इंदौर: डॉ. भक्तिदेवी यादव को घर जाकर दिया पद्ममश्री अलंकरण

इंदौर। भारत के राष्ट्रपति की ओर से कलेक्टर पी. नरहरि ने इन्दौर की बुजुर्ग डॉक्टर भक्तिदेवी यादव को पद्मश्री अलंकरण प्रदान किया। डॉ. भक्तिदेवी यादव अस्वस्थ होने के कारण दिल्ली अलंकरण समारोह में शामिल नहीं हो पाई थी।

कलेक्टर ने आज उनके निवास पर पहुंचकर पद्ममश्री अलंकरण प्रदान किया। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री जयंत मलैया, महापौर मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़, जिला पंचायत अध्यक्ष कविता पाटीदार भी उपस्थित रहे।

डॉ. यादव के पुत्र डॉ. रमण यादव ने बताया कि उनकी मां भक्तिदेवी यादव इन्दौर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश में रहने वाली पहली छात्रा थी। इन्होंने वर्ष 1949-1952 में एम.बी.बी.एस. की डिग्री प्राप्त की और फिर 1962 में एम.एस. की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद चिकित्सा के माध्यम से समाज सेवा में लग गई।

डॉ.भक्तिदेवी यादव के नाम नॉर्मल डिलेवरी कराने का रिकार्ड दर्ज है। डॉ. भक्तिदेवी यादव लगातार 60 वर्षों से सेवा कार्य में लगी है और 1 लाख 75 हजार से अधिक नॉर्मल डिलेवरी करवाई है।

डॉ. यादव ने अपने शोध पत्र “”प्रेग्नेंसी इन एडवोसेशंस” में 1962 में ही यह उल्लेख किया था कि आने वाले समय में 12 से 17 वर्ष की आयु की बालिकाओं में कौमार्य के समय गर्भावस्था की समस्या सबसे ज्यादा होगी। सामाजिक मूल्यों का ह्यास नैतिकता की कमी से यह समस्या उत्पन्न होगी।

डॉ. रमण यादव ने बताया कि मां ने उस समय विपरीत परिस्थितियों में रहकर पढ़ाई की और बिना लाइट के कई जटिल प्रकार के महिलाओं के ऑपरेशन किये हैं।

 

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