MP: सवा दस लाख किसानों को 1670 करोड़ रुपए का तोहफा

भोपाल। चुनावी साल में बजट से पहले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के लिए खजाना खोल दिया। राजधानी के जंबूरी मैदान पर सोमवार को हुए किसान महासम्मेलन में सबसे बड़े मतदाता वर्ग किसानों को साधने के लिए कई घोषणाएं की गईं। प्रदेश में छत्तीसगढ़ की तर्ज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं और धान बेच चुके 10 लाख 21 हजार से ज्यादा किसानों को 1 हजार 670 करोड़ रुपए का तोहफा (एरियर) बांटा जाएगा।

प्रति क्विंटल किसानों को 200 रुपए सरकार अतिरिक्त तौर पर देगी। आगामी गेहूं और धान खरीदी में भी भाव दो हजार रुपए क्विंटल से कम नहीं होने दिए जाएंगे। 17.78 लाख किसानों को सरकार 2 हजार 600 करोड़ रुपए की ब्याज माफी देगी। इसके लिए कृषक ऋण सहायता योजना लागू होगी।

किसान महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने अलग तरह से किसानों से संवाद किया। एक-एक घोषणा किसानों की सहमति लेकर की। उन्होंने कहा कि एक एकड़ में किसान को कम से कम 25 हजार रुपए बचने चाहिए। 2016-17 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 7.38 लाख से ज्यादा किसानों ने 67.25 लाख मीट्रिक टन गेहूं बेचा था, उन सभी को दो सौ रुपए प्रति क्विंटल और दिए जाएंगे।

इसी तरह खरीफ 2017 में 2.83 लाख किसानों द्वारा बेची गई धान पर भी दो सौ रुपए प्रति क्विंटल दिए जाएंगे। उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए मुख्यमंत्री उत्पादकता प्रोत्साहन योजना लागू होगी। इसी योजना के तहत आगामी गेहूं खरीदी में 1 हजार 735 रुपए न्यूनतम समर्थन मूल्य के ऊपर 265 रुपए यानी दो हजार रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान किया जाएगा। अगले साल धान में भी दो हजार रुपए क्विंटल किसान को मिलेंगे।

मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में एक अन्य बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि सहकारी बैंकों के 17.78 लाख डिफाल्टर किसानों ब्याज माफ करते हुए सरकार 2 हजार 600 करोड़ रुपए स्वयं वहन करेगी। किसानों के ऊपर कुल छह हजार करोड़ रुपए का कर्ज बकाया है। कर्ज की रकम दो किस्तों में वसूली जाएगी। पहली किस्त देते ही उसे 15 हजार रुपए का कर्ज लेने का हक मिल जाएगा।

भंडारण पर 25 फीसदी मिलेगी रकम, ब्याज भरेगी सरकार

भावांतर भुगतान योजना चना, मसूर, सरसों और प्याज की फसल पर भी लागू होगी। इसके लिए पंजीयन सोमवार से शुरू हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना में कुछ दिक्कतें आई थीं। उन्हें अब दूर किया जा रहा है। यदि किसानों को उपज का भाव ठीक नहीं मिलता है और वे फसल गोदाम में रखता है तो उसे जरूरी खर्च के लिए 25 प्रतिशत राशि बैंकों से उपलब्ध कराई जाएगी। इस पर जो ब्याज लगेगा वो सरकार भरेगी। चार माह बाद फसल बेचने पर यदि न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम भाव मिलता है तो भावांतर की राशि भी सरकार देगी। भंडारण का खर्च चार माह तक सरकार ही उठाएगी।

खेती के लिए देंगे बीहड़ की जमीन

चंबल क्षेत्र (भिंड, मुरैना, श्योपुर) में बीहड़ की हजारों हेक्टेयर जमीन किसानों को खेती करने के लिए दी जाएगी। इसके लिए अगले पांच साल में 1 हजार 200 करोड़ रुपए लगाकर सरकार जमीन को समतल कराएगी। इसके बाद यह जमीन आवंटित की जाएगी।

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