मध्यप्रदेश के शहरों में पेयजल संकट

 

भोपाल।  प्रदेश के 158 शहरों में पेयजल संकट ने दस्तक दे दी है। तालाबों में एक माह का पानी बचा है तो ट्यूबवेल भी सूखने लगे हैं। इसे देखते हुए इन शहरों में पानी वितरण व्यवस्था बदलनी पड़ गई है। अब 19 शहरों में तीन दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालात और भी खराब हैं।

अच्छे मानसून के बाद गर्मी की शुरुआत में ही तालाब-हैंडपंप और ट्यूबवेलों का जलस्तर गिरने लगा है। जिलों में कलेक्टर अपने स्तर पर पेयजल की स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। वैसे तो अभी ट्यूबवेल उत्खनन पर रोक नहीं लगाई गई है, लेकिन इसी हफ्ते ये निर्णय लिए जा सकते हैं। कलेक्टरों से कहा गया है कि भूजल स्तर की समीक्षा कर ट्यबवेल उत्खनन पर रोक लगाएं। इसी के साथ निजी ट्यूबवेलों का अधिग्रहण भी किया जा सकता है।

वर्तमान में सभी शहरों में एक घंटे पानी दिया जा रहा है। इससे बड़े परिवारों की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। वे दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। उधर, जलसंकट गहराने पर पानी वितरण का समय एक से घटाकर आधा घंटा किया जा सकता है।

 

भोपाल संभाग के जावर, इंदौर संभाग के डही, झाबुआ, मेघनगर, पलसूद, उज्जैन के नीमच, कालापीपल, नलखेड़ा, सुसनेर, ग्वालियर के शाढौरा, जबलपुर के जुन्नारदेव, डोंगर परासिया, दमुआ, बड़कुही चांद, बिछुआ और सागर संभाग के मकरोनिया बुजुर्ग, पथरिया एवं बक्स्वाहा आदि।

दो हजार नल-जल योजनाएं बंद

सूत्र बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में दो हजार से ज्यादा नल-जल योजनाएं बंद हैं। इनमें से 998 योजनाओं को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को चालू करना था। इन पर दो लाख से कम राशि खर्च होना है। इसके लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने 24 करोड़ रुपए पंचायत विभाग को दिए हैं। पीएचई ने 3,515 नल-जल योजनाओं पर हाल ही में काम शुरू किया है।

 

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