आरएसएस शाखाएं बढ़कर 57,233 हुईं

नई दिल्ली/कोयंबटूर, 19 मार्च । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का सर्वोच्च निर्णायक मंडल अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) की तीन दिवसीय वार्षिक बैठक रविवार को तमिलनाडू के कोयंबटूर में शुरू हो गई। 1925 में नागपुर के रेशम बाग से शुरू हुए संघ की दैनिक शाखाओं का आंकडा 57,233 पर पहुंच गया है। बैठक का विधिवत उद्घाटन सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत तथा सरकार्यवाह भैयाजी (सुरेश) जोशी ने भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया। उद्घाटन सत्र में प्रतिवेदन प्रस्तुति के दौरान केरल में कम्युनिस्ट हिंसा के सभी पीड़ितों और समाज जीवन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले दिवंगत महानुभावों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संघ के सहसरकार्यवाह वी. भगय्या ने प्रेसवार्ता में पूरे देश में संघ शाखा की वृद्धि पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पिछले 10 सालों में संघ का काम लगातार चरणबद्ध तरीके से बढ़ रहा है। विस्तार के अलावा, संघ कार्य का एकीकरण भी चल रहा है। उन्होंने वर्ष 2017 का वृत देते हुए बताया कि पूरे देश में संघ की दैनिक शाखा की संख्या 57233, साप्ताहिक मिलन 14896 और मासिक मंडली की संख्या 8226 हो गई है। उन्होंने बताया कि 19121 सेवा बस्तियों में स्वयंसेवकों द्वारा सेवा कार्य किये जा रहे हैं। भगय्या ने संघ द्वारा आयोजित शिक्षण वर्गों का आंकडा पेश करते हुए कहा कि पिछले साल प्राथमिक शिक्षा वर्ग में एक लाख युवाओं ने पूरे देश में भाग लिया। पूरे देश में आयोजित 20 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर प्रथम वर्ष में 17500 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया। वहीं क्षेत्रीय स्तर पर आयोजित द्वितीय वर्ष में 4130 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया। नागपुर में आयोजित होने वाले तृतीय वर्ष प्रशिक्षण शिविर में देशभर के 973 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। तीन दिवसीय बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों की शाखाओं से निर्वाचित प्रतिनिधि, संघ के प्रांत स्तर के निर्धारित कार्यकर्ता, संघ के अनुशांघिक (संघ परिवार) 40 संगठनों के लगभग 1400 प्रतिनिधि बैठक में भाग ले रहे हैं। इन संगठनों में विश्व हिन्दू परिषद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय किसान संघ, सेवा भारती, संस्कृति भारती, विद्या भारती और भारतीय मजदूर संघ आदि शामिल हैं।

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