MP:पेरेंट्स की फजीहत, स्कूलों में हुआ अघोषित अवकाश

भोपाल। इंदौर में स्कूल बस हादसे के बाद प्रदेश भर में स्कूल बस और वैन की जांच पड़ताल की जा रही है। नियम तोड़कर बच्चों को घर से स्कूल लाने ले जाने वाले इन वाहनों के संचालकों ने पुलिस और आरटीओ की सख्ती का विरोध किया है। इसको लेकर आज राजधानी के करीब 9 हजार से अधिक स्कूल बस और वेैन चालकों ने हड़ताल कर दी है। इससे अभिभावकों को बच्चों को स्कूल छोड़ना और लाना पड़ा। कई बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाए। हड़ताल के कारण पेरेंट्स परेशान रहे वहीं स्कूलों में अघोषित अवकाश दिखा।

हड़ताल खत्म नहीं की तो होगी कार्यवाही
स्कूल वाहन चालकों से चर्चा हुई है। पुलिस वेरिफिकेशन तो होना है, लेकिन तत्कालिक रूप से नहीं मांगा था। वेबपोर्टल पर ड्राइवर का नाम, मोबाइल नंबर और लाइसेंस की जानकारी मांगी है। चालक पुलिस, अभिभावकों पर दबाव बनाते हैं तो सख्त कार्यवाही होगी।
दिशा नागवंशी, एडीएम, हेडक्वार्टर

हमारी हड़ताल अनिश्चितकालीन है…
हमारी हड़ताल अनिश्चितकालीन है। सरकार जब हमारी मांगों को मान लेगी तब हम स्कूल बसों का संचालन विधिवत रूप से शुरू कर देंगे। तब तक सरकार और अभिभावकों को ही इस व्यवस्था को व्यवस्थित करना होगा।
शिव कुमार सोनी, अध्यक्ष मप्र स्कूल वाहन चालक सेवा समिति

और वाहन चालकों की यह मांगें…

चैकिंग के नाम पर वाहन चालकों से अभद्रता, मारपीट, वाहन जब्ती बंद करें।वाहन चालकों को यातायात पुलिस द्वारा सम्मान की नजरों से देखा जाए।घटना की जवाबदारी वाहन चालक की हो, लेकिन कोई तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटना होती है तो वाहन चालक को दोषी न ठहराया जाए।यातायात पुलिस द्वारा वाहन चालकों को प्रशिक्षण दिया जाए, जिससे वाहन चालक और यातायात पुलिस में समन्वय स्थापित हो सके, और पुलिस का भय दूर हो सके।एक वाहन को चार जगह चेक किया जाना गलत है, क्योंकि बच्चों को समय पर उनके स्टॉपेज पर छोड़ना होता है। ऐसे में बच्चे विलंब से घर पहुंचते हैं।विलंब होने पर अभिभावकों के फोन आना शुरू हो जाते हैं, जिससे वाहन चालक पर मानसिक दबाव बनता है, जो खतरनाक व मुश्किल है।वाहनों की चैकिंग विद्यालय में जाकर भी की जा सकती है, इसका निष्कर्ष जिला प्रशासन को निकालना चाहिए। ताकि कोई परेशानी न हो।

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