8 जून में शुरू हो रही है कैलाश मानसरोवर की यात्रा

इस साल 8 जून से 8 सितंबर तक पवित्र कैलाश मानसरोवर की यात्रा शुरू हो रही है। चीन के कब्जे वाले तिब्बत में मौजूद ये पवित्र पर्वत और सरोवर भगवान शिव का निवास स्थान माने जाते हैं। ये यात्रा बहुत दुर्गम और लंबी होती है। अमूमन 18 से 21 दिनों में ये पूरी होती है। कैलाश मानसरोवर की तरह ही भारत में भी 4 ऐसे पवित्र सरोवर मौजूद हैं, जिनकी यात्रा और इनमें स्नान का शास्त्रों में काफी महत्व माना गया है। इन सरोवरों को लेकर कहा जाता है कि इनमें स्नान करने से मनुष्य को निश्चित ही मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कैलाश मानसरोवर

इस सरोवर के बारे में कहा जाता है कि यहीं पर माता पार्वती स्नान करती हैं। पौराण‌िक कथाओं के अनुसार, यह सरोवर ब्रह्माजी मन से उत्पन्न हुआ था। इस सरोवर के पास ही कैलाश पर्वत है जो भगवान शिव का निवास स्‍थान माना जाता है। जिसके कारण इस सरोवर का महत्व और भी कई गुना बढ़ जाता है। इस जगह को हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध धर्म में भी बहुत पवित्र माना जाता है।

नारायण सरोवर

गुजरात के कच्छ जिले के लखपत तहसील में स्थित यह सरोवर भगवान का विष्‍णु का सरोवर माना जाता है। मान्यता है कि इस सरोवर में स्वयं भगवान विष्णु ने स्नान किया था। कई पुराणों और ग्रंथों में इस सरोवर के महत्व का वर्णन पाया जाता है

पंपा सरोवर

मैसूर के पास स्थित पंपा सरोवर एक ऐतिहासिक स्थल है। हंपी के निकट बसे हुए ग्राम अनेगुंदी को रामायणकालीन किष्किंधा माना जाता है। तुंगभद्रा नदी को पार करने पर अनेगुंदी जाते समय मुख्य मार्ग से कुछ हटकर बाईं ओर पश्चिम दिशा में पंपा सरोवर स्थित है। पंपा सरोवर के निकट पश्चिम में पर्वत के ऊपर कई जीर्ण-शीर्ण मंदिर दिखाई पड़ते हैं। यहीं पर एक पर्वत है, जहां एक गुफा है जिससे शबरी की गुफा कहा जाता है। कहते हैं इसी गुफा में शबरी ने भगवान राम को बेर खिलाए थे।

पुष्कर सरोवर

राजस्‍थान में अजमेर से 14 किमी दूरी पर स्थित इस सरोवर के पास भगवान ब्रह्मा जी ने स्वयं यज्ञ किया था।, जिसके कारण इस सरोवर को मोक्षदायी माना जाता है। इस सरोवर को लेकर एक यह मान्यता भी प्रचलित है कि भगवान राम ने अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध भी यहीं पर किए थे।

बिंदु सरोवर

 अहमदाबाद से उत्तर में 130 किमी दूरी पर बसे बिंदु सरोवर को लेकर माना जाता है कि इसी सरोवर के किनारे बैठ कर कर्दम ऋषि ने कई हजार वर्षों तक तपस्या की था। इस बात का वर्णन कई ग्रथों और पुराणों में भी पाया जाता है। साथ ही इस जगह को लेकर कहा जाता है कि यहीं पर भगवान परशुराम ने अपनी मां का श्राद्ध किया था।
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