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*फ्लोर होगा तब टेस्ट होगा*

*फ्लोर होगा तब टेस्ट होगा*

भोपाल, 14 मार्च 2020

प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अभय दुबे ने जारी एक बयान में कहा कि हास्यास्पद है कि मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री ने आज राज्यपाल महोदय से भारत के संविधान 175(2) के अधिकारों के तहत अभिभाषण के पहले फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की है ।

जबकि भारत के संविधान का अनुच्छेद 176 यह कहता है वर्ष के आरंभ का पहला सत्र अनिवार्य रूप से राज्यपाल महोदय के अभिभाषण से ही होगा अर्थात फ्लोर का निर्माण ही जब होगा जब राज्यपाल का अभी भाषण होगा ।

अनुच्छेद 176. *राज्यपाल का विशेष अभिभाषण:*

(1) राज्यपाल, विधान सभा के लिए प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात् प्रथम सत्र के आरम्भ में और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरम्भ में विधान सभा में या विधान परिषद वाले राज्य की दशा में एक साथ समवेत दोनों सदनों में अभिभाषण करेगा और विधान-मण्डल को उसके आह््वान के कारण बताएगा ।

(2) सदन या प्रत्येक सदन की प्रक्रिया का विनियमन करने वाले नियमों द्वारा ऐसे अभिभाषण में निर्दिष्ट विषयों की चर्चा के लिए समय नियत करने के लिए उपबन्ध किया जाएगा ।

भारत के संविधान में अनुच्छेद 175(2) में राज्यपाल को संदेश देने के लिए सदन को बुलाने का अधिकार दिया गया है ।

अनुच्छेद 175. सदन या सदनों में अभिभाषण का और उनको संदेश भेजने का *राज्यपाल का अधिकार:*

(1) राज्यपाल, विधान सभा में या विधान परिषद् वाले राज्य की दशा में उस राज्य के विधान-मंडल के किसी एक सदन में या एक साथ समवेत दोनों सदनों में, अभिभाषण कर सकेगा और इस प्रयोजन के लिए सदस्यों की उपस्थिति की अपेक्षा कर सकेगा ।

(2) राज्यपाल, राज्य के विधान-मण्डल में उस समय लम्बित किसी विधेयक के सम्बन्ध में संदेश या कोई अन्य संदेश, उस राज्य के विधान-मण्डल के सदन या सदनों को भेज सकेगा और जिस सदन को कोई संदेश इस प्रकार भेजा गया है वह सदन उस संदेश द्वारा विचार करने के लिए अपेक्षित विषय पर सुविधानुसार शीघ्रता से विचार करेगा ।

श्री दुबे ने कहा कि अब जब पंचम सत्र बजट के लिए 16 मार्च से 13 अप्रैल 2020 के लिए आहूत किया जा चुका है तब अनुच्छेद 175(2) की प्रासंगिकता वर्तमान परिप्रेक्ष्य में नही रह जाती ।
भोपाल, 14 मार्च 2020

प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अभय दुबे ने जारी एक बयान में कहा कि हास्यास्पद है कि मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री ने आज राज्यपाल महोदय से भारत के संविधान 175(2) के अधिकारों के तहत अभिभाषण के पहले फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की है ।

जबकि भारत के संविधान का अनुच्छेद 176 यह कहता है वर्ष के आरंभ का पहला सत्र अनिवार्य रूप से राज्यपाल महोदय के अभिभाषण से ही होगा अर्थात फ्लोर का निर्माण ही जब होगा जब राज्यपाल का अभी भाषण होगा ।

अनुच्छेद 176. *राज्यपाल का विशेष अभिभाषण:*

(1) राज्यपाल, विधान सभा के लिए प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात् प्रथम सत्र के आरम्भ में और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरम्भ में विधान सभा में या विधान परिषद वाले राज्य की दशा में एक साथ समवेत दोनों सदनों में अभिभाषण करेगा और विधान-मण्डल को उसके आह््वान के कारण बताएगा ।

(2) सदन या प्रत्येक सदन की प्रक्रिया का विनियमन करने वाले नियमों द्वारा ऐसे अभिभाषण में निर्दिष्ट विषयों की चर्चा के लिए समय नियत करने के लिए उपबन्ध किया जाएगा ।

भारत के संविधान में अनुच्छेद 175(2) में राज्यपाल को संदेश देने के लिए सदन को बुलाने का अधिकार दिया गया है ।

अनुच्छेद 175. सदन या सदनों में अभिभाषण का और उनको संदेश भेजने का *राज्यपाल का अधिकार:*

(1) राज्यपाल, विधान सभा में या विधान परिषद् वाले राज्य की दशा में उस राज्य के विधान-मंडल के किसी एक सदन में या एक साथ समवेत दोनों सदनों में, अभिभाषण कर सकेगा और इस प्रयोजन के लिए सदस्यों की उपस्थिति की अपेक्षा कर सकेगा ।

(2) राज्यपाल, राज्य के विधान-मण्डल में उस समय लम्बित किसी विधेयक के सम्बन्ध में संदेश या कोई अन्य संदेश, उस राज्य के विधान-मण्डल के सदन या सदनों को भेज सकेगा और जिस सदन को कोई संदेश इस प्रकार भेजा गया है वह सदन उस संदेश द्वारा विचार करने के लिए अपेक्षित विषय पर सुविधानुसार शीघ्रता से विचार करेगा ।

श्री दुबे ने कहा कि अब जब पंचम सत्र बजट के लिए 16 मार्च से 13 अप्रैल 2020 के लिए आहूत किया जा चुका है तब अनुच्छेद 175(2) की प्रासंगिकता वर्तमान परिप्रेक्ष्य में नही रह जाती ।

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