उप्र. में रोचक हुआ आखिरी दौर का चुनाव, काशी में तीन दिन से ‘नमो मंत्र’ की गूंज

वाराणसी, 06 मार्च । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का अंतिम दौर बेहद रोचक हो चुका है। सातवें व आखिरी चरण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी सहित सात जिलों की 40 विधानसभा सीटों के लिए आठ मार्च को मतदान होगा। सोमवार को प्रचार का अंतिम दिन रहा। इसलिये सियासी महाभारत के आखिरी चक्रव्यूह को फतह करने के लिए सभी दलों ने आज पूरी ताकत झोंक दी। भाजपाई काशी में ‘नमो मंत्र’ का जाप कर रहे हैं तो प्रधानमंत्री मोदी भी तीन दिन से अपने संसदीय क्षेत्र में ही डटे रहे और विपक्षियों को चित करने के लिए लगातार ब्रह्मास्त्रों का प्रयोग किया। अंतिम चरण के चुनाव प्रचार के आखिरी दिन प्रधानमंत्री मोदी ने जहां वाराणसी के गड़वाघाट आश्रम पहुंचकर यदुवंशियों की आस्था स्थली में मत्था टेका वहीं वाराणसी कैंट सीट के लिए पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पैतृक आवास पर पहुंचकर एक नया संदेश दिया। मोदी आज रोहनिया में एक चुनावी जनसभा भी संबोधित किये। चुनावी अभियान में नित नये प्रयोग करने में माहिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले तीन दिन से काशी को मथ डाला। इस दौरान उन्होंने कई जनसभायें की, बाबा विश्वनाथ व काल भैरव का दर्शन किया और रोड शो के माध्यम से जनता दर्शन भी किया। एक जनसभा में उन्होंने काशी के सांस्कृतिक विरासत को बचाते हुए उसे अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने का अपना संकल्प भी दोहराया। प्रधानमंत्री की उपस्थिति में तीन दिन से समूचा वाराणसी मोदीमय बना हुआ है।

राजनीतिक समीक्षकों की माने तो मोदी के अभियान का सबसे अधिक असर उनके सांकेतिक और मूक चुनाव प्रचार का रहा। इसके तहत उन्होंने महामना मदन मोहन मालवीय से लेकर मुंशी प्रेमचंद, सरदार पटेल, स्वामी श्री श्री आत्मा विवेकानंद और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री तक की मूर्तियों पर माल्यार्पण किया और गड़वाघाट आश्रम तथा शास्त्री जी के पैतृक आवास पहंुचकर एक तीर से कई निशाना साधने की कोशिश भी की। गड़वाघाट आश्रम में उन्होंने गायों को चारा खिलाया, संतों का आशीर्वाद लिया, लेकिन कोई संबोधन नहीं दिया। आश्रम के गुरु शरणानंद ने इस अवसर पर मोदी के नेतृत्व में भारत को विश्वगुरु बनने का आशीर्वाद दिया। सियासी समीक्षक कहते हैं कि मोदी के चुनाव प्रचार का यह तरीका बेहद असरकारी है। दरअसल गड़वाघाट आश्रम यादवों द्वारा स्थापित पीठ माना जाता है और काशी समेत पूरे पूर्वांचल में इस पीठ का विशेष असर है। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के इस प्रिय आश्रम में मोदी के मत्था टेकने का सियासी असर अंतिम दौर के मतदान में आठ मार्च को देखा जा सकता है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन मोदी के अलावा सभी दिग्गजों ने आज अपने-अपने दलों के प्रत्याशियों के लिए एड़ी से चोटी तक का पूरा जोर लगा दिया। सपा अध्यक्ष व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जौनपुर में सात जनसभाएं कर पार्टी के उम्मीदवारों की फिजां बनाई तो उनकी सांसद पत्नी डिंपल यादव ने आज चंदौली और भदोही में तीन रैलियां संबोधित कीं। सपा के ही मो. आजम खान आज गाजीपुर में रहे। अखिलेश ने अपनी रैलियों में मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि यदि उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी पसंद न हो तो मुख्यमंत्री की कुर्सी उनसे बदल लें। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को आज सुबह वाराणसी में एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस भी करनी थी, लेकिन ऐन वक्त पर उसे रद्द कर दी गयी। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने बताया कि चुनाव प्रचार का अंतिम दिन होने के कारण दोनों नेता आज बहुत व्यस्त रहे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी प्रचार के आखिरी दिन सोनभद्र, गाजीपुर, जौनपुर व भदोही तो केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह गाजीपुर और चंदौली में जनसभाओं को संबोधित किये। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने आज वाराणसी और जौनपुर में सभा कर भाजपा के चुनाव प्रचार को धार दिया। जौनपुर में उन्होंने रोड शो भी किया। भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी आखिरी दिन चुनाव प्रचार अभियान को गर्माया। सोनभद्र, गाजीपुर और जौनपुर के अलावा वह काशी भी पहुंचे और रिक्शा चलाकर भाजपा का प्रचार किया। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के पास रिक्शा चलाते हुए मनोज तिवारी ने कहा कि वह रिक्शा बड़े ही संतुलित ढंग से चला लेते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की साइकिल का संतुलन बिगड़ गया है। उधर, बसपा सुप्रीमो मायावती ने आज लखनऊ में एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर दावा किया चुनाव बाद उनकी पार्टी पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जा रही है। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। गौरतलब है कि उप्र विधानसभा चुनाव के अंतिम दौर का मतदान वाराणसी और मीरजापुर मण्डलों के सात जिलों – जौनपुर, गाजीपुर, वाराणसी, चंदौली, भदोही, सोनभद्र और मिर्जापुर के 40 विधानसभा क्षेत्रों में आठ मार्च को होना है। वर्ष 2012 के चुनाव में इन 40 सीटों में से 23 पर सपा, 05 पर बसपा, चार पर भाजपा, 03 पर कांग्रेस और 05 पर अन्य दलों व निर्दलीयों का कब्जा था। वाराणसी जिले में विधानसभा की आठ सीटें हैं। इनमें 2012 के चुनाव में पिंडरा सीट पर कांग्रेस का, अजगरा (सु) और शिवपुर सीट पर बसपा, वाराणसी उत्तरी, वाराणसी दक्षिणी व वाराणसी कैंट पर भाजपा का तथा सेवापुरी सीट पर सपा का कब्जा था। रोहनिया सीट 2012 में अपना दल के पास थी, लेकिन उपचुनाव में यह सपा के पास चली गई।

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