मुस्कराते हुए हर विपरीत स्थिति का सामना करना भी तप है

भोपाल। कलियुग में उपवास या कोई अन्य साधना करने से भी बड़ा तप है खुश रहना। मुस्कराते हुए हर विपरीत स्थिति का सामना करते हुए उसे सहन करना भी तप है। यह बात आध्यात्मिक संत मोरारी बापू ने कही। वे शुक्रवार को भास्कर परिवार द्व‌ारा लालपरेड स्थित मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित राम कथा में बोल रहे थेl

संत बापू ने युवाओं से कहा कि जब इंटरनेट के जरिए दुनिया उनकी मुट्ठी में है, तो फिर वे महाभारत, गीता व रामचरित मानस जैसे ग्रंथ पढ़ें। पढ़कर समझ में न आए, तो कहीं जाकर सुनें। पढ़ने से अधिक सुनकर अच्छी बातों को आत्मसात किया जा सकता है। उन्होंने यह भी सीख दी कि पेड़ मत काटो, धरती का खनन, दोहन मत करो, नदियों को नुकसान मत पहुंचाओ। ये सब साधु समान हैं। संतों के भीतर वृक्ष, सरिता, धरती व पर्वत के गुण होते हैं।

-संत बापू ने कहा कि कलियुग की सबसे बड़ी साधना दुखों को सहन करना है। मुस्कराते हुए जो सब सहन करे और दूसरों की भलाई ही करे, इससे बड़ा तप और क्या हो सकता है। उन्होंने कहा कि हम उपवास रखते हैं। कई लोग उपवास के दौरान भूख सहन नहीं कर पाते। ऐसी स्थिति में वे क्रोध करते हैं। चिड़चिड़ापन आ जाता है, तो फिर ऐसा उपवास तप नहीं हुआ। तप तो सहन करना होता है।

-उन्होंने रामचरित मानस और अन्य ग्रंथों का जीवन में कितना महत्व है, यह बताते हुए युवाओं से कहा कि अब इंटरनेट के जरिए वे बहुत से ग्रंथ पढ़ कर अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। ये ग्रंथ हमारे गुरु हैं। पढ़कर समझने में दिक्कत हो तो कहीं जाकर इन पर होने वाली कथाओं को सुने। समाधान जरूर मिलेगा। ऐसे लोगों की बातों में न आएं, जो यह कहते हैं कि कथा सुनने से क्या होता है, वे लोग आपका बहुत नुकसान कर रहे हैं। ग्रंथों का श्रवण करने से एक न एक दिन ऐसा जरूर कुछ घटता है कि जीवन को एक नई दिशा मिलने लगती है। उन्होंने कहा कि पालनहार विष्णु स्वयं तपस्वी हैं।

-संतश्री ने कहा कि संतों में पेड़, नदी, पर्वत व धरती जैसे गुण समाएं रहते हैं। हम इनको नुकसान पहुंचाते हैं, तो समझो साधु का नाश कर रहे हैं। प्रकृति से जुड़ी इन वस्तुओं से खिलवाड़ हमारे अपने जीवन से खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि कलिकाल में समस्याओं के समाधान का एक बड़ा साधन और उपाय हरि नाम है।स्वयं भगवान शिव राम नाम जपते हैं। राम परम तत्व हैं।

 

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