200 रुपए के पॉपकॉर्न और 150 रुपए की चाय मल्टीप्लेक्स में क्यों मिल रही; हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

इंदौर.शहर के मॉल्स में खुले मल्टीप्लेक्स में 200 रुपए का पॉपकार्न, 150 रुपए की चाय, 100 रुपए के समोसे-कचोरी इतने ऊंचे दाम पर क्यों बिक रहे हैं। सिनेमा देखने आने वालों को घर से लाया गया खाने-पीने का सामान अंदर क्यों नहीं ले जाने दिया जाता। हाई कोर्ट ने नोटिस जारी कर प्रदेश के मुख्य सचिव समेत मल्टीप्लेक्स के मालिकों से इन प्रश्नों का जवाब तीन सप्ताह में मांगा है।

खाद्य सामग्री को बाजार भाव के हिसाब से बेचे जाने या फिर दाम कम नहीं होने पर घर का बना सामान अंदर ले जाने की अनुमति देने के लिए जनहित याचिका दायर की गई है। जस्टिस पीके जायसवाल, जस्टिस एसके अवस्थी की डिविजन बेंच के समक्ष यह मामला लगा था। याचिकाकर्ता आयुष पांडे ने यह याचिका दायर की है। याचिका में मुंबई हाई कोर्ट के हाल ही में दिए फैसले का भी जिक्र किया है।

मुंबई हाईकोर्ट के आदेश को आधार बनाकर प्रदेश में व्यवस्था लागू कराने की मांग:मुंबई हाई कोर्ट ने शासन को आदेश दिए हैं कि वह मल्टीप्लेक्स में रेट कंट्रोल और घर से लाए सामान को प्रवेश दिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित कराए। इस जजमेंट के आधार पर प्रदेश में भी यही व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। यह भी कहा कि मप्र सिनेमा रूल्स 1972 में भी यह कहीं नहीं लिखा है कि बाहर का बना खाना अंदर नहीं ले जाया जा सकेगा। सिनेमा देखने डायबिटिज के मरीज भी आते हैं, जिन्हें समय-समय पर खाने की जरूरत होती है। बाहर की खाद्य सामग्री वह नहीं खा सकते। ऐसे में उन्हें घर से लाया सामान ले जाने की राहत मिलनी चाहिए।

परंपरागत सिनेमा घर में लूट नहीं :शहर के परंपरागत सिनेमा घरों में खाद्य सामग्री बेचने के नाम पर इतना रुपया नहीं लिया जा रहा है। कई सिनेमा घरों में घर का बना भोजन भी ले जाने दिया जाता है। जाते वक्त दर्शक ही साफ-सफाई कर जाते हैं।

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