फिर होने लगी नकदी की किल्लत, रिजर्व बैंक ने घटाया कैश कोटा

भोपाल। मध्यप्रदेश में नोटबंदी के जहां सामान्य होने में काफी समय लग गया था, वहीं एक बार फिर से नकदी की किल्लत देखने को मिल रही है। इन दिनों बैंकों में पर्याप्त राशि नहीं है और एटीएम खाली पड़े हैं। एक तरफ लोगों को पर्याप्त नकद राशि नहीं मिल रही है। दूसरी तरफ बैंकों से भी उपभोक्ताओं को चिल्लर से भुगतान किया जा रहा है। ऐसे में शादी-ब्याह के मौसम में नागरिकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को उठानी पड़ रही है। जिन्हें उपज बेचकर बाजार में नकद राशि में सामग्री खरीदनी होती है।

गौरतलब है कि, नोटबंदी के बाद से ही नकद भुगतान एक बड़ी समस्या बना हुआ है। सरकार कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है, लेकिन ग्रामीण और किसान तो अलग पढ़े लिखे नागरिक भी अभी पूरी तरह से कैशलेस लेनदेन में परिपक्व नहीं हुए हैं। यही वजह है कि सभी को नकद भुगतान की सर्वाधिक जरूरत पड़ रही है।

प्रति खाते अधिकतम 50 हजार का भुगतान

इन दिनों किसानों को मंडी में जिंस विक्रय के बाद व्यापारियों द्वारा चेक दिए जा रहे हैं। जिनके भुगतान के लिए किसानों को बैंकों में लाइन में लगना पड़ रहा है। इसके बाद जब उन्हें बैंक से भुगतान भी मिलता है तो नगदी की कमी के चलते प्रति खाते पर 40 से 50 हजार रुपये ही नगद राशि दी जा रही है। अधिक राशि के इच्छुक किसानों को अपना पूरा भुगतान लेने के लिए कई-कई बार बैंकों के फेरे लगाने पड़ रहे हैं।

एक किसान रामबाबू अहिरवार ने बताया कि पहले तो किसानों को बैंकों से आवश्यकता से कम राशि मिल रही है। इस पर भी भुगतान में बैंकों द्वारा किसानों को चिल्लर भी थमाई जा रही है। जिसे सामान खरीदने के बाद व्यापारी और दुकानदार लेने में आना-कानी कर रहे हैं। कुछ दुकानदार जब चिल्लर लेने तैयार भी होते हैं तो 100 रुपये की चिल्लर 90 रुपये कीमत में स्वीकार कर रहे हैं। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

उधर नगर के अधिकांश एटीएम भी खाली पड़े हुए हैं। जिससे लोगों को एटीएम मशीनों से भी नगद राशि नहीं मिल पा रही है। बीएसएनएल दफ्तर के सामने स्थित एटीएम बंद कर दिया गया। जबकि हनुमान चौराहे से लेकर जयस्तंभ चौक तक के लगभग एक दर्जन एटीएम खाली पड़े हुए हैं। नगर के अन्य स्थानों पर स्थित एटीएम की भी लगभग यही स्थिति है और कुछ कई बैंकों ने अपने एटीएम कक्षों को शटर लगाकर बंद कर दिया है। इस कारण नगर में नकद राशि की किल्लत बढ़ती जा रही है।

सहकारी बैंक से भुगतान में सर्वाधिक समस्या

जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक में क्षेत्र के सर्वाधिक किसानों के खाते हैं और इसी बैंक में नकदी की समस्या सबसे ज्यादा आ रही है। इस बैंक में प्रतिदिन हजारों किसान राशि निकालने के लिए आ रहे हैं। जिन्हें घंटों धूप में लगकर अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़ता है। बैंक में राशि निकालने आए दौलतराम किरार का कहना है कि परिवार में विवाह है और इसलिए उन्हें राशि की आवश्यकता है, लेकिन बैंक प्रबंधन निर्धारित समय तक ही निकासी स्लिप स्वीकार कर रहा है। इसके बाद आने वाले किसानों को भुगतान नहीं दिया जा रहा है। उधर परिसर में पानी के लिए भी किसानों को काफी परेशान होना पड़ रहा है। दूसरी ओर एक अन्य किसान ने बताया कि नकदी की कमी के चलते बैंक प्रबंधन द्वारा अब अधिक किसानों को भुगतान करने के लिए प्रति खाते पर 40 हजार रुपये तक की राशि दे रहा है।

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