RTE : भोपाल के निजी स्कूलों में 19 करोड़ का घोटाला

भोपाल अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) की एक जांच को लेकर भोपाल शहर के लगभग 925 स्कूल दायरे में आ गए हैं। इन सभी स्कूलों में बच्चों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम की प्रतिपूर्ति राशि सरकार ने दी है। अब ईओडब्ल्यू एक-एक स्कूल को मिली प्रतिपूर्ति राशि की जांच करने में जुट गया है। इस मामले में प्रथम दृष्टया भोपाल शहर में वर्ष 2015-16 के शिक्षण सत्र में करीब 19 करोड़ रुपए का घपला सामने आया है।
ईओडब्ल्यू को मिली शिकायत के बाद वहां पर जिला परियोजना समन्वयक समर सिंह राठौर के खिलाफ इस मामले में जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि प्रतिपूर्ति राशि भोपाल के लगभग 925 स्कूलों को दी गई है। इन स्कूलों की सूची बना ली गई है। अब जिला शिक्षा केंद्र से इन स्कूलों को जारी की गई प्रतिपूर्ति की राशि की जानकारी मांगी। यह जानकारी आने के बाद ईओडब्ल्यू अपने तरह से एक-एक स्कूल से इस राशि को चैक करेगा। इसके बाद यदि कई गड़बड़ी पाई गई तो उस स्कूल के प्रबंधन और अफसरों को इस मामले में आरोपी बना सकता है।
यह अनिवार्य शिक्षा का अधिनियम
आरटीई के तहत प्रायवेट स्कूलों को प्रारंभिक कक्षा से पांचवी तक 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब वर्ग के बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। इस फीस की प्रतिपूर्ति राज्य शासन करता है।
प्रदेश भर में गड़बड़ी
सीएजी की रिपोर्ट में भी आरटीई के तहत हुई गड़बड़ियों को उजागर किया जा चुका है। वर्ष 2016 की सीएजी की रिपोर्ट में बताया गया कि बुरहानपुर,धार और झाबुआ जिलों में वर्ष 2011 से 2015 के बीच 303 गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों के 4 हजार 361 विद्यार्थियों के लिए एक करोड़ से ज्यादा का भुगतान कर दिया गया। वहीं बालाघाट जिले में वर्ष 2011 से 2013 के दौरान 231 गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में भी फीस की प्रतिपूर्ति दे दी। जबकि आरटीई अधिनियम के अंतर्गत केवल मान्यता प्राप्त विद्यालय ही प्रतिपूर्ति के लिए पात्र होते हैं।

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