13 को प्रदोष, 14 को ही मनाई जाएगी महाशिवरात्रि

भोपाल। महाशिवरात्रि के पर्व को अब महज कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं। लेकिन इस महापर्व को लेकर ज्योतिषाचार्यों के अलग-अलग मतों के कारण असमंजस की स्थिति बन गई है।

ज्योतिषाचार्य पं.जगदीश शर्मा समेत अन्य पंडितों का ज्योतिष ज्ञान जहां 13 फरवरी को महाशिवरात्रि व्रत करने की बात कह रहा है। वहीं ज्योतिषमठ संस्थान के ज्योतिषाचार्य पं.विनोद गौतम का कहना है कि 14 फरवरी को ही महाशिवरात्रि का दिन है, एवं इसी दिन श्रद्धालुओं को शिवरात्रि व्रत रखना चाहिए।

14 फरवरी को शिवरात्रि होने के दावे पर अपना तर्क रखते हुए पं.विनोद गौतम ने बताया कि, शास्त्रों के मुताबिक चतुर्दशी रात्रि को ही महाशिवरात्रि का व्रत शुरू किया जाता है। क्योंकि 13 फरवरी को त्रियोदशी है, ऐसे में 14 को चतुर्दशी रहेगी। 13 तारीख की मध्यरात्रि (बुधवार 00ः01 बजे) से चतुर्दशी तिथि से महाशिवरात्रि मान्य रहेगी जो 15 तारीख को रात 12ः40 तक रहेगी। 14 फरवरी को ही व्रत किया जाएगा एवं चारों पहर की पूजा की जाएगी।

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि 13 फरवरी को महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प नहीं ले सकते, क्योंकि इस दिन त्रियोदशी की तिथी रहेगी जिसमें प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। शिवरात्रि का व्रत इस तिथि में मान्य नहीं होता। क्योंकि अभी तिथियों का समाप्ति काल रात्रि में चल रहा है, जिसके कारण व्रत को लेकर यह असमंजस की स्थिति बनी है।

-रात्रिकालीन व्रत है महाशिवरात्रि

पं.विनोद गौतम का कहना है कि महाशिवरात्रि रात्रिकालीन व्रत है जो वार्षिक व्रत के रूप में मनाया जाता है। यह व्रत पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित होता है। जिसमें रात्रि जागरण के साथ ही भगवान शिव की आराधना एवं अभिषेक किया जाता है।

-संयोगः शिवरात्रि पर शिव को समर्पित श्रवण नक्षत्र

इस बार शिवरात्रि की रात एवं दिन में भगवान शिव को समर्पित श्रवण नक्षत्र रहेगा। साथ ही शिवरात्रि के दिन चंद्रमा मकर राशि में रहेगा। क्योंकि मकर राशि शनि की राशि है जो कि शिव से संबंधित है। इसलिए इस बार शिवरात्रि व्रत का प्रभाव और भी अधिक रहेगा। जो विशेष फलदायी है। इस व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ रखने से व्यक्ति को मनमाना फल मिलता है। सुयोग्य पति की प्राप्ति के लिए कन्याओं द्वारा यह व्रत रखा जाता है।

,
Shares