दो लाख से ज्यादा का हिसाब पर्ची, कागज पर लिखना भी महंगा पड़ेगा

इंदौर। दो लाख और ज्यादा का हिसाब पर्ची, कागज पर लिखना भी महंगा पड़ेगा। आयकर के नए प्रावधानों के बाद अब यदि भाई-बहनों या खून के रिश्तों में भी इस सीमा से ज्यादा का लेन-देन नकद हुआ तो उसे ली गई राशि के बराबर ही पेनल्टी चुकाना होगी।

अब तक नकद लेन-देन की सीमा से मुक्त किसान भी इसके दायरे में शामिल हो गए हैं। सीए भरत नीमा के मुताबिक पहले किसानों के आपसी नकद लेन-देन की कोई सीमा नहीं थी। अब इन पर दो लाख और ज्यादा की नकद प्राप्ति प्रतिबंधित की गई है। आयकर की धारा 269 एसटी के अंतर्गत व्यक्ति ने जितनी राशि नकद ली है, उतनी ही पेनल्टी धारा 271डीए के तहत व्यक्ति पर लगाई जाएगी। लिहाजा यदि लोग लेन-देन को रफ कागज, पर्ची या डायरी पर लिखकर याददाश्त के तौर पर रखते हैं और वह कागज जांच के दौरान आयकर विभाग के हाथ लगता है तो उस पर पेनल्टी चुकाना होगी। भले ही आप बाद में उस हिसाब को अपने अकाउंट में दिखा दें।

अलग-अलग बिल भी नहीं

सीए नीमा के मुताबिक यदि कोई व्यापारी दो लाख या ज्यादा का बिल बनाता है। वह सोचता है कि इस बिल को दो-तीन अलग-अलग बिलों में बांटकर दो लाख से ज्यादा का पैसा नकद ले ले तो भी ऐसा नहीं हो सकता। एक ही दिन में एक व्यक्ति से भी कुल दो लाख या ज्यादा नकद नहीं ले सकते। अलग-अलग तारीखों में जरूर ऐसा किया जा सकता है। हालांकि इसमें खरीदार पर बोझ आ जाएगा। यदि वह कोई रीसेलर है तो वह 10 हजार से ज्यादा की नकद खरीदारी नहीं कर सकता। ऐसा करने पर उसे हानि-लाभ खर्चे का मुजरा अकाउंट में नहीं मिलेगा। सिर्फ आम उपभोक्ता जिसे कहीं भी रिकॉर्ड में आय-खर्च नहीं दिखाना है वही 10 हजार से ज्यादा की नकद खरीदारी करेगा।

 

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