भाजपा में शामिल होने के बाद पहली बार भोपाल पहुंचे महाराज, जगह-जगह हुआ स्वागत

 

 

 

भोपाल। कांग्रेस छोड़कर कल ही भाजपा में शामिल हो चुके मध्यप्रदेश के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया आज जब दिल्ली से भोपाल पहुंचे तो एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही उनका जोरदार स्वागत किया गया।

एयरपोर्ट से निकलने के बाद जगह-जगह स्वागत किया गया। बाजे-गाजे के साथ कई टोलियों में कार्यकर्ता और नेता मौजूद थे। सभी ने सिंधिया का जोरदार स्वागत किया।

स्वागत को अद्भुत कहा जा रहा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि ऐसा स्वागत तो सिंधिया का आज तक कांग्रेस में भी नहीं हुआ होगा।

महिला, पुरुष, युवक, हर तरह के लोग भोपाल में ज्योतिरादित्य के लिए पलकें बिछाए दिख रहे थे। भाजपा में शामिल होने के बाद सिंधिया पहली बार भोपाल पहुंचे हैं। वे भाजपा कार्यालय पहुंचेंगे।

यहां पहुंचने के बाद सिंधिया ने शहर में रोड शो किया। शाम 5 बजे एयरपोर्ट से शुरू हुआ 20 किलोमीटर लंबा रोड शो 6.30 बजे भाजपा कार्यालय पहुंचा। यहां उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय, कुशाभाऊ ठाकरे, राजमाता सिंधिया और माधवराव सिंधिया की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया। भाजपा कार्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिंधिया का स्वागत किया। वे भाजपा कार्यालय में ही कार्यकर्ताओं को संबोधित कर सकते हैं। इसके बाद वे ग्वालियर-चंबल संभाग से आए अपने समर्थकों से मुलाकात करेंगे। रोड शो के दौरान जिला कांग्रेस कार्यालय के दफ्तर के पास कांग्रेसियों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की।

सिंधिया शाम को करीब 4.45 बजे भोपाल पहुंचे थे। एयरपोर्ट पर बड़ी तादाद में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थकों ने उनका स्वागत किया। समर्थक अपने साथ ज्योतिरादित्य और उनके पिता माधवराव सिंधिया के पोस्टर भी लाए। रोड शो में कार्यकर्ताओं की भीड़ देखकर सिंधिया काफी खुश नजर आए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा- लोगों का स्नेह मेरी पूंजी है। इस बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सिंधिया पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि सिंधिया अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर डरे हुए थे और वे इसीलिए विचारधारा को जेब में रखकर आरएसएस के साथ चले गए।

राहुल का ज्योतिरादित्य पर तंज

सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने पर राहुल गांधी ने कहा, ”यह विचारधारा की लड़ाई है। एक तरफ कांग्रेस की विचारधारा है और दूसरी तरफ आरएसएस-भाजपा की विचारधारा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया की विचारधारा मुझे पता है, लेकिन वे सियासी भविष्य को लेकर डरे हुए थे। वे मेरे मित्र हैं और मैं उनकी विचारधारा को जानता हूं। उन्होंने इसे अपनी जेब में रख लिया और आरएसएस के साथ चले गए। लेकिन, सच्चाई यह है कि वहां पर उन्हें न इज्जत मिलेगी, न ही उन्हें संतुष्टि मिलेगी। मेरी उनसे पुरानी दोस्ती है। सिंधिया जी के दिल में जो है, वो जुबान पर नहीं है।

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