या में बाबरी ढांचा उनके कहने पर तोड़ा गया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि उनके, महन्त अवैधनाथ और अशोक सिंघल के कहने पर कारसेवकों ने अयोध्या में विवादित ढांचा गिराया था।

वेदांती ने कहा कि उस समय लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार समेत अन्य आरोपी भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद के नेता कारसेवकों को उकसा नहीं रहे थे, बल्कि वह उन्हें शान्त करने का प्रयास कर रहे थे। वेदांती ने कहा कि उन्होंने, महन्त अवैधनाथ और अशोक सिंघल ने ही कारसेवकों को उकसाते हुए कहा था कि एक धक्का और दो, विवादित ढांचा गिरा दो। उन्होंने कहा कि वहां पर कोई मस्जिद नहीं थी, सिर्फ एक विवादित ढांचा था जिसे उनके कहने पर कारसेवकों ने गिरा दिया था। आरोपी महन्त अवैधनाथ और अशोक सिंघल का निधन हो चुका है। वेदांती ने कहा है कि भले ही उन्हें फांसी हो जाए लेकिन वह अपने बयान से नहीं पलटेंगे।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद बाबरी मस्जिद विध्वंस मामला फिर से चर्चा में है। सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश पीसी घोष और न्यायाधीश रोहिंटन नरीमन की संयुक्त पीठ ने सीबीआई की अपील पर फैसला सुनाया है कि लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत 13 लोगों पर आपराधिक साजिश का केस चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में रोजाना सुनवाई के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि स्पेशल कोर्ट दो साल में मामले की सुनवाई पूरी करें।
इसके साथ ही इस केस को रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर कर दिया गया है। जहां तक सुनवाई रायबरेली में हो गई थी, उससे आगे की सुनवाई वहां होगी। सीबीआई की ओर से पेश वकील नीरज किशन कौल ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि रायबरेली की कोर्ट में चल रहे मामले को भी लखनऊ की स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर कर ज्वाइंट ट्रायल चलाया जाए। इसके साथ ही मामले से जुड़े जजों के तबादले पर रोक लगा दी गई है। सीबीआई को आदेश दिया है कि इस मामले में रोज उनका वकील कोर्ट में मौजूद रहेगा। कल्याण सिंह को राज्यपाल के पद पर रहने तक ट्रायल से छूट दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 13 लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। हालांकि इनमें से तीन का निधन हो चुका है तो अब 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा चलेगा। अदालत ने दो साल के अन्दर सुनवाई पूरी करने समेत कई बड़े फैसले किए हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मामले को दोनों पक्ष बातचीत के जरिये सुलझाएं।

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