MP: माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति कुठियाला सहित 18 के खिलाफ एफआईआर

 

 

भोपाल. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में हुई अनियमितताओं में पूर्व कुलपति बीके कुठियाला सहित 18 लोगों के खिलाफ रविवार को ईओडब्लयू ने एफआईआर दर्ज की। हाल ही में विश्वविद्यालय प्रशासन ने तीन सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट ईओडब्ल्यू को सौंपी थी। डीजी ईओडब्ल्यू केएन तिवारी का कहना है कि  इस मामले में जल्द ही कुछ गिरफ्तारियां भी की जाएंगी।


रिपोर्ट में तत्कालीन कुलपति प्रो. बीके कुठियाला के दो कार्यकाल में अपात्र लोगों की नियुक्तियों और वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा हुआ था। इसी के बाद मामला दर्ज किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुठियाला ने खुद तो लंदन की यात्रा की ही। पत्नी को भी विवि के खर्च पर यात्रा कराई। इस राशि को 5 महीने बाद एडजस्ट किया गया। विवि के खर्च पर 13 ऐसे टूर पर गए जिसमें प्रशासनिक व वित्तीय नियमों का सीधे तौर पर उल्लंघन किया गया।

उन्होंने ब्लेडर सर्जरी के लिए 58,150 रुपए, आंख के ऑपरेशन के लिए 1,69,467 रुपए सहित एक अन्य बीमारी के लिए 20 हजार रु. का भुगतान भी यूनिवर्सिटी से प्राप्त किया। नियमानुसार गंभीर बीमारी में ही मेडिकल रिबर्समेंट मिलता है।

अनधिकृत तौर पर लैपटॉप, आई-फोन खरीद: पत्रकारिता विश्वविद्यालय में अनधिकृत तौर पर लैपटॉप, आई-फोन खरीदे गए, जिनका प्रो. कुठियाला ने उपयोग किया। एलपीसी की भ्रामक गणना की गई। रिपोर्ट में लिखा है कि प्रो. कुठियाला के मनमाने आचरण और उनके द्वारा की वित्तीय अनियमितताएं आर्थिक अपराध की जांच कराने के लिए उपयुक्त हैं।

181 शिकयतें आईं थीं: कमेटी को विश्वविद्यालय में हुई विभिन्न गड़बड़ियों को लेकर 181 शिकायतें प्राप्त हुईं थी। इससे एक विशेष विचारधारा से जुड़ी विभिन्न एजेंसी, संस्थाओं को उपकृत करने लाखों रुपए खर्च करने की गड़बड़ी सामने आई है। इसमें एबीवीपी से जुड़े  विद्यार्थी कल्याण न्यास को साढ़े पांच लाख रुपए का भुगतान भी शामिल है।

इसके अलावा भवन निर्माण और विभिन्न शहरों में कैंपस खोलने में अनियमितताएं सामने आईं हैं। इसके अलावा रिसर्च और पब्लिकेशन के नाम पर भी गड़बड़ी सामने आई है। गौरतलब है कि जनसंपर्क विभाग के अपर मुख्य सचिव एम. गोपाल रेड्डी तीन सदस्यीय कमेटी के अध्यक्ष हैं।

विवि के सिस्टम पर रिपोर्ट में गंभीर टिप्पणी: जांच कमेटी ने अपने आब्जर्वेशन में पाया है कि विवि को इन-फार्मल अथॉरिटी ने हाइजैक कर पैरलाइज्ड बना दिया था। यहां विचारधारा और आर्थिक दोनों रूप में भ्रष्टाचार हुआ।

ये गड़बड़ियां मिलीं

मापदंडों का ध्यान नहीं रखा गया। मानकों का पालन किए बगैर जगह-जगह स्टडी सेंटर खोले गए। इसके लिए डायरेक्टर एसोसिएट स्टडी सेंटर जवाबदार हैं। अधिकारी व कर्मचारी भ्रष्ट गतिविधि में लिप्त हैं। उन्होंने वित्त, प्रशासन, अकादमी व भंडार-क्रय, परीक्षा और प्रकाशन शाखा में गड़बड़ी की। विवि के शिक्षक और अधिकारियों ने एक विशेष विचारधारा के लिए काम किया। बड़े पैमाने में अनियमितताएं हुईं। भ्रष्ट प्रथाओं को उजागर करने वाले तथ्य और विश्वविद्यालय में समझौतों की बात सामने आई है।

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