जो अपने बाप का नहीं किसी का नहीं- मुलायम

मैनपुरी। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद भी समाजवादी पार्टी (सपा) में आन्तरिक कलह शान्त नही हुई है। खासतौर से पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव अपने साथ हुए बुरे सलूक को भुला नहीं पाए हैं। उन्हे अपने बेटे अखिलेश यादव द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर काबिज होना जहां रास नहीं आया है, वहीं शिवपाल यादव की लाल बत्ती छीने जाने से भी वह अब तक खफा हैं।

मुलायम ने एक कार्यक्रम में अखिलेश यादव पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कोई बाप अपने रहते बेटे को मुख्यमंत्री नहीं बनाता, लेकिन मैंने अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद भी मुझे बड़ा अपमान सहना पड़ा । उन्होंने कहा कि कन्नौज में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बयान दिया था कि जो बेटा अपने बाप का नहीं हो सकता है, वह आपका क्या होगा। इस बयान का बहुत असर हुआ और हम चुनाव हार गए। इतना ही नहीं उन्होंने स्वयं कहा कि यह बात सही है, जो अपने बाप का नहीं हो सकता वह किसी का नहीं हो सकता।

अपमान करने वाले अपने थे, किसके पास जाता?

सपा संरक्षक ने कहा कि जितना मेरा अपमान अब हुआ, पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि दो लोगों ने मेरा अपमान किया और यह लोग कौन हैं, सब जानते हैं। उन्होंने भविष्य की सियासत को लेकर अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि मैं जनता की भावनाओं को ध्यान में रखकर फैसला करूंगा।

जिस चाचा ने सही राह दिखाई, उसे ही हटाया

मुलायम ने अखिलेश यादव द्वारा मुख्यमंत्री रहते चाचा शिवपाल यादव को मंत्री पद से हटाने पर भी कड़ी नाराजगी जतायी और कहा कि शिवपाल इतना अच्छा काम करते थे। अखिलेश ने अपने उस चाचा को ही मंत्री पद से हटा दिया था, जिसने उसको जीवन की सही राह दिखाई। उन्होंने कांग्रेस से गठबन्धन के अखिलेश के फैसले की भी कड़ी आलोचना की और कहा कि अखिलेश ने कांग्रेस से गठबंधन किया, जिसने मुझ पर तीन बार जानलेवा हमला करवाया। मैं अब अखिलेश के भरोसे नहीं जनता के भरोसे पर रहूंगा।

अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री रहते न सिर्फ शिवपाल यादव को मंत्री पद से हटाया बल्कि उनसे प्रदेश अध्यक्ष पद भी छीन लिया। इसके बाद चुनाव में मुलायम के कहने पर भी कुछ लोगों को टिकट नहीं दिए गए, वहीं शिवपाल समर्थकों के टिकट काटे गए। यहां तक की शिवपाल पार्टी के स्टार प्रचारक भी नहीं बनाए गए और वह केवल अपनी जसवन्तनगर विधानसभा में ही सिमट कर रह गए।

अखिलेश के इन निर्णयों से आहत मुलायम ने चुनाव प्रचार से दूरी बनाये रखी और गिनती की सभाएं की। इसके अलावा अमर सिंह को पार्टी से निकाला जाना भी उन्हें रास नहीं आया। आखिरी बार पिता-पुत्र की जोड़ी योगी आदित्यनाथ सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में साथ नजर आयी थी। हालांकि दोनों ही नेता अलग-अलग कार्यक्रम में पहुंचे थे। वहीं इस दौरान मुलायम का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कान में कुछ कहना भी बेहद सुर्खियों में आया था। अखिलेश बार-बार पिता मुलायम की ओर से सब कुछ सामान्य होने का दावा करते आये हैं, लेकिन मुलायम के ताजा बयान ने साफ कर दिया है कि पिता-पुत्र के बीच की दूरी लगातार बढ़ती जा रही है।

,
Shares